Apni Virasat
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सुन्दरकाण्ड-09…
दोहा :- कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद। सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का…
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सुन्दरकाण्ड-08-3…
दोहा :- ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार । जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक…
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सुन्दरकाण्ड-08-2.
दोहा :- कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि। कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि।। महाराजजी श्लोक…
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सुन्दरकाण्ड-08-1…
दोहा :- देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु। रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज…
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सुन्दरकाण्ड-07…
सोरठा :- कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारी तब। जनु असोक अंगार दीन्हि हरषि उठि कर गहेउ ।। वाल्व्याससुमनजी…
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Sundarkand-06…
… Mother Sita-Trijata Dialogue… Doha :- Jahan Tahan Gaeen Sakal Tab Seeta Kar Man Soch। Maas Divas Beeten Mohi Maarihi…
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सुन्दरकाण्ड-05…
चौपाई :- जुगुति बिभीषन सकल सुनाई। चलेउ पवनसुत बिदा कराई ।। करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह…
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सुन्दरकाण्ड-04…
दोहा:- रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ। नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरषि कपिराइ ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का अर्थ…
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सुन्दरकाण्ड-03…
चौपाई: – नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।। सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर…
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सुन्दरकाण्ड-02…
दोहा – 2 राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान। आसिष देई गई सो , हरिष चलेऊ हनुमान ।।…
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