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वट सावित्री व्रत…

वट सावित्री व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है, जिसे मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए मनाती हैं. इस व्रत का संबंध पौराणिक कथा सावित्री और सत्यवान से है, जिसमें सावित्री ने अपने पति सत्यवान के जीवन को यमराज से वापस पाने के लिए अपनी भक्ति और संकल्प शक्ति का प्रदर्शन किया था. वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मई या जून के महीने में पड़ता है. वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पति-पत्नी के संबंधों में विश्वास और भक्ति की महिमा को दर्शाता है.

पूजा सामग्री: –  कच्चा सूत, हल्दी, कुमकुम, फूल, फल, मिठाई, पान, धूप, दीपक, और जल शामिल हैं.

व्रत की विधि:- व्रत करने वाली महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. महिलाएं वट (बरगद) के वृक्ष के पास एकत्र होती हैं. वट वृक्ष की पूजा करने के लिए उसके चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटा जाता है और उसकी परिक्रमा की जाती है.

पौराणिक कथा:

वट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री, राजा अश्वपति की पुत्री, ने अपनी भक्ति और निष्ठा से यमराज से अपने पति सत्यवान का जीवन वापस पाया. जब सत्यवान का जीवन समाप्त हो गया और यमराज उसे लेने आए, तो सावित्री ने अपनी भक्ति, ज्ञान और धर्म की शक्ति से यमराज को प्रभावित किया. यमराज ने सावित्री की भक्ति से प्रसन्न होकर सत्यवान का जीवन लौटा दिया. पूजा और कथा समाप्त होने के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है और सभी व्रती प्रसाद ग्रहण करती हैं.

वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मविश्वास, भक्ति और संकल्प शक्ति को भी दर्शाता है. सावित्री के उदाहरण से प्रेरित होकर महिलाएं इस व्रत को करती हैं और अपने परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं.

वट सावित्री व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और महाराष्ट्र में प्रचलित है. विभिन्न क्षेत्रों में इसे विभिन्न नामों से भी जाना जाता है, लेकिन सभी जगह इसका मूल उद्देश्य और पूजा विधि समान है.

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Vat Savitri Vrat…

Vat Savitri Vrat is an important Hindu festival, which is mainly celebrated by married women for the long life of their husbands and the prosperity of the family. This fast is related to the mythological story of Savitri and Satyavan, in which Savitri demonstrated her devotion and determination to get her husband Satyavan’s life back from Yamraj. Vat Savitri Vrat is observed on the new moon day of Jyeshtha month, which usually falls in May or June. Vat Savitri Vrat is an important part of Indian culture and tradition, which reflects the glory of faith and devotion in the relationship of husband and wife.

Puja Samagri: – Raw cotton, turmeric, kumkum, flowers, fruits, sweets, betel leaves, incense, lamp, and water are included.

Vrat Vidhi: – Women observing the fast take a bath in the morning, wear clean clothes, and take a vow to fast. Women gather near the Vat (Banyan) tree. To worship the Vat tree, a thread of raw cotton is wrapped around it and it is circumambulated.

Katha:

According to the mythology of Vat Savitri Vrat, Savitri, daughter of King Ashwapati, got her husband Satyavan’s life back from Yamraj with her devotion and devotion. When Satyavan’s life ended and Yamraj came to take him, Savitri impressed Yamraj with her devotion, knowledge, and power of religion. Yamraj was pleased with Savitri’s devotion and returned to Satyavan’s life. After the puja and story are over, the prasad is distributed and all the devotees take the prasad.

Vat Savitri Vrat has special significance. This fast is not only observed for the long life of the husband and prosperity of the family, but it also shows the confidence, devotion, and determination of women. Inspired by Savitri’s example, women observe this fast and pray for the welfare of their families.

Vat Savitri Vrat is especially popular in North India, Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, and Maharashtra. It is also known by different names in different regions, but its basic purpose and method of worship are the same everywhere.

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