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सदी परिवर्तन

सदी का क्या परिवर्तन हुआ,कि हमलोग अपने धर्म से दूर होते जा रहें हैं ? आज भी हम जो पहले पर्व त्योहार मनाते थे, वो आज भी मनाते हैं लेकिन उसके अंदाज बदल गये,सोच बदल गये,तरीके भी बदल गये ……? क्या हमारे पुराणों में जो लिखा है वो सब कोरी बकवास है या यूँ कहें मनगढ़ंत कहानी है….? वर्तमान समय में पूजा…….पार्टी की शक्ल में बदल रहा है, और हम सभी खामोश, निर्जीव वस्तु की तरह देख रहें हैं…….आखिर क्यों ? भारतवर्ष का इतिहास रहा है यह देश साधू –सन्यासीयों,महात्माओं का देश रहा है.लेकिन सदी परिर्वतन का असर हमारे साधू–सन्यासीयों व महात्माओं पर भी पड़ा है, कुर्सी की मारा-मारी में धर्म के नाम पड़ या उसकी आड़ लेकर अपने इतिहास पर कलंक लगा रहें हैं ? कहा जाता है कि महात्माओं को गुस्सा नहीं आता है अपशब्दों का प्रयोग नहीं करते थे,अपना व राजा का हित नहीं पहले प्रजा का हित सोचते थे……?सदी क्या बदली सोच व संसकार भी बदल गये….. “स्व: हितं परम् सुखं”.वर्तमान समय की कडवी सच्चाई यही है…?

महात्माओं व व्राह्मणों ने “धर्म” को बाजार की वस्तु बना दिया है,जो हर दिन जवान होती है और हर दिन उसे मार दिया जाता है. हम खुद ऐसा करते हैं व प्रेरणा भी देते है………जिसका तर्क होता है कुछ खोखली आदर्शे……….जिसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता है. वर्तमान समय का जीवन डिब्बाबंद खाने के जैसा है व हमारी सोच भी डिब्बाबंद के ही जैसी हो गई है.

जिस देश की सोच है कि 80साल का व्यक्ति युवा नेता होता है तो वाल्यावस्था और युवावस्था कितने-कितने साल की होगी……..इसका गुना-भाग आप खुद ही कर  लीजिये……क्या ये डिब्बाबंद खाने के जैसा सोच नहीं हैं तो क्या है….? गुलामी के पहले के भारत में १००%साक्षरता दर थी लेकिन आजादी के बाद घर-घर में डिग्रीयों की दूकान खुल गई है….और साक्षरता दर का आकड़ा हर साल प्रकाशित किये जाते हैं. वर्तमान समय में देश का बच्चा-युवा व…….सभी टाइम-मशीन की बात करते है, इसे हम क्या कहें……..ये सदी परिवर्तन का असर है..?

सदी परिवर्तन का असर सबसे ज्यदा शायद महिलाओं पर ही पड़ा है.. फैशन की आड़ में अपनी संस्कृति ही भूल गई हैं………….? इतिहास के किस्से ईतिहास ही बन गये……? सदी परिवर्तन की आड़ में एक तरफ  नकाब है तो दूसरी तरफ कपड़े ही गायब हो रहें हैं…? पहले कामुकता-मादकता पर्दे की आड़ में होता था लेकिन वर्तमान में सरेराह बिछी पड़ी है………..इसे हम क्या कहें………….. ये सदी परिवर्तन का असर है……?

आजादी के बाद मानसिक गुलाम भारत में रहनेवाले निवासियों की सोच भी निचले स्तर की गुलामी कर रही है. अंग्रेजी शासन व्यवस्था खत्म हो गई……ऐसा किताबों में लिखा है,लोगों से सुना है व पढ़ा भी है……….लेकिन क्या करें सोच अभी भी निचले स्तर की गुलामी कर रही है या करने के लिए मजबूर की जा रही है ?एक ऐसा देश जहां वर्ग-वर्ग को देखकर कानून का पालन करना पड़ता है.ऊँची वर्ग व निचले वर्ग के लिए अलग कानून में छुट है लेकिन मध्यम वर्ग के लिए कोई भी छुट नहीं है……….. इसे हम क्या कहें………….. ये सदी परिवर्तन का असर है……?

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What is the change of the century, that we are moving away from our religion? Even today, the festival we used to celebrate earlier, is celebrated even today, but its styles have changed, thinking has changed, and methods have also changed……? Is all that is written in our Puranas empty nonsense or should we say it is a fabricated story….? In the present time worship……is turning into the party, and we all are watching like silent, inanimate objects…….why after all? The history of India has been this country, this country has been the country of sages-sanyasis, and mahatmas. But the change of century has also affected our sages-sanyasis and mahatmas, in the name of religion in the fight of the chair or by taking its guise on our history. Are you stigmatizing? It is said that Mahatma do not get angry, they did not use bad words, and they used to think about the welfare of the people first, not their own interest and that of the king……? “Swa: hitam param sukham”. This is the bitter truth of the present time…?

Mahatma and Brahmins have made “religion” a commodity of the market, which becomes young every day and is killed every day. We ourselves do this and also give inspiration………whose logic is some hollow ideals……….whose reality has nothing to do with it. Present-day life is like eating canned food and our thinking has also become like canned food.

The country which thinks that an 80-year-old person is a young leader, then how many years of childhood and youth will be there…you can multiply it yourself….is this canned food? If you don’t have the same thinking then what is….? There was a 100% literacy rate in India before slavery, but after independence degree shops have opened in every house….and literacy rate figures are published every year. At present, the children and youth of the country talk about time machines but we cannot make needles in our country, we buy them too….what can we call this.. …… this is the effect of change of century..?

The change of the century has probably had the most effect on women only. Under the guise of fashion, they have forgotten their own culture…………..? Tales of history became history……? Under the guise of century change, on one side there is a mask and on the other side only clothes are disappearing…? Earlier sensuality-intoxication used to happen under the cover of curtains but at present, the road is wide open…………..what should we call it…………..this century of change has an effect……?

After independence, the thinking of the residents living in India as mental slaves also did the lower level of slavery. British rule is over…… It is written in books, I have heard and read from people………. but what to think, is it still doing low-level slavery or Is being forced to do? A country where the law has to be followed by looking at the class. There is an exemption in separate law for the upper class and lower class but there is no exemption for the middle class… …….. What should we call this………….. This is the effect of change of century……?

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