Health

कहवा/कॉफ़ी…

आधुनिक जीवन शैली में एक अहम् हिस्सा बना गया है चाय व कॉफ़ी. सुबह की नींद खुलने के साथ ही हम सभी चाय व काफी की चुस्की लेते है और दिन चढने से लेकर शाम व रात में सोने से पहले तक कॉफ़ी की चुस्की लेते है.

काफी की स्वाद जितनी अच्छी होती है उससे कहीं ज्यादा स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है. काफी में कैफीन पाया जाता है जो शरीर में होने वाली थकान व आलस को दूर करने में एंटीओक्सिडेंट की तरह काम करती है. यह शरीर के तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाता है साथ ही पाचन शक्ति को ठीक करता है. यह कैंसर को रोकने में मदद करता है.

बताते चलें कि, कॉफ़ी को अरबी में कहवा कहते हैं और इसका बैज्ञानिक नाम है ‘कॉफिया अरेबिका ‘. काफी का उत्पादन गर्म इलाकों में होता है. काफी का जन्म स्थान लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित यमन और इथियोपिया की पहाड़ियाँ हैं. माना जाता है कि, इथियोपिया के पठार में एक गड़ेरीए ने जंगली काफी के पौधे से बने पेय पदार्थ से सबसे पहले चुस्की ली थी. शुरुआत में इसकी खेती यमन में होती थी और यमन के लोगों ने ही अरबी में इसका नाम कहवा रखा था समय के साथ कहवा को कॉफ़ी कहते है. कहवा शब्द का अर्थ होता है ‘शराब’. यमन के सूफी संत भगवान को याद करते वक्त ध्यान लगाने के लिए इसका इस्तेमाल करते थे.

भारत में कॉफ़ी का पौधा 18वीं शताब्दी में ईस्ट इण्डिया कंपनी द्वारा लाया गया था और प्रयोग के तौर पर तैलिचेरी के निकट बोया गया था. बताते चलें कि, भारतीय काफी का स्वाद अच्छा होने के कारण विश्व के बाजारों में कीमत ज्यादा मिलती है. विश्व के उत्पादन का 4.05 प्रतिशत ही कहवा का उत्पादन होता है. कहवा की खेती के लिए दोमट मिटटी या ज्वालामुखी का लावा मिटटी उपयुक्त होता है. कहवा को छायादार वृक्षों के पास लगाया जाता है चूंकि, कहवा तेज धुप को नहीं सह सकता है.

कहवा को जनवरी से मार्च के बीच में मानसूनी वर्षा में उगाया जाता है. कॉफ़ी के पौधों पर सफ़ेद फूल खिलते हैं, जो 03-04 दिनों में परिपक्व को होकर बीज में बदल जाते हैं. जब कॉफी के बागानों में फूल खिले होते हैं, तब ये देखने में बहुत रमणीय और सुन्दर लगते हैं. तीन वर्ष के बाद फल मिलने लगते हैं. इसके फल को अक्टूबर और नवंबर में चुन लेते हैं और दो से तीन सप्ताह तक सुखाया जाता है.

ज्ञात है कि, भारत में कॉफी प्रसंस्करण दो विधियों से किया जाता है. पहला सूखा प्रसंस्करण और दूसरा गीला प्रसंस्करण. सूखे प्रसंस्करण में इसे पारंपरिक रूप से धूप में सुखाया जाता है जिसके कारण इसका फ्लवर बढ़िया होता है. जबकि, गीले प्रसंस्करण में, कॉफ़ी के बीन्स में किण्वन करके इन्हें धोया जाता है. गीले प्रसंस्करण में खराब बीजों को अलग करने के लिए सफाई की जाती है साथ ही भिन्न किस्मों और आकारों के बीन्स को मिलाया जाता है ताकि सर्वश्रेष्ठ फ्लेवर प्राप्त किया जा सके.

 जब भारत में कॉफी की खेती बाबा बुदान गिरी के आस पास और कर्नाटक में आस पास की पहाड़ियों में इसकी पहली खेती की गयी. धीरे-धीरे यह पुरे दक्षिन भारत में फ़ैल गया. सरकार ने 1942 में कॉफ़ी के निर्यात का फैसला लिया और  सरकार ने 1942 में कॉफ़ी VII अधिनियम को पारित करके छोटे और सीमांत किसानों को सरंक्षण प्रदान किया साथ ही भारतीय कॉफ़ी बोर्ड की स्थापना की गयी, जिसका संचालन वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा किया जाता है.

