व्यक्ति विशेष– 1021.
क्रांतिकारी लाला हरदयाल
लाला हरदयाल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी थे. उनका जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली में हुआ था. वे एक विचारक, शिक्षाविद् और लेखक भी थे. लाला हरदयाल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड चले गए. हालांकि, उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ अपने विरोधी दृष्टिकोण के कारण वहां से डिग्री पूरी नहीं की.
लाला हरदयाल ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ भारतीयों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने वर्ष 1913 में अमेरिका में गदर पार्टी की स्थापना की, जो एक भारतीय राष्ट्रवादी संगठन था जिसका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था. उनका मानना था कि भारतीयों को अपने देश की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र क्रांति का सहारा लेना चाहिए.
लाला हरदयाल के विचार और लेखन ने भारत में कई युवाओं को प्रेरित किया. उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा विदेश में बिताया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय स्वतंत्रता के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की. उन्होंने भारतीयों को शिक्षित करने और उन्हें साम्राज्यवाद के खिलाफ जागरूक करने के लिए कई पुस्तकें और लेख लिखे.
लाला हरदयाल का निधन 4 मार्च 1939 को फिलाडेलफिया, अमेरिका में हुआ था. उनकी विरासत आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में याद की जाती है. उनके जीवन और कार्यों ने भारत की स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
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सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल
भारतीय सेना के उन सबसे कम उम्र के अधिकारियों में से एक थे सेकेंड लेफ़्टिनेंट अरुण खेत्रपाल. जिन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए वीर गति को प्राप्त किया उन्हें, भारत के सर्वोच्च सैन्य अलंकरण, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया है.
अरुण खेत्रपाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 को पुणे, महाराष्ट्र में एक सैन्य परिवार में हुआ था. उनके पिता, लेफ्टिनेंट कर्नल एम. एल. खेत्रपाल, भी भारतीय सेना में थे. अरुण ने वर्ष 1971 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण पूरा कर 17 पूना हॉर्स रेजिमेंट में सेकेंड लेफ़्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किये.
दिसंबर 1971 में, भारत-पाक युद्ध के दौरान, 17 पूना हॉर्स को जम्मू और कश्मीर के शाकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी क्षेत्र में तैनात किया गया था. 16 दिसंबर 1971 को, सेकेंड लेफ़्टिनेंट खेत्रपाल की टुकड़ी को एक पुल-शीर्ष स्थापित करने का काम सौंपा गया था. इस दौरान, पाकिस्तानी बख्तरबंद बल ने एक बड़ा जवाबी हमला किया. लेफ्टिनेंट खेत्रपाल, अपने सेंचुरियन टैंक ‘फम्मा’ में सवार थे. उन्होंने दुश्मन के दो टैंकों को नष्ट करके हमलावर पाकिस्तानी सैनिकों को चौंका दिया.
इस प्रक्रिया में, उनके टैंक को निशाना बनाया गया और उसमें आग लग गई और अपने कमांडर से पीछे हटने का आदेश मिलने के बावजूद भी उन्होंने जलते हुए टैंक में रहते हुए भी एक और पाकिस्तानी टैंक को नष्ट कर दिया. इसके तुरंत बाद, एक और दुश्मन के गोले ने उनके टैंक को भेद दिया और 16 दिसंबर 1971 को वह युद्ध भूमि में वीरगति को प्राप्त हुए. उनके बलिदान ने पाकिस्तानी हमले को विफल करने और भारतीय सेना को बसंतर क्षेत्र में महत्वपूर्ण बढ़त दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई.
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निर्देशक जोया अख्तर
जोया अख्तर एक प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता हैं, लेकिन वह एक अभिनेत्री के रूप में नहीं जानी जातीं. उन्होंने बॉलीवुड में अपने निर्देशन और लेखन कार्य के लिए पहचान बनाई. जोया का निर्देशन कैरियर बेहद सफल रहा है, और उन्होंने कई हिट फिल्में बनाई हैं.
