News

व्यक्ति विशेष -967.

कवि त्रिलोचन शास्त्री

त्रिलोचन शास्त्री को हिन्दी साहित्य की प्रगतिशील काव्य धारा का प्रमुख हस्ताक्षर माना जाता है. वे आधुनिक हिन्दी कविता की प्रगतिशील ‘त्रयी’ के तीन स्तंभों में से एक थे. उन्होंने अपनी रचनाओं में आम आदमी के जीवन, उनकी पीड़ा, संघर्ष और सपनों को बड़ी ही सहजता और यथार्थता के साथ प्रस्तुत किया.

त्रिलोचन शास्त्री का जन्म 20 अगस्त 1917 को उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर ज़िले के कठघरा चिरानी पट्टी नामक स्थान पर हुआ था. इनका मूल नाम वासुदेव सिंह था. त्रिलोचन शास्त्री ने ‘काशी हिन्दू विश्वविद्यालय’ से एम.ए. अंग्रेज़ी की एवं लाहौर से संस्कृत में ‘शास्त्री’ की डिग्री प्राप्त की थी. वो  एक कुशल पत्रकार भी थे. उन्होंने ‘प्रभाकर’, ‘वानर’, ‘हंस’, ‘आज’ और ‘समाज’ जैसी कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया

त्रिलोचन को ‘हिंदी सॉनेट’ का जनक माना जाता है. उन्होंने इस पश्चिमी छंद को भारतीय परिवेश और जन-जीवन के अनुकूल बनाया और लगभग 550 सॉनेट लिखे. उनकी कविताओं में लोकभाषा, मुहावरों और बिंबों का अद्भुत समन्वय मिलता है, जो उन्हें एक विशिष्ट पहचान देता है. उनकी कविताएं जनसाधारण के दुखों और संघर्षों को दर्शाती हैं, जैसे कि उनकी प्रसिद्ध कविता ‘चंपा काले-काले अच्छर नहीं चीन्हती’ में देखने को मिलता है.उन्होंने कविता के अलावा कहानी और आलोचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनका कहानी संग्रह ‘देशकाल’ और आलोचनात्मक कृति ‘काव्य और अर्थबोध’ उल्लेखनीय हैं.

प्रमुख काव्य संग्रह: –  धरती (1945), गुलाब और बुलबुल (1956), दिंगत (1957), ताप के ताए हुए दिन (1980), शब्द (1980), उस जनपद का कवि हूँ (1981), तुम्हें सौंपता हूँ (1985), अमोला (1990).

त्रिलोचन शास्त्री को उनके साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया. जिनमें प्रमुख हैं – साहित्य अकादमी पुरस्कार और श्लाका सम्मान. त्रिलोचन शास्त्री का निधन 9 दिसंबर 2007 को हुआ था.उनकी कविताएं आज भी अपनी सादगी, यथार्थ और जन-सरोकारों के कारण प्रासंगिक बनी हुई हैं.

==========  =========  ===========

इंफ़ोसिस कंपनी के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति

भारतीय आईटी उद्योग के दिग्गज और वैश्विक स्तर के सम्मानित उद्यमी हैं एन. आर. नारायणमूर्ति। उन्हें “भारतीय आईटी उद्योग का पितामह” भी कहा जाता है.

एन आर नारायणमूर्ति का जन्म 20 अगस्त 1946 को कर्नाटक के मैसूर में हुआ था. नारायणमूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति एक प्रसिद्ध लेखिका, समाजसेवी और राज्यसभा सांसद हैं. उनके दो बच्चे हैं—रोहन मूर्ति और अक्षता मूर्ति (जो ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सनक की पत्नी हैं). उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (NIE), मैसूर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक और आईआईटी कानपुर से एम.टेक किया था.

नारायणमूर्ति ने वर्ष 1981 में अपने छह सहयोगियों (नंदन नीलेकणि, एस. गोपालकृष्णन, एस. डी. शिबलाल और तीन अन्य) के साथ मिलकर इंफ़ोसिस की नींव रखी. उन्होंने वर्ष 1981-2002 तक इंफ़ोसिस के सीईओ और बाद में वर्ष 2011 तक चेयरमैन के रूप में कार्य किया था. उनके नेतृत्व में इंफ़ोसिस भारत की पहली ऐसी कंपनी बनी जो नैस्डैक में सूचीबद्ध हुई थी.

