अपरा एकादशी… - Gyan Sagar Times
Dhram Sansar

अपरा एकादशी…

भक्तों ने महाराजजी से पूछा कि, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी होती है उसके व्रत की महिमा और व्रत करने की विधि बताएं. महाराजजी सूना है कि इस व्रत को करने से अपार धन व यश की प्राप्ति होती है.

वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है ज्येष्ठ का पावन और पवित्र महीना चल रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार तीसरे महीने को ज्येष्ठ का महीना कहते है. ज्येष्ठ नक्षत्र होने के कारण इस महीने को ज्येष्ठ या जेठ का महीना कहते हैं. इस पवित्र और पावन महीने का वर्णन पुरानों में मिलता है. पुराणों के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को माता भद्रकाली प्रकट हुई थी. कहा जाता है कि, हनुमान और प्रभु श्रीराम की मुलाक़ात भी इसी ज्येष्ठ के महीने में हुई थी. शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की आमवस्या को भगवान शनि देव जी का जन्म हुआ था.

वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है इतना पावन और पवित्र महीने में जब माता ही प्रकट हुई थी उस दिन के एकादशी की महिमा अनोखी है. महाराज जी कहते है कि, जो मनुष्य अपने वर्तमान और भूतकाल के पापों से डरता हो उसे ही इस एकादशी का व्रत करना चाहिए. यह एकादशी मानव को ब्रहम हत्या के पापों से मुक्त कर मोक्ष की प्राप्ति कराता है. वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अचला, अपरा, भद्रकाली और जलक्रीडा एकादशी के नाम से जानते हैं. इस वर्ष 26 मई 2022 दिन गुरुवार को अचला एकादशी है.

     आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु।

बुद्धिं तु सारथि विद्धि येन श्रेयोऽहमाप्यनुयाम।।

वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है आत्मा को रथी जानो, शरीर को रथ और बुद्धि को सारथी मानो और इनके संतुलित व्यवहार से ही श्रेय अर्थात श्रेष्ठत्व की प्राप्ति होती है. महाराज जी कहते है कि, माघ के महीने में जब सूर्य के मकर राशि में होने पर प्रयाग स्नान, शिवरात्रि पर काशी में रहकर किया गया व्रत, गया में पिंडदान, वृषभ राशि में गोदावरी स्नान, बद्रिकाश्रम में भगवान केदार के दर्शन या सूर्यग्रहण पर कुरुक्षेत्र में स्नान और दान करने से जो फल मिलता है, वही फल अपरा-अचला एकादशी के व्रत से प्राप्त होता है. इस दिन उपवास कर भगवान के वामन अवतार की पूजा करने से मनुष्य को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और विशेष कृपा भी प्राप्त होती है.

 पूजन सामाग्री :-

वेदी, कलश, सप्तधान, पंच पल्लव, रोली, गोपी चन्दन, गंगा जल, दूध, दही, गाय के घी का दीपक, सुपाड़ी, शहद, पंचामृत, मोगरे की अगरबत्ती, ऋतू फल, फुल, आंवला, अनार, लौंग, नारियल, नीबूं, नवैध, केला और तुलसी पत्र व मंजरी.

व्रत विधि:-

सबसे पहले आपको एकादशी के दिन सुबह उठ कर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है. उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा के लिए धूप, दीप, नारियल और पुष्प का प्रयोग करना चाहिए. अंत में भगवान विष्णु के स्वरूप का स्मरण करते हुए ध्यान लगायें, उसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करके, कथा पढ़ते हुए  विधिपूर्वक पूजन करें.

कथा:-

प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे. राजा के छोटे भाई वज्रध्वज अपने  बड़े भाई से द्वेष (इर्ष्या) रखता था. एक दिन अवसर पाकर वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई महीध्वज की हत्या कर जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया. अकाल मृत्यु होने के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर पीपल पर रहने लगी और रास्ते से गुजरने वाले हर व्यक्ति को आत्मा परेशान करती थी. एक दिन की बात है कि, एक ऋषि इस रास्ते से गुजर रहे थे और उन्होंने इस प्रेत को देखा और अपने तपोबल से उसके प्रेत बनने का कारण भी जान लिया.

ऋषि ने पीपल के पेड़ से राजा की प्रेतात्मा को नीचे उतारा और परलोक विद्या का उपदेश दिया. ऋषि ने  राजा को प्रेत योनी से मुक्ति दिलाने के लिए स्वयं ही अपरा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी के दिन व्रत पूरा होने पर व्रत का पुण्य प्रेत को दे दिया. एकादशी के व्रत का पुण्य प्राप्त करके राजा प्रेतयोनी से मुक्त हो गया और दिव्य देह धारण कर स्वर्ग को चला गया.

फल:-

एकादशी प्राणियों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है. यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है. इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है.

विशेष :- भगवान विष्णु को उजला फुल से पूजा करने पर विशेष फल मिलता है. 

ध्यान दें :- एकादशी की रात्री को जागरण अवश्य ही करना चाहिए, दुसरे दिन द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणो को अन्न दान व दक्षिणा देकर इस व्रत को संपन्न करना चाहिए.

 

वालव्याससुमनजीमहाराज,

महात्मा भवन, श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

मो० :- 8709142129.

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