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दो लाइन…

सच्चाई के हम दो वचन कहतें हैं

उकेरे सियाही से , काले दो अक्षर

कवी जी इसी को सृजन कहतें हैं ।

चलायें हम छुरी तुम गर्दन झुका दो

इसी को ही भाई नमन कहतें हैं ।

रहे पेट भूखा लपेटो तुम रेशम

इसे ऊँचा रहनोसहन कहतें हैं ।

ना होठों पे हाँ है ,ना आँखों में पानी

सजा दी कोई गुड़िया दुल्हन कहतें हैं ।

उसी को हम ओढ़े ,तो शालीनता है

उढा़ दो जो मुर्दा , कफ़न कहतें हैं ।

बेटी की बिदाई में , कंगाल हो जा

इसी को ही दाओधरम कहतें हैं ।

जो चह जाओ दिल से , तो पर्वत उठा लो

इसी को ही प्यारे , लगन कहतें हैं ।

 

प्रभाकर कुमार.

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Two Lines…

 

we say two words of truth

Two black letters engraved with ink

Kavi ji calls this creation.

play hum Churi you bend your neck

This is called Bhai Naman.

wrap your stomach hungry with silk

This is called a high standard of living.

No yes on lips, no tears in eyes

A decorated doll is called a bride.

If we wear the same, then it is decency

Blow away what is called a dead body’s shroud.

Be poor in daughter’s farewell

This is called Daodharam.

Whatever you want from the heart, then lift the mountain

This is what is called love, and passion.

 

Prabhakar Kumar.

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