Dharm
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सुन्दरकाण्ड-18-1.
दोहा: – द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि। दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासि ।। वाल व्यास सुमन जी…
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जया एकादशी…
सत्संग के दौरान एक भक्त ने महाराज जी पूछा कि, महाराजजी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के बारे…
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सुन्दरकाण्ड-18.
दोहा: – की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर। कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित…
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बसंत या श्रीपंचमी…
।प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।। हिन्दू संस्कृति में ज्ञान या यूँ कहें कि, विद्या की देवी माँ सरस्वती जो त्रिदेवियों…
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सुन्दरकाण्ड-17-3
दोहा: – कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार। सीता देइ मिलेहु न त आवा काल तुम्हार ।। वाल्व्यास सुमन…
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षट्तिला एकादशी…
सत्संग के दौरान एक भक्त ने महाराज जी पूछा कि, महाराज जी माघ महीने के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी…
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कालाष्टमी…
भैरव: पूर्णरूपोहि शंकरस्य परात्मन:। मूढास्तेवै न जानन्ति मोहिता:शिवमायया॥ हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस सृष्टि को चलाने लिए तीन देव…
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सुन्दरकाण्ड-17-2
दोहा: – सकल चरित तिन्ह देखे धरें कपट कपि देह। प्रभु गुन हृदयँ सराहहिं सरनागत पर नेह ।। वाल्व्यास सुमनजी…
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श्री राम के दर्शन की अभिलाषी
श्री राम के दर्शन की अभिलाषी, लहरें गाती हैं श्री सीताराम की। शैल शिखर से सरयू प्रति प्रताप में, महिमा…
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सुन्दरकाण्ड-17
चौपाई: – सुनु कपीस लंकापति बीरा। केहि बिधि तरिअ जलधि गंभीरा।। संकुल मकर उरग झष जाती। अति अगाध दुस्तर सब…
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