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मन का टिस…
बरसों बाद, नियति ने एक अप्रत्याशित मोड़ लिया. शीला एक साहित्यिक कार्यक्रम में गई हुई थी. मंच पर एक जाने-माने…
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मन का टिस…
दिन बीतते गए। शीला ने अपनी ज़िंदगी को एक नया आकार देने की कोशिश की. उसने पढ़ाना शुरू किया, बच्चों…
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मन का टिस…
कमरे की खिड़की से झांकती धुंधली धूप, शीला के चेहरे पर उतरकर भी कोई गर्माहट नहीं ला पाई. साठ वसंत…
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बेबसी का पिटारा…
अपने पोते रवि की पहल और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने के बाद, गोपाल और उनके बच्चों के बीच…
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बेबसी का पिटारा…
एक बूढ़ा आदमी, जिनका नाम गोपाल था, गाँव के एक छोर पर बने अपने छोटे से घर में अकेले रहते…
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बेबसी का पिटारा…
छात्रवृत्ति मिलने की खबर मीरा के लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. गाँव की धूल भरी गलियों से…
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बेबसी का पिटारा…
मीरा की आँखें हमेशा चमकती थीं – सपनों की चमक, ज्ञान की प्यास की चमक। वह उन लड़कियों में से…
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बेबसी का पिटारा…
शंकर दादा के शब्दों और उनकी दी हुई थोड़ी सी मदद ने रामू के भीतर दबी हुई उम्मीद की चिंगारी…
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बेबसी का पिटारा…
रामू का जीवन उसकी छोटी सी ज़मीन और उस पर उगाई जाने वाली फसल के इर्द-गिर्द घूमता था. सूरज की…
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बेबसी का पिटारा…
बेबसी… एक ऐसा भाव जो भीतर गहरे तक पैठ जाता है, जैसे किसी ठंडी लहर का अचानक छू जाना. यह…
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