व्यक्ति विशेष -872.
कवि धीरेन्द्र वर्मा
धीरेन्द्र वर्मा एक हिंदी कवि, आलोचक और शिक्षाविद् थे. उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी रचनाओं के माध्यम से विशेष स्थान बनाया. उनका जन्म 17 मई, 1897 को बरेली (उत्तर प्रदेश) के भूड़ मोहल्ले में हुआ था, और उनका निधन 23 अप्रैल, 1973 को हुआ.
धीरेन्द्र वर्मा ने अपने साहित्यिक कैरियर में कई महत्वपूर्ण कृतियाँ लिखीं. उनके कार्यों में गहराई और विचारशीलता की विशेषता देखी जा सकती है, और उन्होंने हिंदी आलोचना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. धीरेन्द्र वर्मा की कुछ प्रमुख कृतियाँ हैं जिनमें उन्होंने साहित्यिक आलोचना और विश्लेषण का प्रयोग किया है.
उनके कार्यों में उनकी गहरी बुद्धिमत्ता और समझ का पता चलता है, और उनके द्वारा छोड़ी गई साहित्यिक विरासत आज भी हिंदी साहित्य के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है.
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क्रिकेटर बीएस चंद्रशेखर
भगवत सुब्रमण्यम चंद्रशेखर भारतीय क्रिकेट के महान लेग-स्पिन और गुगली गेंदबाजों में से एक हैं. उनका जन्म 17 मई 1945 को मैसूर में हुआ था. चंद्रशेखर ने वर्ष 1960 – 70 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अपनी असाधारण गेंदबाजी से कई मैचों में भारत को जीत दिलाई.
चंद्रशेखर ने अपने कैरियर में 58 टेस्ट मैचों में भाग लिया और 242 विकेट लिए. उनका बेस्ट बॉलिंग प्रदर्शन 8/79 रहा, जो उन्होंने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दिया था. उनकी गेंदबाजी शैली अनूठी थी; उनके पास बड़ी तेजी और अप्रत्याशित गति थी, जिससे बल्लेबाज अक्सर चकित रह जाते थे.
चंद्रशेखर के कैरियर की विशेषताओं में उनका पोलियो से प्रभावित हुआ दाहिना हाथ भी शामिल है, जिसके बावजूद उन्होंने अपनी गेंदबाजी कौशल को निखारा और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त की. चंद्रशेखर की गेंदबाजी में उनकी अनिश्चितता और गेंद की फिरकी ने उन्हें दुनिया के शीर्ष गेंदबाजों में से एक बना दिया. उन्हें वर्ष 1970 के दशक में भारतीय क्रिकेट की स्वर्णिम तिकड़ी का हिस्सा माना जाता है, जिसमें बिशन सिंह बेदी और एरापल्ली प्रसन्ना भी शामिल थे.
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गजल गायक पंकज उधास
पंकज उधास एक गजल गायक हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायन से गजल संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. उनकी गजलों में एक विशेष शैली और गहराई होती है, जिसने उन्हें विश्वव्यापी प्रसिद्धि दिलाई है.
पंकज उधास एक गजल गायक हैं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायन से गजल संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. उनका जन्म 17 मई 1951 को राजकोट (गुजरात) के पास चारखड़ी-जेतपुर के ज़मींदार चारण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम केशूभाई उधास और माँ का नाम जीतूबेन उधास है. वे तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं. उनके सबसे बड़े भाई मनहर उधास ने बॉलीवुड में हिंदी पार्श्व गायक के रूप में सफलता प्राप्त की थी। उनके दूसरे बड़े भाई निर्मल उधास भी एक प्रसिद्ध गज़ल गायक हैं.
पंकज उधास का विवाह 11 फरवरी 1982 को फरीदा उधास (एक पारंपरिक पारसी परिवार से थीं) के साथ हुआ था. उनकी दो बेटियां हैं नायाब उधास और रेवा उधास.
पंकज ने अपने पार्श्व गायक कैरियर की शुरुआत फिल्म कामना से की थी जो बुरी तरह से असफल रही थी. उसके बाद पंकज गजल गायकी की और रुख किया और पहला एल्बम वर्ष 1980 के दशक में हुई और उन्होंने “चिट्ठी आई है” जैसी गजलों के साथ बड़ी प्रसिद्धि हासिल की. उनकी अन्य प्रसिद्ध गजलों में “और आहिस्ता कीजिये बातें”, “जीये तो जीये कैसे” शामिल हैं. पंकज उधास ने अपनी गजलों के माध्यम से न केवल पुरानी पीढ़ी बल्कि नई पीढ़ी के श्रोताओं को भी गजल संगीत की ओर आकर्षित किया है.
