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जेठ की अल्हड़ पवन…
बारिश की पहली बूंदों ने गाँव की मिट्टी को भिगो दिया था, लेकिन इसके साथ ही दिलों में भी एक…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
गाँव की गलियों में बारिश की पहली बूंदें गिरते ही हलवाई की दुकान पर भीड़ उमड़ पड़ी. गरमागरम जलेबी और…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
गाँव के पुराने कुएँ की दीवारों पर काई जम गई थी, और उसकी गहराई में अंधकार पसरा था. सालों से…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
गाँव की गलियों में अब खुशहाली लौट आई थी. पहली बारिश के बाद मिट्टी में सोंधी महक भर गई थी,…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
जेठ की तपती दोपहरी में जब धरती आग उगलती थी, तब हर कोई आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठा रहता.…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
गर्मी की दुपहरी में आम के बाग़ में घनी छाया तले गाँव के बच्चे जमा होते. हवा में आम की…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
एक शाम, जब सूरज हल्का झुकने लगा था, राधा खेतों में काम कर रही थी. उसके कंधे पर पड़ी गुलाबी…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
जेठ की तेज़ धूप में खेतों में काम करने वाली औरतों की हंसी लहरों की तरह गूँजती थी. उनकी मेहनत…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
गाँव में बरसों पुराना एक बरगद का पेड़ था, जो किसी गवाह की तरह हर पीढ़ी के बदलाव को देख…
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जेठ की अल्हड़ पवन…
रामू काका, गाँव के सबसे बुज़ुर्ग व्यक्ति, जिन्हें हर कोई सम्मान से देखता था। उनकी झुर्रियों में सालों का अनुभव…
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