Dharm

जया एकादशी…

सत्संग के दौरान एक भक्त ने महाराज जी पूछा कि, महाराजजी माघ महीने के शुक्ल  पक्ष की एकादशी के बारे में विस्तार से बताएं और महाराजजी इस एकादशी में किस भगवान की पूजा करनी चाहिए. वालव्याससुमनजीमहाराज कहते है कि माघ का महीना पवित्र और पावन होता है और इस महीने के व्रत बड़े ही पुण्यदायी होते हैं. महाराजजी कहते है कि, एकादशी का महत्व अपने आप में अनोखा होता है. हर महीने में दो एकादशी होती है और हर एकादशी का महते अपने आप में अनुपम  और अद्वितीय होता है. माघ महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं, और इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति नीच योनि जैसे भूत, प्रेत, पिशाच की योनि से मुक्त हो जाता है.

व्रत विधि :-

एकादशी के पूर्व दशमी को रात्री में एक बार ही भोजन करना आवाश्यक है उसके बाद दुसरे दिन सुबह उठ कर स्नान आदि कार्यो से निवृत होने के बाद व्रत का संकल्प भगवान विष्णु के सामने संकल्प लेना चाहिए. उसके बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें. भगवान विष्णु की पूजा के लिए धूप, दीप, फल और पंचामृ्त से पूजन करना चाहिए. भगवान विष्णु के स्वरूप का स्मरण करते हुए ध्यान लगायें, उसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करके, कथा पढ़ते हुए विधिपूर्वक पूजन करें. ध्यान दें…. एकादशी की रात्री को जागरण अवश्य ही करना चाहिए, दुसरे दिन द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मणो को अन्न दान, जनेऊ व दक्षिणा देकर इस व्रत को संपन्न करना चाहिए.

पूजन सामाग्री :-

रोली, गोपी चन्दन, गंगा जल, दूध, दही, गाय के घी का दीपक, सुपाड़ी, मोगरे की अगरबत्ती, ऋतू फल, फुल, आंवला, अनार, लौंग, नारियल, नीबूं, नवैध, केला और तुलसी पत्र व मंजरी.

कथा :-

एक समय की बात है नंदन वन में उत्सव चल रहा था और इस उत्सव में सभी देवता, सिद्ध संत व दिव्य आत्मा उत्सव का आनन्द ले रहे थे.  गंधर्व गायन कर रहे थे और गंधर्व कन्याएं व अप्सरा नृत्य प्रस्तुत कर रही थीं. उसी सभा में माल्यवान नामक एक गंधर्व और पुष्पवती नामक गंधर्व कन्या का भी नृत्य चल रहा था. इसी बीच पुष्यवती की नज़र जैसे ही माल्यवान पर पड़ी तो उसे देखकर वो उस पर मोहित हो गयी और पुष्यवती सभा की मर्यादा को भूलकर ऐसा नृत्य करने लगी कि, माल्यवान भी उसकी ओर आकर्षित होगे. माल्यवान गंधर्व कन्या की भंगिमा को देखकर सुध बुध खो बैठा और गायन की मर्यादा से भटक गया, जिससे उसके सुर ताल उसका साथ छोड़ गये.

इन्द्र को पुष्पवती और माल्यवान के अमर्यादित कृत्य पर बड़ा क्रोध  आया और उन्होंने, दोनों को श्राप दिया कि, आप स्वर्ग से वंचित हो जाएं और पृथ्वी पर निवास करें. मृत्यु लोक में अति नीच पिशाच योनि आप दोनों को प्राप्त हों. इस श्राप से तत्काल ही दोनों पिशाच बन गये और हिमालय पर्वत एक वृक्ष पर दोनों ने अपना निवास बनया और पिशाच योनि में उन दोनों को अत्यंत कष्ट भोगना पड़ रहा था. एक बार की बात है, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन दोनो अत्यंत ही दु:खी थे और उस दिन वे केवल फलाहार ही किये थे लेकिन, रात्रि के समय दोनों को बहुत ठंढ़ लग रही थी अत: दोनों रात भर साथ बैठ कर जागते रहे और अधिक ठंढ़ के कारण दोनों की मृत्यु हो गयी. परन्तु  अनजाने में जया एकादशी का व्रत हो जाने से उन दोनों को पिशाच योनि से भी मुक्ति मिल गयी. अब माल्यवान और पुष्पवती पहले से भी और अधिक सुन्दर हो गए, साथ ही स्वर्ग में उन्हें उनका स्थान भी  मिल गया.