पंकज उधास का निधन 26 फरवरी 2024 को हुआ था. उनका संगीत न केवल भारत में, बल्कि विश्व भर में संगीत प्रेमियों के दिलों में गहराई से बसा है, और वे अपने लंबे कैरियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं.
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अभिनेत्री प्रीति गांगुली
प्रीति गांगुली एक भारतीय अभिनेत्री थीं, जिन्होंने मुख्य रूप से हिंदी फिल्म उद्योग में काम किया. उनका जन्म 17 मई 1953 को हुआ था, और वे प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार की बेटी थीं.
प्रीति गांगुली ने वर्ष 1970 – 80 के दशक में अपनी कॉमिक भूमिकाओं के लिए पहचानी गईं. उन्होंने कई फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं थीं. उनकी अभिनय कौशल और हास्य टाइमिंग की सराहना भी की गई. गांगुली की एक प्रसिद्ध फिल्म “खट्टा मीठा” है, जिसमें उन्होंने मीनू की भूमिका निभाई और इस भूमिका के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली. इसके अलावा, उन्होंने “दीवार”, “बलिका बधु”, और “धामाका” जैसी कई अन्य फिल्मों में भी काम किया.
प्रीति गांगुली का निधन 2 दिसंबर 2012 को हुआ था. उनके निधन के समय उन्हें हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए याद किया गया, और उनकी कॉमेडी भूमिकाओं को विशेष रूप से सराहा गया.
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अभिनेत्री चार्मी कौर
चार्मी कौर एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा में काम किया है, साथ ही उन्होंने हिंदी, तमिल, मलयालम, और कन्नड़ फिल्मों में भी अभिनय किया है. चार्मी का जन्म 17 मई 1987 को हुआ था. उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत बहुत ही कम उम्र में की थी.
चार्मी की प्रमुख फिल्मों में “मस” (2004), “अनुकोकुंडा ओका रोजू” (2005), और “मंत्रा” (2007) शामिल हैं. इन फिल्मों में उनके प्रदर्शन को काफी सराहा गया और उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली. विशेष रूप से “मंत्रा” में उनके अभिनय की बहुत प्रशंसा हुई, जिसमें उन्होंने एक डरावनी थ्रिलर फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई.
चार्मी ने अपने कैरियर में कई पुरस्कार भी जीते हैं और उनकी फिल्में व्यावसायिक रूप से सफल रही हैं. फिल्म उद्योग में उनकी योग्यता और योगदान को उच्च मान्यता प्राप्त है. उन्होंने न केवल अभिनय के क्षेत्र में, बल्कि निर्माण में भी अपने कदम रखे हैं, जिससे उनकी व्यापक प्रतिभा का पता चलता है.
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होटल उद्योगपति सी. पी. कृष्णन नायर
सी. पी. कृष्णन नायर एक प्रमुख भारतीय उद्योगपति थे, जिन्होंने होटल उद्योग में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाई. उन्होंने लीला ग्रुप ऑफ होटल्स की स्थापना की, जो भारत के सबसे लक्जरी होटल चेन्स में से एक है.
सी. पी. कृष्णन नायर का जन्म 9 फ़रवरी 1922 को केरल में हुआ था, उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में की थी. व्यापार में उनका प्रवेश टेक्सटाइल उद्योग से हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने होटल उद्योग में प्रवेश किया. वर्ष 1986 में उन्होंने मुंबई में पहला लीला होटल खोला, जिसे लीला पैलेस नाम दिया गया. इसके बाद, उन्होंने देश के कई प्रमुख शहरों में लक्जरी होटल्स की एक श्रृंखला स्थापित की.
उनकी दूरदृष्टि और उद्यमशीलता ने लीला होटल्स को वैश्विक मानकों का होटल ब्रांड बनाया, जिसे उच्च स्तरीय सेवाओं और अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए जाना जाता है. सी. पी. कृष्णन नायर का निधन 17 मई 2014 को हुआ. उनकी विरासत और उनके द्वारा स्थापित मानदंड आज भी भारतीय होटल उद्योग में एक मिसाल के तौर पर देखे जाते हैं.
