Dharm

सुन्दरकाण्ड-08-3…

...हनुमान जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस...

दोहा :-

ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार ।

जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।।

वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि, अंत मे उसने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तब हनुमान् जी ने मन मे विचार किया कि यदि ब्रह्मास्त्र को नही मानता हूँ तो उसकी अपार महिमा मिट जाएगी.

चौपाई :-

ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहि मारा। परतिहुँ बार कटकु संघारा।।

तेहि देखा कपि मुरुछित भयऊ। नागपास बाँधेसि लै गयऊ ।।

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि,उसने हनुमान् जी को ब्रह्मबाण मारा, जिसके लगते ही वे वृक्ष से नीचे गिर पड़े , परंतु गिरते समय भी उन्होने बहुत सी सेना मार डाली. जब उसने देखा कि हनुमान् जी मूर्छित हो गए है, तब वह उनको नागपाश से बाँधकर ले गय़ा.

जासु नाम जपि सुनहु भवानी। भव बंधन काटहिं नर ग्यानी।।

तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बँधावा ।।

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि, शिवजी कहते हैं कि –हे भवानी सुनों, जिनका नाम जपकर ज्ञानी ( विवेकी ) मनुष्य संसार ( जन्म-मरण ) के बंधन को काट डालते है, उनका दूत कहीं बंधन मे आ सकता है ? किन्तु प्रभु के कार्य के लिए हनुमान् जी ने स्वयं अपने को बँधा लिया.

कपि बंधन सुनि निसिचर धाए। कौतुक लागि सभाँ सब आए।।

दसमुख सभा दीखि कपि जाई। कहि न जाइ कछु अति प्रभुताई ।।

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि, बंदर का बाँधा जाना सुनकर राक्षस दौड़े और कौतुक (उत्सुक्त्वाश) सभी रावण की सभा में आए. हनुमान् जी ने जाकर रावण की सभी देखी. उसकी अत्यंत प्रभुता (ऐश्र्वर्य) कुछ कही नही जाती.

कर जोरें सुर दिसिप बिनीता। भृकुटि बिलोकत सकल सभीता।।

देखि प्रताप न कपि मन संका। जिमि अहिगन महुँ गरुड़ असंका ।।

महाराजजी श्लोक का अर्थ बताते हुए कहते है कि, उन्होंने देखा कि-देवता और दिक्पाल हाथ जोड़े बड़ी नम्रता के साथ भयभीत हुए सब रावण की भौं को देख रहे है. उसका ऐसा प्रताप देखकर भी हनुमान् जी ने मन मे जरा भी डर नही हुआ. वे ऐसे निःशंख खड़े रहे , जैसे सर्पो के समूह मे गरूड़ निःशंख (निर्भय ) रहते है.

वालव्याससुमनजीमहाराज,

महात्मा भवन, श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

मो0 :- 8709142129.

========= ============ ============

… Ashok Vatika destruction by Hanuman Ji…

Doha:-

Brahm Astr Tehin Saandha Kapi Man Keenh Bichaar

Jaun Na Brahmasar Maanun Mahima Miti Apaar।।

Explaining the meaning of Valvyassumanji Maharaj sloka, he says that, in the end, he used Brahmastra, then Hanuman ji thought in his mind that if he does not obey Brahmastra, then his immense glory will be destroyed.

Chaupaee:-

Brahmabaan Kapi Kahun Tehi maaraparatihun baar Kataku sanghaara।।

Tehi Dekha Kapi Muruchhit BhayooNaagapaas Baandhesi Lai Gayoo ।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that, he hit Hanuman ji with the brahmbaan, as soon as it hit him, he fell down from the tree, but even while falling, he killed a large army. When he saw that Hanuman Ji had fainted, he tied him with a snake and took him away.

Jaasu Naam Japi Sunahu BhavaaneeBhav Bandhan Kaatahin Nar Gyaanee।।

Taasu Doot Ki bandh Taru AavaPrabhu Kaaraj Lagi Kapihin Bandhaava ।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says, Shivji says that – listen O Bhavani, by chanting whose name the wise (discreet) man cuts the bondage of the world (birth-death), can his messenger come in bondage somewhere? But Hanuman Ji tied himself up for the work of the Lord.

Kapi Bandhan Suni Nisichar DhaeKautuk Laagi Sabhaan Sab Aae।।

Dasamukh Sabha Deekhi Kapi JaeeKahi Na Jai Kachhu Ati Prabhutaee ।।

Describing the meaning of the verse, Maharaj ji says that, hearing the monkey being tied, the demons ran and all of them came to Ravana’s meeting with enthusiasm. Hanuman ji went and saw everything of Ravana. Nothing can be said about His greatness.

Kar Joren sur Disip BineetaBhrkuti Bilokat Sakal Sabheeta।।

Dekhi Prataap Na Kapi Man SankaJimi Ahigan Mahun Garud Asanka ।।

Describing the meaning of the verse, Maharajji says that he saw that the Gods and Dikpal were all looking at Ravana’s eyebrows in fear with folded hands with great humility. Even after seeing such glory of him, Hanuman Ji did not feel any fear in his mind. He stood fearless like Garuda remains fearless in a group of snakes.

Walvayasumanji Maharaj,

Mahatma Bhavan, Shri Ramjanaki Temple,

Ram Kot, Ayodhya.

Mob: – 8709142129.

:

Related Articles

Check Also
Close
Back to top button