जब इंद्र ने दोनों को देखा तो, वे आश्चर्यचकित रह गये और उन्होंने पूछा की पिशाच योनि से मुक्ति कैसी मिली? माल्यवान के कहा कि,  यह भगवान विष्णु की जया एकादशी का प्रभाव है और हम इस एकादशी के प्रभाव से पिशाच योनि से मुक्त हो गये. इन्द्र इससे अति प्रसन्न हुए और कहा कि, आप जगदीश्वर के भक्त हैं इसलिए, अब  आप भी मेरे लिए आदरणीय है और आप स्वर्ग में आनन्द पूर्वक विहार करें.

एकादशी का फल:-

एकादशी प्राणियों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होती है. यह दिन प्रभु की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है. इस दिन व्यक्ति इच्छाओं से मुक्त हो कर यदि शुद्ध मन से भगवान की भक्तिमयी सेवा करता है तो वह अवश्य ही प्रभु की कृपापात्र बनता है.

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During the Satsang, a devotee asked Maharaj ji that, Maharaj ji tell in detail about the Ekadashi of Shukla Paksha of Magh month and Maharaj ji which God should be worshiped in this Ekadashi. Valvyassumanji Maharaj says that the month of Magh is sacred and auspicious and fasting during this month is very virtuous. Maharajji says that the importance of Ekadashi is unique in itself. There are two Ekadashi every month and the importance of each Ekadashi is unique and unique in itself. The Ekadashi of Shukla Paksha in the month of Magh is called Jaya Ekadashi, and by fasting on this Ekadashi, a person becomes free from evil spirits like ghosts, ghosts, and vampires.

Fasting method: –

Before Ekadashi, it is necessary to have food only once in the night on Dashami, after waking up in the morning on the second day after taking bath, etc., the vow of fasting should be taken in front of Lord Vishnu. After that establish the idol or picture of Lord Vishnu. To worship Lord Vishnu, worship should be done with incense, lamp, fruits, and Panchamrit. Meditate while remembering the form of Lord Vishnu, after that recite Vishnu Sahastranam and worship it methodically while reciting the story. Pay attention… Jagran must be done on the night of Ekadashi, on the second day of Dwadashi, this fast should be completed by giving food donations, Janeu and Dakshina to Brahmins.

Worship material: –

Roli, gopi sandalwood, Ganges water, milk, curd, cow’s ghee lamp, betel nut, incense sticks of mogra, season fruit, flowers, amla, pomegranate, cloves, coconut, lemon, navaid, banana and basil leaves, and Manjari.

Story: –

Once upon a time, a festival was going on in Nandan Van and all the deities, perfect saints, and divine souls were enjoying the festival. Gandharva was singing and Gandharva girls and Apsara were performing dance. In the same assembly, a Gandharva named Malyavan and a Gandharva girl named Pushpavati were also dancing. Meanwhile, as soon as Pushyavati’s eyes fell on Mallyawan, she was fascinated by him, and Pushyavati, forgetting the decorum of the assembly, started dancing in such a way that Mallyawan would also attract her. Seeing the posture of the Mallyawan Gandharva girl, Sudh Budh lost his mind and deviated from the dignity of singing, due to which his melody left him.

Indra got very angry at the indecent act of Pushpavati and Mallyawan and he cursed both of them to be deprived of heaven and live on earth. May both of you get a very low vampire vagina in the world of death. Due to this curse, both of them became vampires immediately and both of them made their abode on a tree in the Himalayan mountain and both of them had to suffer a lot in the vampire vagina. Once upon a time, on the Ekadashi day of Shukla Paksha of Magh month, both were very sad and on that day they only ate fruits, but both were feeling very cold at night, so both sat together for the whole night. They kept awake and both died due to extreme cold. But by unknowingly fasting on Jaya Ekadashi, both of them got freedom from the vampire vagina. Now Malyavan and Pushpavati became even more beautiful than before, as well as they got their place in heaven.

When Indra saw both of them, he was surprised and asked how he got rid of the vampire vagina? Malavan said that this is the effect of the Jaya Ekadashi of Lord Vishnu and we became free from vampire vaginas due to the effect of this Ekadashi. Indra was very pleased with this and said you are a devotee of Jagdishwar, therefore, now you are also respected by me and you can move happily in heaven.

Results of Ekadashi: –

Ekadashi helps in achieving the ultimate goal of living beings, devotion to God. This day is considered very auspicious and fruitful to serve the Lord with full devotion. On this day, if a person frees himself from desires and does devotional service to God with a pure heart, then he definitely becomes blessed by God.

Walvyassumanji Maharaj,

Mahatma Bhawan, Shri Ramjanaki

Temple, Ram Kot, Ayodhya.

Mo:-8709142129.

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