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14 जून को योगनी एकादशी का व्रत…

सत्संग की समाप्ति के बाद भक्तों ने महाराजजी से पूछा कि, महाराजजी अषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी होती है, उस एकादशी व्रत की महिमा व विधि के बारे में बताएं. महाराजजी सूना है कि, इस एकादशी का व्रत करने से मनोकामना की पूर्ति व 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन करने के बराबर फल भी मिलता है.

वालव्याससुमनजी महाराज कहते है कि, अषाढ़ का महीना हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष(साल) का चौथा महिना होता है और ईस्वी कैलेंडर के अनुसार जून या जुलाई का महीना होता है. इसे वर्षा ऋतू का महीना भी कहा जाता है चुकिं इस महीने में भारत देश में काफी वर्षा भी होती है. वालव्याससुमनजी महाराज कहते है कि, आषाढ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन को ही योगिनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. पद्म पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत करने से साधक के सभी पापों का नाश होता है और मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त करता है.

वालव्याससुमनजी महाराज कहते है कि, सम्पूर्ण ब्रह्मांड में प्रसिद्ध है ये एकादशी, इस व्रत को करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, तथा मुक्ति प्राप्त होती है. योगिनी एकादशी व्रत करने से पहले की रात्रि में ही व्रत एक नियम शुरु हो जाते हैं. यह व्रत दशमी तिथि कि रात्रि से शुरु होकर द्वादशी तिथि के प्रात:काल में दान कार्यो के बाद व्रत समाप्त होता है. महाराजजी कहते है कि वर्ष 2023 में योगनी एकादशी का व्रत बुधवार 14 जुन को मनाया जायेगा.

पूजन सामाग्री :-

वेदी, कलश, सप्तधान, पंच पल्लव, रोली, गोपी चन्दन, गंगा जल, दूध, दही, गाय के घी का दीपक, सुपाड़ी, शहद, पंचामृत, मोगरे की अगरबत्ती, ऋतू फल, फुल, आंवला, अनार, लौंग, नारियल, नीबूं, नवैध, केला और तुलसी पत्र व मंजरी.

 व्रत विधि:-

सबसे पहले आपको एकादशी के दिन सुबह उठ कर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है. उसके बाद भगवान विष्णु की पूजा के लिए धूप, दीप, नारियल और पुष्प का प्रयोग करना चाहिए. अंत में भगवान विष्णु के स्वरूप का स्मरण करते हुए ध्यान लगायें, उसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करके, कथा पढ़ते हुए  विधिपूर्वक पूजन करें.

ध्यान दें…. एकादशी की रात्री को जागरण अवश्य ही करना चाहिए, दुसरे दिन द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणो को अन्न दान व दक्षिणा देकर इस व्रत को संपन्न करना चाहिए.

विशेष:-

14 जुन 2023 को एकादशी का व्रत है इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा व दीपक जरुर जलाए, साथ ही भगवान भोलेनाथ को गंगाजल से अभिषेक भी करनी चाहिए. एकादशी के दिन संध्या (शाम) के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक लगाकर तुलसी के पौधे को प्रणाम करना चाहिए. भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी को मिश्री का भोग लगायें व पारण के समय मिश्री जरुर ग्रहण करें.

कथा:-

प्राचीन काल में अलकापुरी नाम की नगरी में कुबेर नाम का राजा राज्य करता था. वह भगवान शिव का अनन्य भक्त था और वह भगवान शिव पर हमेशा ताजे फूल अर्पित किया करता था. उसके माली का नाम हेम था जो उसके लिए फूल लाया करता था, उसकी पत्नी   विशालाक्षी के साथ सुख पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था. एक दिन हेम माली पूजा कार्य में न लग कर, अपनी स्त्री के साथ रमण करने लगा. उधर राजा कुबेर को उसकी राह देखते -देखते दोपहर हो गई, तो उसने क्रोधपूर्वक अपने सेवकों को हेम माली का पता लगाने की आज्ञा दी. सेवकों ने उसका पता लगा कर वह कुबेर के पास जाकर कहने लगे, हे राजन, वह माली अभी तक अपनी स्त्री के साथ रमण कर रहा है. सेवकों की बात सुनकर कुबेर ने हेम माली को बुलाने की आज्ञा दी. जब हेम माली राजा कुबेर के सम्मुख पहुंचा तो कुबेर ने उसे श्राप दिया कि, तू स्त्री का वियोग भोगेगा मृत्यु लोक में जाकर कोढी हो जायेगा, उसी समय वह कुबेर के श्राप से स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आ गिरा और कोढी हो गया. स्त्री से बिछुड कर मृ्त्युलोक में आकर उसने काफी दु;ख भोगे.

परन्तु, शिव जी की भक्ति के प्रभाव से उनकी बुद्धि मलीन न हुई, और पिछले जन्म के कर्मों का स्मरण करते हुए, वह हिमालय पर्वत की तरफ चल दिया. वहां पर चलते -चलते उसे एक ऋषि मिले, हेम माली ने उन्हें प्रणाम किया और विनय पूर्वक उनसे प्रार्थना की हेम माली की व्यथा सुनकर ऋषि ने कहा की मैं तुम्हारे उद्धार में तुम्हारी सहायता करूंगा. तुम आषाढ मास के कृ्ष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधि-पूर्वक व्रत करो, इस व्रत को करने से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे. मुनि के वचनों के अनुसार हेम माली ने योगिनी एकादशी का व्रत किया और व्रत के प्रभाव से वह फिर से अपने पुराने रुप में वापस आ गया और अपनी स्त्री के साथ प्रसन्न पूर्वक रहने लगा.