 नारायणमूर्ति को भारत में कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता का अग्रदूत माना जाता है. उन्होंने हमेशा ईमानदारी और उच्च नैतिक मूल्यों के साथ व्यवसाय करने पर जोर दिया था. उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और संगठनों द्वारा दुनिया के सबसे महान और प्रभावशाली उद्यमियों की सूची में शामिल किया गया है. ‘फॉर्च्यून’ पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 12 सबसे महान उद्यमियों में गिना है. 

देश के आर्थिक और तकनीकी विकास में एन आर नारायणमूर्ति के अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया.

==========  =========  ===========

राजनीतिज्ञ राजीव गांधी

राजीव गांधी भारत के छठे प्रधानमंत्री थे और उन्होंने वर्ष 1984 – 89 तक इस पद पर कार्य किया. उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था, और वे नेहरू-गांधी परिवार से संबंध रखते थे. उनकी माँ, इंदिरा गांधी, भारत की प्रधानमंत्री थीं, और उनके दादा, जवाहरलाल नेहरू, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे.

राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में भारत में तकनीकी और संचार क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए. उन्होंने देश में टेलीकम्युनिकेशन और कंप्यूटर तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित किया, जिससे भारतीय इकोनॉमी में लंबी अवधि में सुधार हुआ.

उन्होंने अपनी विदेश नीति में भी कई सकारात्मक पहल की, जैसे कि श्रीलंका में तमिल नागरिकों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करना, जिससे भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों में कठिनाइयां भी आईं. हालांकि, उनका कार्यकाल विवादों से भरा रहा, जिसमें बोफोर्स घोटाला सबसे प्रमुख था. यह घोटाला वर्ष 1980 के दशक के अंत में उनकी सरकार के दौरान सामने आया और इसने उनकी छवि को काफी प्रभावित किया.

राजीव गांधी का दुखद निधन 21 मई 1991 को एक बम विस्फोट में हुआ था, जब वे तमिलनाडु में एक चुनावी रैली में भाग ले रहे थे. यह घटना लिट्टे द्वारा अंजाम दी गई थी. उनकी मृत्यु के बाद उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो भारत का सबसे ऊंचा नागरिक सम्मान है.

==========  =========  ===========

अभिनेत्री कुमारी नाज़

कुमारी नाज़ हिंदी सिनेमा की एक प्रतिभाशाली बाल कलाकार और अभिनेत्री थीं, जिनका जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था. उनका असली नाम सालमा बेग था. जिन्होंने वर्ष 1950 – 60 के दशक में कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं. उन्हें बॉलीवुड में मुख्य रूप से एक बाल कलाकार के रूप में पहचान मिली, लेकिन उन्होंने बाद में युवा अभिनेत्री के रूप में भी अपनी जगह बनाई.

कुमारी नाज़ ने वर्ष 1950 के दशक में बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करना शुरू किया. उन्हें उनकी मासूमियत और सहज अभिनय के कारण फिल्म निर्माताओं द्वारा काफी पसंद किया गया. उनकी शुरुआती भूमिकाएँ इतनी प्रभावशाली थीं कि वे जल्दी ही फिल्म उद्योग में एक जानी-मानी बाल कलाकार बन गईं.

प्रमुख फ़िल्में: –

“श्री 420” (1955): – इस राज कपूर और नरगिस की प्रसिद्ध फ़िल्म में कुमारी नाज़ ने एक छोटी लेकिन प्रभावशाली भूमिका निभाई, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया.

“बूट पॉलिश” (1954): – यह फ़िल्म एक क्लासिक फ़िल्म मानी जाती है, जिसमें नाज़ की भूमिका को बहुत सराहा गया. फ़िल्म एक भाई-बहन की कहानी पर आधारित थी जो अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करते हैं. नाज़ की मासूमियत और अभिनय ने सभी का दिल जीत लिया.

