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व्यक्ति विशेष

भाग – 177.

स्वतंत्रता सेनानी गणेश घोष

गणेश घोष एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनका जन्म 22 जून 1900 को हुआ था और वे बंगाल के प्रसिद्ध क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति के सदस्य थे.

गणेश घोष की प्रमुख गतिविधियों में 1930 के चिटगांव शस्त्रागार हमले का संगठन और नेतृत्व शामिल था. इस हमले का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करना था. उन्होंने अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर इस साहसिक अभियान को अंजाम दिया था.

गणेश घोष को कई बार ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया और जेल में डाला. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उच्च सम्मान प्राप्त हुआ. उनके अदम्य साहस और बलिदान ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया.

स्वतंत्रता के बाद गणेश घोष भारतीय संसद के सदस्य भी बने और अपने जीवन के अंतिम समय तक देश की सेवा में जुटे रहे. उनका निधन 16 अक्टूबर 1994 को हुआ. गणेश घोष की गाथा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है.

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अभिनेता अमरीश पुरी

अमरीश पुरी भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे, जिन्हें उनकी विलेन भूमिकाओं के लिए जाना जाता है. उनका जन्म 22 जून 1932 को पंजाब में हुआ था. अमरीश पुरी ने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत रंगमंच से की और बाद में फिल्मों में काम करने लगे.

अमरीश पुरी ने हिंदी फिल्मों के अलावा कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगु और तमिल फिल्मों में भी अभिनय किया. उन्होंने स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म “इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम” में भी मोगैंबो की भूमिका निभाई थी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली.

उनकी सबसे यादगार भूमिका फिल्म “मिस्टर इंडिया” (1987) में मोगैंबो की थी, जिसमें उनका डायलॉग “मोगैंबो खुश हुआ” बहुत लोकप्रिय हुआ. इसके अलावा, उन्होंने “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे,” “करन अर्जुन,” “नगीना,” और “विधाता” जैसी कई प्रसिद्ध फिल्मों में अभिनय किया.

अमरीश पुरी को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले। वे 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की आयु में दुनिया से चले गए. उनके अद्वितीय अभिनय कौशल और शक्तिशाली उपस्थिति ने उन्हें भारतीय सिनेमा का एक आइकन बना दिया.

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अभिनेता टॉम अल्टर

टॉम अल्टर एक भारतीय अभिनेता थे, जिनका जन्म 22 जून 1950 को मसूरी, उत्तराखंड में हुआ था. वे भारतीय सिनेमा और थियेटर में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए जाने जाते हैं. टॉम अल्टर भारतीय माता-पिता के संतान थे, जो अमेरिकन मिशनरी थे, इसलिए वे भारतीय और अमेरिकी संस्कृति का अनूठा मिश्रण थे.

टॉम अल्टर ने अपनी शिक्षा भारत और अमेरिका दोनों में प्राप्त की. वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक थे और बाद में पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय में डिप्लोमा प्राप्त किया. एफटीआईआई  (FTII) में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और शबाना आज़मी जैसे प्रमुख अभिनेताओं के साथ प्रशिक्षण लिया.

उनका कैरियर 1970 के दशक में शुरू हुआ और उन्होंने हिंदी फिल्मों, टेलीविजन सीरियलों और थियेटर में अद्वितीय भूमिकाएं निभाईं. उनकी प्रमुख फिल्मों में “गांधी,” “शतरंज के खिलाड़ी,” “क्रांति,” “आशिकी,” और “परिंदा” शामिल हैं. टॉम अल्टर को उनके अभिनय कौशल और उनकी हिंदी और उर्दू पर उत्कृष्ट पकड़ के लिए भी जाना जाता था.

उन्होंने कई टेलीविजन धारावाहिकों में भी काम किया, जिनमें “भारत एक खोज,” “जुनून,” और “ज़बान संभाल के” शामिल हैं. उन्होंने थियेटर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और सआदत हसन मंटो और शेक्सपियर के नाटकों में अभिनय किया.

टॉम अल्टर को 2008 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया, जो भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, उनके कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए.

टॉम अल्टर का निधन 29 सितंबर 2017 को कैंसर के कारण हुआ. उनके निधन से भारतीय फिल्म और थियेटर जगत को गहरा आघात लगा, लेकिन उनके योगदान और अभिनय की विरासत आज भी जीवित है.

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अभिनेत्री रिताभरी चक्रवर्ती

रिताभरी चक्रवर्ती एक प्रमुख भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से बंगाली और हिंदी फिल्म और टेलीविजन उद्योग में काम करती हैं. उनका जन्म 26 जून 1992 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था.

रिताभरी चक्रवर्ती ने अपने कैरियर की शुरुआत टेलीविजन धारावाहिक “ओगो बोधु सुंदर” से की, जो बंगाली टेलीविजन का एक लोकप्रिय शो था. इस शो में उन्होंने लीड भूमिका निभाई और अपने अभिनय कौशल से दर्शकों का दिल जीत लिया.