जोया अख्तर का जन्म 14 अक्टूबर 1972 को मुंबई में हुआ था. जोया ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा मनेच्क्जी कूपर विद्यालय, मुम्बई से की और स्नातक की पढ़ाई उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुम्बई से पूर्ण की थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद जोया ने फिल्म निर्माण से जुडी बारीकियां सीखने के लिए न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय चलीं गयीं. जोया ने अपने निर्देशन कैरियर की शुरुआत वर्ष 2011 में फिल्म ‘लक बाय चांस’ से की थी.
फ़िल्मे: –
ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा (2011): – यह फिल्म दोस्ती, जीवन के अनुभवों और आत्म-खोज पर आधारित है और बहुत लोकप्रिय हुई.
दिल धड़कने दो (2015): – एक परिवार की समस्याओं और उनके संबंधों पर केंद्रित इस फिल्म को भी खूब सराहा गया.
गली बॉय (2019): – यह फिल्म मुंबई की गली रैप संस्कृति पर आधारित है और इसे बहुत प्रशंसा मिली.
जोया अख्तर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने लेखकों में से एक जावेद अख्तर और हनी ईरानी की बेटी हैं, और अभिनेता-निर्देशक फरहान अख्तर की बहन हैं.जोया अख्तर की सौतेली माँ शबाना आजमी भी बॉलीवुड का एक- मानी अभिनेत्रीं हैं. जोया अख्तर निर्देशक-कोरिओग्राफर फराह खान और निर्देशक साजिद खान की मौसेऱी बहन है.
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क्रिकेटर गौतम गंभीर
गौतम गंभीर एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता हैं. उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए एक ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं. गंभीर विशेष रूप से भारत को वर्ष 2007 में टी20 विश्व कप और वर्ष 2011 के क्रिकेट विश्व कप जिताने में अपने महत्वपूर्ण प्रदर्शन के लिए याद किए जाते हैं.
गौतम गंभीर का जन्म 14 अक्टूबर 1981 को नई दिल्ली में हुआ था. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा मॉडर्न स्कूल, नई दिल्ली में और आगे की पढ़ाई हिन्दू कॉलेज में पूरी की थी. गंभीर ने क्रिकेट खेलना 10 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया था. गंभीर ने वर्ष 2011 में नताशा जैन से शादी की.
कैरियर: –
वर्ष 2003 में वनडे (ODI) डेब्यू किया.
वर्ष 2004 में टेस्ट डेब्यू किया.
टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन बनाए.
वर्ष 2011 के क्रिकेट विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रनों की पारी खेली, जो भारत की जीत के लिए अहम साबित हुई.
घरेलू क्रिकेट और IPL: –
गंभीर ने दिल्ली के लिए घरेलू क्रिकेट खेला. वो इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के कप्तान रहे और उनकी कप्तानी में KKR ने वर्ष 2012 और वर्ष 2014 में IPL ट्रॉफी जीती.
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, गंभीर ने वर्ष 2019 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा.वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. गंभीर अपने साहसी स्वभाव और स्पष्ट विचारों के लिए भी जाने जाते हैं, चाहे वह खेल के मैदान पर हो या राजनीति में.
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अभिनेत्री विभूती शर्मा
विभूती शर्मा एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत मॉडलिंग से की और बाद में फिल्मों में अभिनय किया. उनका जन्म 14 अक्टूबर 1996 को हुआ था. वह एक प्रसिद्ध डॉक्टर और ज्योतिषी डॉ. विभाश्री की बेटी हैं.
विभूती शर्मा ने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत फिल्म कुकी से की है. उन्हें मुख्य रूप से फिल्म तीस मार खान (2010) में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने एक सहायक भूमिका निभाई थी. हालांकि, वह फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहीं.
विभूती शर्मा का मॉडलिंग कैरियर भी सराहा गया था, और उन्होंने कई विज्ञापन अभियानों में काम किया.