योगिनी एकादशी का महत्व :-

योगिनी एकादशी के व्रत के प्रभाव से हर तरह के चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है. इस व्रत को करने से 88 हजार ब्राहणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है. किसी भी तरह की कामना की पूर्ति के लिए भी ये व्रत रखा जा सकता है. इस व्रत के प्रभाव से समस्त पाप दूर होते है और अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है.

एकादशी का फल:-

एकादशी प्राणियों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है. यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है. इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है.

वाल्वयासुमनजी महाराज,

महात्मा भवन, श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

मो0 :- 8709142129.

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Yogini Ekadashi fast on 14th June…

After the end of the Satsang, the devotees asked Maharajji that, Maharajji, tell them about the glory and method of Ekadashi fast which is held on the Krishna Paksha of Ashadh month. Maharajji has heard that fasting on this Ekadashi fulfills one’s wishes and also gives fruits equivalent to feeding 88 thousand Brahmins.

Walvyassumanji Maharaj says that the month of Ashadha is the fourth month of the year according to the Hindu calendar and according to the Christian calendar, it is the month of June or July. It is also called the month of the rainy season because in this month there is a lot of rain in the country of India. Valvyassumanji Maharaj says that the day of Ekadashi of Krishna Paksha of Ashadh month is called Yogini Ekadashi. There is a special importance in worshiping the Peepal tree on this Ekadashi. According to Padma Purana, observing Yogini Ekadashi fast destroys all the sins of the seeker and attains salvation after death.

Walvyassumanji Maharaj says that this Ekadashi is famous all over the universe, by observing this fast all sins are destroyed and liberation is attained. As a rule, the fast starts on the night before Yogini Ekadashi fast. This fast starts on the night of Dashami Tithi and ends on the morning of Dwadashi Tithi after performing charity work. Maharajji says that in the year 2023, the fast of Yogni Ekadashi will be observed on Wednesday, 14th June.

Worship material: –

Vedi, Kalash, Saptadhan, Panch Pallav, Roli, Gopi Chandan, Ganges water, milk, curd, a lamp of cow’s ghee, betel nut, honey, panchamrit, incense sticks of mogra, seasonal fruits, flowers, amla, pomegranate, cloves, coconut, Lemon, illegal, banana and basil leaves and Manjari.

Fasting method: –

First of all, on the day of Ekadashi, you should wake up early in the morning and take a bath and take a vow of fasting. After that, the idol or picture of Lord Vishnu is established. After that incense, lamps, coconut, and flowers should be used to worship Lord Vishnu. In the end, meditate remembering the form of Lord Vishnu, and after that recite Vishnu Sahastranam and worship it methodically while reciting the story.

Pay attention… Jagran must be done on the night of Ekadashi, on the second day of Dwadashi, this fast should be completed by donating food and Dakshina to Brahmins.

Specific:-

Ekadashi fast is on June 14, 2023. Peepal tree must be worshiped and lamps must be lit on this day, as well as anointing Lord Bholenath with Ganges water. On the day of Ekadashi, in the evening (evening), the Tulsi plant should be worshiped by lighting a lamp of cow’s ghee in front of the Tulsi plant. Offer sugar candy to Lord Vishnu and Mother Lakshmi and take sugar candy at the time of Paran.

Story:-

In ancient times, a king named Kuber used to rule in the city named Alkapuri. He was an ardent devotee of Lord Shiva and always used to offer fresh flowers to Lord Shiva. His gardener’s name was Hem who used to bring flowers for him, and was living happily with his wife Vishalakshi. One day Hem Mali started enjoying with his wife instead of doing worship work. On the other hand, it was afternoon when King Kuber was looking for his way, so he angrily ordered his servants to find Hem Mali. After the servants traced him, he went to Kuber and said, O king, that gardener is still having fun with his wife. After listening to the servants, Kuber ordered Hem Mali to be called. When Hem Mali reached in front of King Kuber, Kuber cursed him that he would suffer the separation of his wife and become a leper by going to the land of death. Coming to the land of death after being separated from his wife, he suffered a lot.

But, due to the influence of devotion to Lord Shiva, his intelligence did not get dirty, and remembering the deeds of his previous birth, he went towards the Himalayan mountain. While walking there, he met a sage, Hem Mali bowed down to him and humbly prayed to him. Hearing the grief of Hem Mali, the sage said I will help you in your salvation. You should fast on the Ekadashi named Yogini of the Krishna side of the month of Ashadh, by observing this fast all your sins will be destroyed. According to the sage’s words, Hem Mali observed a fast on Yogini Ekadashi and with the effect of the fast, he returned to his old form and lived happily with his wife.

Importance of Yogini Ekadashi: –

With the effect of fasting on Yogini Ekadashi, one gets relief from all kinds of skin diseases. By observing this fast, one gets the fruit equal to feeding 88 thousand Brahmins. This fast can also be observed for the fulfillment of any kind of wish. With the effect of this fast all the sins are removed and in the end one attains heaven.

Results of Ekadashi: –

Ekadashi helps in achieving the ultimate goal of living beings, devotion to God. This day is considered very auspicious and fruitful to serve the Lord with full devotion. On this day, if a person frees himself from desires and does devotional service to God with a pure heart, then he definitely becomes blessed by God.

Walvayasumanji Maharaj,

Mahatma Bhavan, Shri Ramjanaki Temple,

Ram Kot, Ayodhya.

Mo 0:- 8709142129.

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