Dharm
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धर्म का मर्म-01…
वर्तमान समय में हर आमलोग धर्म की बात करते हैं. आखिर धर्म है क्या…? कहा जाता है “धर्म रक्षिते: धर्म:”…
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सुन्दरकाण्ड-09-2…
दोहा :- मोहमूल बहु सूल प्रद त्यागहु तम अभिमान। भजहु राम रघुनायक कृपा सिंधु भगवान।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का अर्थ बताते…
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सुन्दरकाण्ड-09-1…
दोहा :- जाके बल लवलेस तें जितेहु चराचर झारि। तासु दूत मैं जा करि हरि आनेहु प्रिय नारि ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज…
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सुन्दरकाण्ड-09…
दोहा :- कपिहि बिलोकि दसानन बिहसा कहि दुर्बाद। सुत बध सुरति कीन्हि पुनि उपजा हृदयँ बिषाद ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक का…
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14 जून को योगनी एकादशी का व्रत…
सत्संग की समाप्ति के बाद भक्तों ने महाराजजी से पूछा कि, महाराजजी अषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी…
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सुन्दरकाण्ड-08-3…
दोहा :- ब्रह्म अस्त्र तेहिं साँधा कपि मन कीन्ह बिचार । जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज श्लोक…
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निर्जला या पांडव एकादशी…
“ऊँ नमो भगवते वासुदेवायः” सत्संग की समाप्ति के बाद कुछ भक्तों ने महाराजजी से पूछा कि,महाराज जी ज्येष्ठ महीने के…
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सुन्दरकाण्ड-08-2.
दोहा :- कछु मारेसि कछु मर्देसि कछु मिलएसि धरि धूरि। कछु पुनि जाइ पुकारे प्रभु मर्कट बल भूरि।। महाराजजी श्लोक…
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सुन्दरकाण्ड-08-1…
दोहा :- देखि बुद्धि बल निपुन कपि कहेउ जानकीं जाहु। रघुपति चरन हृदयँ धरि तात मधुर फल खाहु ।। वाल्व्याससुमनजीमहाराज…
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सुन्दरकाण्ड-07…
सोरठा :- कपि करि हृदयँ बिचार दीन्हि मुद्रिका डारी तब। जनु असोक अंगार दीन्हि हरषि उठि कर गहेउ ।। वाल्व्याससुमनजी…
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