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फिल्म निर्माता और निर्देशक प्रकाश मेहरा
प्रकाश मेहरा एक भारतीय फिल्म निर्माता और निर्देशक थे, जिन्हें बॉलीवुड में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है. उन्होंने मुख्य रूप से वर्ष1970 – 80 के दशक में अपने काम के लिए प्रसिद्धि प्राप्त की.
प्रकाश मेहरा का जन्म 13 जुलाई 1939 को बिजनौर, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था. उनका फिल्म निर्माण और निर्देशन के प्रति रुझान उन्हें मुंबई (तत्कालीन बंबई) ले आया, प्रकाश मेहरा ने अपने कैरियर की शुरुआत वर्ष 1968 में फिल्म “हसीना मान जाएगी” से की, लेकिन उन्हें वास्तविक पहचान 1973 में फिल्म “जंजीर” से मिली. इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को एक सुपरस्टार बना दिया और ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में उनकी छवि स्थापित की.
प्रमुख फिल्में: –
जंजीर (1973): – अमिताभ बच्चन और जया भादुरी अभिनीत, यह फिल्म एक बहुत बड़ी हिट थी और इसने बॉलीवुड में एक नए युग की शुरुआत की.
खून पसीना (1977): – अमिताभ बच्चन और रेखा अभिनीत, यह फिल्म भी एक बड़ी सफलता साबित हुई.
लावारिस (1981): – अमिताभ बच्चन और जीनत अमान अभिनीत, इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की और इसके गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए.
नमक हलाल (1982): – अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, स्मिता पाटिल, और परवीन बाबी अभिनीत, यह फिल्म एक कॉमेडी ड्रामा थी और बहुत बड़ी हिट साबित हुई.
शराबी (1984): – अमिताभ बच्चन और जया प्रदा अभिनीत, इस फिल्म ने भी बहुत सफलता प्राप्त की और इसके गाने आज भी लोकप्रिय हैं.
प्रकाश मेहरा को उनके उत्कृष्ट निर्देशन और फिल्म निर्माण के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए. उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से भारतीय सिनेमा में एक नया मापदंड स्थापित किया. प्रकाश मेहरा का निधन 17 मई 2009 को हुआ था. उनके निधन से बॉलीवुड ने एक महान निर्देशक और निर्माता को खो दिया. मेहरा की फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता प्राप्त की, बल्कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.
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अभिनेत्री दुर्गाबाई कामत
दुर्गाबाई कामत भारतीय सिनेमा की पहली महिला अभिनेत्री थीं, जिन्होंने वर्ष 1900 के दशक की शुरुआत में, जब महिलाओं का थिएटर या फिल्मों में अभिनय करना समाज में निषेध था, उस वक्त उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा. दादा साहेब फाल्के की फिल्म ‘मोहिनी भस्मासुर’ (1913) में उन्होंने देवी पार्वती का किरदार निभाकर भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री का खिताब हासिल किया. उनकी बेटी, कमलाबाई गोखले भी इसी फिल्म में मोहिनी की भूमिका में थीं और वे भारतीय सिनेमा की पहली बाल कलाकार बनीं.
दुर्गाबाई कामत का जन्म वर्ष 1879 को मुंबई में हुआ था. उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा. दुर्गाबाई कामत की शादी आनंद नानोस्कर से हुई थी, लेकिन यह विवाह ज्यादा दिनों तक नहीं चला और उन्होंने अपनी बेटी कमलाबाई के साथ अकेले जीवन-यापन का निर्णय लिया. उस समय महिलाओं के लिए नौकरी पाना कठिन था, खासकर जब वे अकेली माँ हों. ऐसे कठिन समय में, दुर्गाबाई ने फिल्म उद्योग में काम करने का निर्णय लिया और समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अभिनय के क्षेत्र में एक नई दिशा स्थापित की.
दुर्गाबाई कामत ने अपने समय में सिनेमा और समाज की परंपरागत भूमिकाओं को चुनौती दी और महिला अभिनेत्रियों के लिए नई राहें खोलीं. उनका योगदान और साहस आज भी कई महिला कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. दुर्गाबाई कामत का निधन 17 मई 1997 को पुणे में हुआ था.



