रिंकू टैक्सी के बाहर बेचैनी से टहल रहा था. पत्रकार का ऑफिस एक पुरानी इमारत में था, जिसकी दीवारों पर बरसों पुरानी धूल जमी हुई थी. अंदर क्या हो रहा होगा, यह सोचकर उसका दिल धड़क रहा था. क्या पत्रकार शेखर की बात पर यकीन करेगा? क्या वह उसकी मदद करने को तैयार होगा?
लगभग एक घंटे बाद, ऑफिस का दरवाजा खुला और शेखर बाहर निकला. उसके चेहरे पर पहले से कहीं ज़्यादा उम्मीद और राहत के भाव थे. उसके पीछे पत्रकार, शंकर, भी बाहर आए. शंकर एक तेज़ तर्रार और अनुभवी पत्रकार थे, जिनकी पहचान बेबाक रिपोर्टिंग के लिए थी.
“रिंकू, धन्यवाद,” शेखर ने कहा, उसकी आवाज़ में कृतज्ञता थी. “शंकर जी मेरी मदद करने को तैयार हैं.”
शंकर ने रिंकू की ओर देखकर मुस्कुराया. “आपने एक नेक काम किया है रिंकू जी. शेखर की कहानी सुनकर लगता है कि यह एक बड़ा घोटाला है और इसे सामने आना चाहिए.”
रिंकू को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा. उसे लग रहा था कि उसकी कोशिश रंग लाई है.
“शेखर ने मुझे सारे सबूत दे दिए हैं,” शंकर ने कहा. “मैं जल्द ही इस पर काम शुरू करूंगा. लेकिन अभी शेखर की सुरक्षा ज़रूरी है.”
“हाँ, वही मेरी भी चिंता है,” रिंकू ने कहा. “वे लोग उसे ढूंढ रहे हैं.”
“हम उसे कहीं सुरक्षित जगह पर छिपा देंगे,” शंकर ने कहा. “और जब तक यह मामला शांत नहीं होता, वह वहीं रहेगा.”
रिंकू और शंकर ने मिलकर शेखर के लिए एक सुरक्षित ठिकाना तय किया – शहर से दूर, शंकर के एक पुराने दोस्त का फार्महाउस. रिंकू ने अपनी टैक्सी में शेखर को उस फार्महाउस तक पहुँचाया.
फार्महाउस एक शांत और सुनसान जगह पर था. चारों तरफ़ खेत और पेड़ थे. यहाँ शेखर कुछ दिनों के लिए सुरक्षित रह सकता था.
“धन्यवाद रिंकू,” शेखर ने फार्महाउस पर उतरते हुए कहा. “तुमने मेरी जान बचाई.”
“कोई बात नहीं शेखर भाई. बस अपना ध्यान रखना और शंकर जी पर भरोसा रखना.”
रिंकू का मन अब थोड़ा शांत था. उसने एक मुसीबत में फंसे हुए इंसान की मदद की थी और उसे उम्मीद थी कि अब सब ठीक हो जाएगा.
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था. अगले दिन, जब रिंकू अपने घर पर आराम कर रहा था, उसे विकास का फ़ोन आया. विकास की आवाज़ में घबराहट थी.
“रिंकू, बुरी खबर है. शहर में तुम्हारे टैक्सी नंबर की चर्चा हो रही है.”
“क्या? क्यों?” रिंकू हैरान था.
“पता चला है कि कुछ गुंडे तुम्हारी टैक्सी के बारे में पूछताछ कर रहे हैं. उन्होंने जंक्शन के आसपास के लोगों से तुम्हारे बारे में पता किया है.”
रिंकू का दिल डूब गया. इसका मतलब था कि उन लोगों को पता चल गया था कि शेखर को उसने लिफ्ट दी थी. अब वे उसके पीछे भी पड़ सकते थे.
“तुम्हें तुरंत छिप जाना चाहिए रिंकू,” विकास ने कहा. “यह शहर अब तुम्हारे लिए सुरक्षित नहीं है.”
रिंकू समझ गया कि विकास सही कह रहा है. उसने अनजाने में खुद को भी खतरे में डाल लिया था.
उसने जल्दी से अपनी माँ को सारी बात बताई. शांति देवी डर गईं, लेकिन उन्होंने रिंकू को हिम्मत दी और उसे तुरंत शहर छोड़ने के लिए कहा.
रिंकू ने कुछ ज़रूरी सामान पैक किया और रात के अंधेरे में शहर से निकल गया. वह कहाँ जा रहा था, उसे भी नहीं पता था. बस उसे इस शहर से दूर जाना था, उन खतरनाक लोगों से दूर.
उसकी टैक्सी रात की सुनसान सड़कों पर दौड़ रही थी, और रिंकू के मन में एक ही सवाल घूम रहा था – क्या वह और शेखर कभी इन परेशानियों से मुक्त हो पाएंगे? और क्या सच्चाई कभी सामने आ पाएगी?
शेष भाग अगले अंक में…,



