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टैक्सी ड्राइवर…

भाग - 02

सूरज अब सिर पर चढ़ आया था, और गर्मी बढ़ने लगी थी. रिंकू ने अपनी पानी की बोतल निकाली और एक घूंट पिया. गांव शांत दिख रहा था. कुछ बच्चे धूल में खेल रहे थे, और दूर से जानवरों की आवाज़ें आ रही थीं. लेकिन उस शांति के बावजूद, रिंकू के अंदर एक अजीब सी आशंका बनी हुई थी.

काफ़ी देर हो चुकी थी, लेकिन वह आदमी वापस नहीं आया था. रिंकू को अब चिंता होने लगी. क्या उसके दोस्त ने उसकी मदद करने से इनकार कर दिया? या फिर… कुछ और गड़बड़ हो गई थी?

उसने सोचा कि उसे क्या करना चाहिए. क्या उसे गांव के अंदर जाकर देखना चाहिए? या फिर यहीं उसका इंतज़ार करना चाहिए? अगर वह किसी मुसीबत में फँस गई है, तो शायद उसे पुलिस को खबर करनी चाहिए. लेकिन उस आदमी का डर और पुलिस के बारे में उसकी नकारात्मक टिप्पणी रिंकू को रोक रही थी.

तभी उसकी नज़र एक मोटरसाइकिल पर पड़ी जो तेज़ी से उनकी ओर आ रही थी. मोटरसाइकिल पर दो आदमी बैठे थे, दोनों के चेहरे ढके हुए थे. रिंकू का दिल तेज़ी से धड़कने लगा. क्या ये लोग उस आदमी को ढूंढ रहे थे?

मोटरसाइकिल सीधी रिंकू की टैक्सी के पास आकर रुकी. दोनों आदमी उतरे और उनके हाथों में लाठियां थीं.

“तुम कौन हो?” एक आदमी ने रौबदार आवाज़ में पूछा.

रिंकू डर गया. “मैं… मैं एक टैक्सी ड्राइवर हूँ.”

“यहाँ क्या कर रहे हो?” दूसरे आदमी ने पूछा, उसकी आवाज़ में धमकी थी.

“मैं… मैं एक सवारी का इंतज़ार कर रहा हूँ.” रिंकू ने घबराते हुए कहा.

“कौन सी सवारी?” पहले आदमी ने उसकी ओर एक कदम बढ़ाया.

इससे पहले कि रिंकू कुछ जवाब दे पाता, पहले आदमी ने उसकी टैक्सी की ओर इशारा किया. “यह किसकी गाड़ी है?”

“मेरी है.”

“इसमें कौन आया था?”

रिंकू समझ गया कि ये लोग उसी आदमी को ढूंढ रहे हैं. उसे क्या कहना चाहिए? अगर उसने सच बता दिया तो शायद वह मुसीबत में पड़ जाएगा. लेकिन झूठ बोलना भी खतरनाक हो सकता था.

“एक… एक आदमी आया था. उसे हरिपुर जाना था.” रिंकू ने सावधानी से कहा.

“कहाँ गया वह?” दूसरे आदमी ने अपनी लाठी ज़मीन पर पटकी.

“वह… वह गांव के अंदर गया है. किसी दोस्त से मिलने.”

दोनों आदमियों ने एक-दूसरे को देखा. उनके चेहरे अभी भी ढके हुए थे, लेकिन उनकी आँखों में गुस्से की झलक साफ़ दिखाई दे रही थी।

“ठीक है,” पहला आदमी बोला. “तुम यहीं रुको। अगर वह वापस आए, तो हमें बताना।”

रिंकू ने राहत की सांस ली. “ठीक है.”

दोनों आदमी मोटरसाइकिल पर सवार हुए और गांव के अंदर चले गए. रिंकू अपनी सीट पर धंस गया. उसका शरीर डर से कांप रहा था. वह किस तरह की मुसीबत में फंस गया था? यह आदमी कौन था, और ये गुंडे कौन थे जो उसे ढूंढ रहे थे?

उसे अब उस आदमी के लौटने का इंतज़ार नहीं करना था. उसे यहाँ से निकलना था. यह जगह उसके लिए सुरक्षित नहीं थी.

उसने जल्दी से इंजन स्टार्ट किया और टैक्सी को वापस शहर की ओर मोड़ दिया. उसका मन तेज़ी से चल रहा था. उसे पुलिस को सब कुछ बताना चाहिए. लेकिन फिर उस आदमी का डर…

रास्ते भर वह पीछे देखता रहा, डर था कि कहीं वह मोटरसाइकिल उसका पीछा न कर रही हो. उसका दिल अभी भी तेज़ी से धड़क रहा था, और उसके दिमाग में सिर्फ़ एक ही सवाल घूम रहा था – वह किस मुसीबत में फंस गया था?

शेष भाग अगले अंक में…,

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