Dharm

सुन्दरकाण्ड-12-5…

…समुन्द्र के इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन प्रवेश-5…

चौपाई :-

बार बार प्रभु चहइ उठावा। प्रेम मगन तेहि उठब न भावा।।

प्रभु कर पंकज कपि कें सीसा। सुमिरि सो दसा मगन गौरीसा ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, प्रभु उनको बार-बार उठाना चाहते है, परन्तु प्रेम मे डूबे हुए हनुमानजी को चरणो से उठना सुहाता नही. प्रभु का करकमल हनुमानजी के सिर पर है. उस स्थिति का स्मरण करके शिवजी प्रेममग्न हो गए.

सावधान मन करि पुनि संकर। लागे कहन कथा अति सुंदर।।

कपि उठाइ प्रभु हृदयँ लगावा। कर गहि परम निकट बैठावा ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, फिर मन को सावधान करके शंकरजी अत्यंत सुन्दर कथा कहने लगे – हनुमानजी को उठाकर प्रभु ने हृदय से लगाया और हाथ पकड़कर अत्यंत निकट बैठा लिया.

कहु कपि रावन पालित लंका। केहि बिधि दहेउ दुर्ग अति बंका।।

प्रभु प्रसन्न जाना हनुमाना। बोला बचन बिगत अभिमाना।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, हे हनुमान ! बताओ तो, रावण के द्वारा सुरक्षित लंका और उसके बड़े बाँके किले को तुमने किस तरह जलाया ? हनुमान् जी ने प्रभु को प्रसन्न जाना और वे अभिमान रहित वचन बोले.

साखामृग के बड़ि मनुसाई। साखा तें साखा पर जाई।।

नाघि सिंधु हाटकपुर जारा। निसिचर गन बिधि बिपिन उजारा।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, बंदर का बस, यही बड़ा पुरूषार्थ है कि वह एक डाल से दूसरी डाल पर चला जाता है. मैने जो समुन्द्र लाँघकर सोने का नगर जलाया और राक्षसगण को मारकर अशोक वन को उजाड़ डाला.

सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, यह सब तो हे श्रीरघुनाथजी ! आप ही का प्रताप है. हे नाथ ! इसमे मेरी प्रभुता कुछ भी नही है.

दोहा :-

ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं जा पर तुम्ह अनुकुल।

तब प्रभावँ बड़वानलहिं जारि सकइ खलु तूल।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, हे प्रभु ! जिस पर आप प्रसन्न हो, उसके लिए कुछ भी कठिन नही है. आपके प्रभाव से रूई जो स्वयं बहुत जल्दी जल जाने वाली वस्तु है, बड़वानल को निश्चय ही जला सकती है या यूँ कहें कि असंभव भी संभव हो सकता है.

वालव्याससुमनजीमहाराज,

 महात्मा भवन,

श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

Mob: – 8709142129.

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…Samundr Ke Is Paar Aana, Sabaka Lautana, Madhuvan Pravesh-5…

Choupai:-

Baar Baar Prabhu Chaahi UthaavaPrem Magan Tehi Uthab Na Bhav।।

Prabhu Kar Pankaj Kapi ke SeesaSumiri So Dsaa Magan Gaureesa।।

Explaining the meaning of the verse, Valvyassumanji Maharaj says that God wants to lift him up again and again, but it is not suitable for Hanuman ji who is drowned in love to get up from his feet. The lotus of the Lord is on the head of Hanuman ji. Remembering that situation, Shivji fell in love.

Sawadhaan Man Kari Puni SankarLaage kahan Katha Atti Sundar।।

Kapi Uthai Prabhu Hrdayan LagaavaKar Gahi Param Nikat Baithaava ।।

Explaining the meaning of the shloka, Maharajji says that, then Shankarji cautioned his mind and started telling a very beautiful story – God picked up Hanumanji and hugged him and made him sit very close by holding his hand.

Kahu Kapi Raavan Paalit LankaKehi Bidhi Daheu Durg Atti Banka।।

Prabhu Prasann Jaana HanumanaBola Bachan Bigat Abhimaanaa।।

Explaining the meaning of the verse, Maharaj ji says that, O Hanuman! Tell me, how did you burn the Lanka protected by Ravana and its big fort? Hanuman ji knew the Lord pleased and he spoke words without pride.

Shakha Mrig Ke Badi ManusaiSakha Ten Sakha Par Jaee।।

Naaghi Sindhu Hatakpur JaaraNisichar Gan Bidhi Bipin Ujaara।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that the monkey’s only effort is that he moves from one branch to another. I burnt the city of gold by crossing the sea and destroyed the Ashoka forest by killing the demons.

So Sab Tav Prataap RaghuraeeNaath Na Kachhoo Mori Prabhutaee ।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that this is all O Shrirghunathji! You are the glory. Hey Nath! I don’t have any authority in this.

Doha…

Ta Kahun prabhu Kachhu Agam Nahin Ja Par Tumh Anukul

Tab Prabhaavan Badavaanalahin Jaari Saki Khalu Tool।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says, O Lord! Nothing is difficult for the one you are happy with. With your influence, cotton, which itself is a very inflammable object, can definitely burn Badwanal, or rather, impossible can be possible.

Walvyassumanji Maharaj,

 Mahatma Bhawan,

Shriramjanaki Temple,

Ram Kot, Ayodhya.

Mob: – 8709142129

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