भेड़िया मानव - Gyan Sagar Times
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भेड़िया मानव

हमारे पूर्वज भेड़िए को भेड़िया ही समझते थे इसलिए भेड़िए से या तो दूर रहते थे या हाथ में तलवार लेकर मिलते थे इसलिए सुरक्षित थे समय समय पर भेड़िए से भिड़ंत भी हो जाती थी और कभी कभी भेड़िया बाजी भी मार ले जाता था जिससे जन धन की हानि तो होती थी पर मूल सदैव सुरक्षित रहा कारण की हम चाहे हारते या जीतते पर भेड़िए को भेड़िया ही समझते थे समय बीता और कुछ लोमड़ियों ने भेड़िए के साथ मित्रता गांठी और उच्छिष्ट मांस में अपना हिस्सा निर्धारित कर लिया लोमड़ी और भेड़िया गठजोड़ हमारे मध्य अच्छे भेड़िए का शगूफा छोड़ने में सफल रहा तभी से हम अच्छे और बुरे भेड़िए के विभेद में उलझ गए और भेड़ियों के शिकार होकर सिमटने लगे कालांतर में लोमड़ी भेड़िया गठजोड़ और प्रभावी हुआ और नाना प्रकार के भेड़ियों की संकल्पना रची गई जैसे की गरीब भेड़ियाअनपढ़ भेड़िया, भटका हुआ भेड़िया आदि आदि कुछ लोमड़ियों ने तो उच्छिष्ट मांस के लालच में शाकाहारी भेड़िया शब्द भी उछाल दिया जंगल का दुर्भाग्य कहें या भेड़ियों का सौभाग्य कि शाकाहारी भेड़िया शब्द जंगल में बहुत तेजी से फैला और जंगल के निवासी कुछ भेड़ियों के शाकाहारी होने पर विश्वास भी करने लगे जब विश्वास आया तो हाथ से तलवार गायब होने लगी और भ्रमित जंगल वासी हर एक भेड़िए में शाकाहारी भेड़िए का स्वरूप देखने लगे शाकाहारी भेडिए का शगूफा लोमड़ी भेड़िया गठजोड़ की सबसे बड़ी सफलता रही इस एक मात्र काल्पनिक शब्द के बल पर भेड़ियों को निरंतर शिकार और लोमाड़ियों को पर्याप्त मात्रा में उच्छिष्ट मांस मिलने लगा तरह तरह के नैरेटिव स्थापित हो गए कुछ तो यहां तक कहते कि भेड़िए को भेड़िया न कहो देखो उसका भी खून तो लाल है और हमारा भी लाल है कुछ महान लोमाड़ियां तो यहां तक कहने लगीं कि सबको भगवान ने ही बनाया है भगवान की बनाई सृष्टि में विभेद कैसा अरे मांस ही तो नोचता है शरीर नश्वर है यदि थोड़ा सा मांस नोच भी लिया तो क्या बिगड़ गया यह जंगल किसी के बाप का थोड़ी है जंगल पर जितना अधिकार तुम्हारा है उतना ही भेड़िए का भी है एक रंगे हुए सियार ने तो यहां तक कह दिया कि बिना भेड़िए के जंगल के अस्तित्व की कल्पना करना भी पाप है इस प्रकार हम नाना प्रकार के नैरेटिव से भ्रमित होकर अपना अस्तित्व खोने लगे जब अस्तित्व ही खतरे में दिखने लगा तो कुछ मनीषियों ने व्यापक रूप से भेड़िया विरोधी अभियान छेड़ दिया और पूरे जंगल को इन षड्यंत्रों से अवगत कराने लगे इन महान मनीषियों का काम देख कर भेड़िए से गठजोड़ बनाए हुए लोमड़ी सियार संघ ने एक और शगूफा छोड़ दिया इस संगठन के कुछ रंगे हुए सियारों ने एक नया शब्द खोज निकाला और उस शब्द का नाम है राष्ट्रवादी भेड़िया

इस शब्द के आकर्षण में तमाम लोग पुनः भेड़ियों के शिकार बन कर अपना सर्वस्व गंवाने लगे पुनः भेड़िया लोमड़ी और सियार संघ की चांदी हो गई यही हाल रहा तो शीघ्र ही पूरे जंगल पर भेड़ियों का एकछत्र राज्य स्थापित हो जायेगा और इस पाप का दोषी प्रत्येक जंगल वासी होगा जिसने राष्ट्रवादी भेड़िया शब्द का समर्थन किया है इसलिए यदि जंगल को बचाना है तो भेड़ियों से पहले उन लोमाड़ियों और सियारों को ठीक करना होगा जो जंगल में राष्ट्रवादी भेड़िए का नैरेटिव फैला रहे हैं !

 

प्रभाकर कुमार (जमुई).

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