Dharm
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सुन्दरकाण्ड-08-2.
दोहा :- कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि। कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि।। महाराजजी श्लोक…
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सुन्दरकाण्ड-08-1…
दोहा :- देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु। रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज…
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सुन्दरकाण्ड-07…
सोरठा :- कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारी तब। जनु असोक अंगार दीन्हि हरषि उठि कर गहेउ ।। वाल्व्याससुमनजी…
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Sundarkand-06…
… Mother Sita-Trijata Dialogue… Doha :- Jahan Tahan Gaeen Sakal Tab Seeta Kar Man Soch। Maas Divas Beeten Mohi Maarihi…
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सुन्दरकाण्ड-05…
चौपाई :- जुगुति बिभीषन सकल सुनाई। चलेउ पवनसुत बिदा कराई ।। करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह…
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सुन्दरकाण्ड-04…
दोहा:- रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ। नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरषि कपिराइ ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का अर्थ…
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सुन्दरकाण्ड-03…
चौपाई: – नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।। सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर…
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सुन्दरकाण्ड-02…
दोहा – 2 राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान। आसिष देई गई सो , हरिष चलेऊ हनुमान ।।…
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सुन्दरकाण्ड-01…
दोहा – 1 हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ।। महाराजजी श्लोक…
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खास सपने लाते हैं…
दिवस के प्रथम पहर का स्वप्न तथा मध्यान काल के स्वप्न इच्छाशक्ति मनोबल आत्मशक्ति का सोच स्वप्न द्वारा जैसा भी…
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