कॉफ़ी के फायदे व नुक्सान…

काफी में भरपूर मात्रा में एंटीओक्सिडेंट मिलता है इसके साथ इसमें में कैफीन, कॉफी का तेल और कैफेस्टोल के साथ-साथ रिफ्लेविन, पेन्टोथेनिक एसिड,  मैंगनीज, पोटेशियम, मैग्नीशियम और नियासिन भी पाया जाता है. इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से सिर दर्द, थकान, मूड बदलना, एकाग्रता में कमी आना, भूख कम लगना, भ्रम होना, याद्दाश्त कमजोर होना, रक्तचाप बढ़ना या कम होना, बुखार आदि परेशानियां हो सकती हैं.

  • टाइप- 02 मधुमेह और पार्किंसन रोग से बचाव करने में सहायक होता है.
  • लीवर, पेट, मुंह, स्किन और प्रोटेस्ट कैंसर को कम करने में सहायक होता है.
  • लीवर से जुड़ी बीमारियों को कम करता है.
  • यौन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है.
  • कैफीन के सेवन से आंखों की खूबसूरती बढ़ती है.
  • उम्र के असर को कम करने में मदद करता है.
  • सूजन और जलन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है.
  • त्वचा को आकर्षक और खुबसुरत बनाने में मदद करता है.
  • कॉफ़ी पीने से वजन कम होता है.
  • लीवर में वसा का संचयन और इंसुलिन प्रतिरोध क्षमता बढ़ाता है.
  • फ्री रेडिकल्स को बढ़ने से रोकता है.
  • दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम करता है.
  • इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से ऑस्टियोपेरोसिस (हड्डियों का भुरभुरा) होने का खतरा होता है.

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Kahava/ Coffee…

 Tea and coffee have become an important part of modern lifestyle. As soon as we wake up in the morning, we all sip tea and coffee from the beginning of the day till the evening and before sleeping at night.

Apart from the good taste of coffee, it is also beneficial for health. Caffeine is found in coffee which works as an antioxidant in removing fatigue and laziness from the body. It strengthens the nervous system of the body and also improves digestive power. It helps in preventing cancer.

Let us tell you that coffee is called Kahwa in Arabic and its scientific name is ‘Coffea Arabica’. Coffee is produced in hot areas. The birthplace of coffee is the hills of Yemen and Ethiopia, located at the southern end of the Red Sea. A beverage made from the wild coffee plant is believed to have been first sipped by a shepherd in the Ethiopian plateau. Initially, it was cultivated in Yemen and the people of Yemen named it Kahwa in Arabic. With time, Kahwa was called coffee. The word Kahwa means ‘liquor’. The Sufi saints of Yemen used it to meditate while remembering God.

The coffee plant was brought to India by the East India Company in the 18th century and was sown near Tallicherry as an experiment. Let us tell you that due to the good taste of Indian coffee, it fetches a higher price in the world markets. Only 4.05 percent of the world production of coffee is produced. Loamy soil or volcanic lava soil is suitable for the cultivation of Kahwa. Kahwa is planted near shady trees because Kahwa cannot tolerate strong sunlight.

Kahwa is grown during monsoon rains between January and March. White flowers bloom on coffee plants, which mature and turn into seeds in 03-04 days. When flowers are in bloom in coffee gardens, they look very delightful and beautiful. Fruits start appearing after three years. Its fruits are picked in October and November and dried for two to three weeks.

It is known that coffee processing in India is done by two methods. First is dry processing and second is wet processing. In dry processing it is traditionally dried in the sun due to which its flower is better. Whereas, in wet processing, the coffee beans are fermented and then washed. Wet processing involves cleaning to remove bad seeds and mixing beans of different varieties and sizes to get the best flavor.

  When coffee was cultivated in India, it was first cultivated around Baba Budan Giri and in the surrounding hills of Karnataka. Gradually it spread throughout South India. The government decided to export coffee in 1942 and the government provided protection to small and marginal farmers by passing the Coffee VII Act in 1942 and also established the Coffee Board of India, which is operated by the Ministry of Commerce.

Benefits and disadvantages of coffee…

Coffee contains abundant amounts of antioxidants, along with caffeine, coffee oil and cafestol, riboflavin, pantothenic acid, manganese, potassium, magnesium and niacin are also found in it. Consuming it in excess can cause problems like headache, fatigue, mood swings, loss of concentration, loss of appetite, confusion, weak memory, increase or decrease in blood pressure, fever etc.

  • Helpful in preventing type-02 diabetes and Parkinson’s disease.
  • Helpful in reducing liver, stomach, mouth, skin and prostate cancer.
  • Reduces liver-related diseases.
  • Helpful in eliminating sexual problems.
  • Consumption of caffeine enhances the beauty of eyes.
  • Helps in reducing the effects of age.
  • Helpful in removing the problem of swelling and irritation.
  • Helps in making the skin attractive.
  • Drinking coffee reduces weight.
  • Increases fat accumulation in the liver and insulin resistance.
  • Prevents free radicals from increasing.
  • Reduces the risk of heart-related diseases.
  • Consuming it in excessive amounts increases the risk of osteoporosis (brittle bones).
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