इसके बाद, उन्होंने कई बंगाली फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं, जिनमें “तोबू बसंता,” “बोरो मुमा,” और “शेष थेके शूरू” शामिल हैं. उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी अपने कदम जमाए और “परी” जैसी फिल्म में काम किया, जिसमें अनुष्का शर्मा मुख्य भूमिका में थीं.

रिताभरी चक्रवर्ती ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. उन्होंने कई वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्मों में काम किया है, जिनमें “फूलबगान” और “ब्रोकन बट ब्यूटीफुल” शामिल हैं

अभिनय के अलावा, रिताभरी चक्रवर्ती एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाती रहती हैं. उन्होंने कई चैरिटी और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम किया है.

रिताभरी चक्रवर्ती अपने बहुमुखी अभिनय, करिश्माई व्यक्तित्व और सामाजिक योगदान के लिए जानी जाती हैं. उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें भारतीय फिल्म और टेलीविजन उद्योग में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है.

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अभिनेत्री बनिता संधू

बनिता संधू एक ब्रिटिश-भारतीय अभिनेत्री हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा में काम करती हैं. उनका जन्म 22 जून 1997 को इंग्लैंड में हुआ था. उन्होंने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत के बाद से ही अपनी अद्वितीय प्रतिभा और सुंदरता के लिए जानी जाती हैं.

बनिता संधू ने अपनी शिक्षा इंग्लैंड में प्राप्त की और उन्होंने यूसीएल (यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन) से स्नातक की पढ़ाई की. उनके अभिनय कैरियर की शुरुआत विज्ञापन फिल्मों से हुई, जिसमें उन्होंने वीवो और डबलमिंट जैसे प्रमुख ब्रांडों के विज्ञापनों में काम किया.

बनिता संधू ने बॉलीवुड में अपने कैरियर की शुरुआत 2018 में फिल्म “अक्टूबर” से की, जिसमें वे वरुण धवन के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं. इस फिल्म का निर्देशन शूजीत सरकार ने किया था और बनिता के प्रदर्शन को दर्शकों और आलोचकों से काफी सराहना मिली. “अक्टूबर” में उनके सशक्त अभिनय ने उन्हें बॉलीवुड में एक पहचान दिलाई.

इसके बाद, बनिता ने 2020 में तमिल फिल्म “अधार” में काम किया, जो एक सोशल ड्रामा फिल्म थी. उन्होंने नेटफ्लिक्स की हिंदी फिल्म “सर्दार उधम” (2021) में भी काम किया, जिसमें उन्होंने विक्की कौशल के साथ स्क्रीन साझा की.

बनिता संधू ने अपनी छोटी लेकिन प्रभावशाली कैरियर के दौरान अपने अभिनय कौशल और करिश्माई उपस्थिति से भारतीय फिल्म उद्योग में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है. उनके आगामी प्रोजेक्ट्स और प्रतिभा को देखकर यह स्पष्ट है कि वे भविष्य में और भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाएंगी और सफलता की ऊँचाइयों को छूएंगी.

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निर्माता-निर्देशक और अभिनेता एल. वी. प्रसाद

एल. वी. प्रसाद (लक्ष्मणवरपुंड्री वेंकटरमणैया प्रसाद) भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध निर्माता, निर्देशक और अभिनेता थे. उनका जन्म 17 जनवरी 1908 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में हुआ था. एल. वी. प्रसाद भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और उन्हें भारतीय सिनेमा के अग्रणी व्यक्तित्वों में से एक माना जाता है.

एल. वी. प्रसाद ने अपने कैरियर की शुरुआत 1930 के दशक में की थी. वे मूक फिल्मों के समय से ही सिनेमा से जुड़े थे. उनका अभिनय कैरियर 1930 में मूक फिल्म “कलिदास” से शुरू हुआ. हालांकि, वे बाद में निर्देशन और निर्माण की ओर मुड़े और इस क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त की.

प्रमुख फिल्में:

शारदा (1957) – यह फिल्म एक भावनात्मक ड्रामा थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता प्राप्त की.

मिलन (1967) – इस फिल्म ने भी बड़ी सफलता पाई और इसे बहुत सराहा गया.

खिलौना (1970) – यह फिल्म भी बेहद सफल रही और इसमें संजीव कुमार और मुमताज मुख्य भूमिकाओं में थे.

एल. वी. प्रसाद ने 1956 में ‘प्रसाद प्रोडक्शंस’ नामक अपना प्रोडक्शन हाउस स्थापित किया, जो बाद में भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउसों में से एक बना. उनके प्रोडक्शन हाउस ने कई सफल फिल्मों का निर्माण किया और भारतीय फिल्म उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए. उन्हें 1982 में ‘दादासाहेब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान है.

एल. वी. प्रसाद का निधन 22 जून 1994 को हुआ. उनके योगदान और उनके द्वारा स्थापित प्रसाद ग्रुप की विरासत आज भी भारतीय सिनेमा में जीवित है. उनका नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.

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