कुमारी नाज़ ने किशोरावस्था और युवा अभिनेत्री के रूप में भी काम किया. हालांकि बाल कलाकार के रूप में उन्हें ज्यादा सफलता मिली, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय से लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई. कुमारी नाज़ के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिलती, लेकिन उनके फ़िल्मी सफर को उनके समय के बाल कलाकारों में सबसे प्रतिभाशाली माना जाता है. उन्होंने अपने अभिनय के जरिए बाल कलाकारों की श्रेणी में एक अलग पहचान बनाई.

कुमारी नाज़ की मृत्यु 19 अक्टूबर, 1995 को हुई थी. उनकी अभिनय शैली सरल, स्वाभाविक और हृदयस्पर्शी थी. उनकी मासूमियत और स्क्रीन पर उनकी सहजता ने उन्हें फिल्म निर्माताओं और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. उनकी भूमिकाएँ अक्सर सामाजिक संदेशों और भावनात्मक मुद्दों पर आधारित होती थीं, जिनसे दर्शक जुड़ाव महसूस करते थे.

==========  =========  ===========

महिला शतरंज खिलाड़ी तानिया सचदेव

तानिया सचदेव एक महिला शतरंज खिलाड़ी हैं. उन्हें शतरंज की दुनिया में उनकी बेहतरीन खेल शैली और उपलब्धियों के साथ-साथ उनके आकर्षक व्यक्तित्व के कारण ‘भारतीय शतरंज की ग्लैमर गर्ल’ और ‘ब्यूटी विद ब्रेन’ भी कहा जाता है.

तानिया सचदेव का जन्म 20 अगस्त 1986 को नई दिल्ली में हुआ था. उन्हें महज 06 वर्ष की उम्र में उनकी माँ (अंजू सचदेव) द्वारा शतरंज से से शतरंज खेलना सीखा था और उन्होंने 08 वर्ष की अल्प आयु में ही अपना पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत लिया था. उनके पास महिला ग्रैंडमास्टर और इंटरनेशनल मास्टर दोनों का प्रतिष्ठित खिताब है.

तानिया ने वर्ष 2006- 07 में लगातार दो बार भारतीय महिला प्रीमियर शतरंज चैंपियनशिप जीती थी. उन्होंने वर्ष 2007 में तेहरान में महिला एशियाई शतरंज चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया था. उन्होंने वर्ष 2016, 2018 और 2019 में राष्ट्रमंडल महिला शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते थे. इस्तांबुल में आयोजित 2012 महिला शतरंज ओलंपियाड में उन्होंने बोर्ड-3 पर व्यक्तिगत कांस्य पदक जीता था. इसके अलावा टीम स्पर्धाओं में भी भारत के लिए कई रजत और कांस्य पदक जीते हैं.

तानिया सचदेव को खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 में प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया था.

तानिया एक बेहतरीन शतरंज कमेंटेटर और प्रस्तोता भी है. उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स और विश्व चैंपियनशिप मैचों (जैसे विश्वनाथन आनंद और मैग्नस कार्लसन के मुकाबले) के लिए आधिकारिक कमेंट्री की है.

==========  =========  ===========

साहित्यकार गोपीनाथ मोहंती

गोपीनाथ मोहंती एक भारतीय लेखक थे जिन्होंने मुख्य रूप से ओडिया भाषा में साहित्य सृजन किया. उनका जन्म 20 अप्रैल 1914 को हुआ था और उनका निधन 20 अगस्त 1991 को हुआ था.  मोहंती को उनके गहन और यथार्थपरक लेखन शैली के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने ओडिशा के ग्रामीण और आदिवासी समाज के जीवन को बहुत ही सूक्ष्मता से चित्रित किया है.

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में ‘पराजा’ और ‘अमृतर संतान’ शामिल हैं. ‘पराजा’ उनकी सबसे चर्चित कृति है, जिसमें उन्होंने ओडिशा के ग्रामीण जीवन और सामाजिक ढांचे की गहराई में जाकर वर्णन किया है. उनके लेखन में पात्रों की मानवीय संवेदनाओं का बहुत ही बारीकी से चित्रण किया गया है, और उनकी कहानियां अक्सर समाज के उन पहलुओं को उजागर करती हैं जो अन्यथा अदृश्य रह जाते हैं.

गोपीनाथ मोहंती को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार भी शामिल हैं. उनका कार्य न केवल ओडिया साहित्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय साहित्य के विशाल कैनवास में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है.

:

Related Articles

Back to top button