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राजनीती का चरित्र खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे…?

आज हम बात कर रहें हैं राजनीती की. समाज को दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति है. यह वह मंच है जहाँ नीतियाँ बनाकर कानून लागू किए जाते हैं, साथ ही राष्ट्र का भविष्य भी तय होता है. राजनीती चाहे प्रान्त, राज्य, देश व वैश्विक का हो… अक्सर यह देखा जाता है कि राजनीति का चरित्र एक विरोधाभासी तस्वीर पेश करता है. एक तरफ जहाँ यह सेवा, समर्पण और प्रगति का माध्यम बन सकती है, वहीं दूसरी तरफ यह सत्ता की भूख, जोड़-तोड़ और नकारात्मक रणनीतियों का अखाड़ा भी बन जाती है. वर्तमान की राजनीति को देखकर एक मुहावरा याद आ रहा है ” खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे”. यह मात्र मुहावरा नहीं है परन्तु, यह उस स्थिति को दर्शाता है जब कोई व्यक्ति अपनी असफलता, निराशा या क्रोध को प्रत्यक्ष रूप से उस व्यक्ति या वस्तु पर नहीं निकाल पाता जिसके कारण वह परेशान हो. ऐसी परिस्थिति में वह व्यक्ति अपनी खीझ किसी दूसरे व्यक्ति पर निकालता है.

आमतौर पर बिल्ली का खंभा नोचना इसी प्रकार का एक व्यवहार है. जब बिल्ली किसी कारणवश क्रोधित या निराश होती है, तो वह अपनी इस भावना को खंभा नोचकर व्यक्त करती है, जबकि खंभे का उसकी निराशा से कोई संबंध नहीं होता है. ठीक वैसे ही अक्सर राजनीति में भी ऐसी परिस्थितियाँ देखने को मिल जाती हैं. जहाँ राजनीतिज्ञ या राजनीतिक दल अपनी वास्तविक समस्याओं या विरोधियों से निपटने में असमर्थ महसूस करती हैं. ऐसी परिस्थिति में अक्सर अपनी कमजोर स्थिति को छिपाने या जनता का ध्यान भटकाने के लिए वे अप्रत्यक्ष और कई बार अनुचित तरीके का प्रयोग किया जाता है. जिसका व्यवहार “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” की तरह ही होता है.

जब राजनीतिज्ञ या राजनीतिक दल किसी नीतिगत मुद्दों पर बहस करने में कमजोर पड़ जाते हैं, तो वे अक्सर विपक्षी नेताओं के व्यक्तिगत जीवन पर कीचड़ उछालना शुरू कर देते हैं. वहीं, कई बार सरकार या विपक्षी दल जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं जैसे बेरोजगारी, महंगाई या विकास से हटाने के लिए भावनात्मक और गैर-जरूरी मुद्दों को तूल देते हैं. यह भी एक प्रकार का “खंभा नोचना” है, जहाँ असली मुद्दों को छोड़कर ध्यान भटकाया जाता है.

अपनी कमजोरियों को स्वीकार करने के बजाय, राजनीतिक दल लगातार विपक्षी दलों को नीचा दिखाने और बदनाम करने की कोशिश करते रहना. साथ ही  किसी राजनीतिक दल के भीतर यदि कोई गंभीर मतभेद या असंतोष होता है, तो उसे छिपाने के लिए वे बाहरी तौर पर एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन करते हैं. साथ ही जब राजनीतिक दल आलोचना का सामना करते हैं, तो वे मीडिया या अन्य स्वतंत्र संस्थानों पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि उनकी नकारात्मक छवि को सुधारा जा सके या आलोचना को दबाया जा सके. इस तरह की घटनाएं जो नकारात्मक रणनीति भी “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” की मानसिकता को दर्शाती हैं.

राजनीति में “खंभा नोचने” वाला व्यवहार होने के कई कारण हो सकते हैं उदाहरण – सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने की तीव्र इच्छा नेताओं को अनैतिक और नकारात्मक रणनीतियाँ अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है. जब नेता या राजनीतिक दल अपनी स्थिति को कमजोर महसूस करते हैं, तो वे अपनी असुरक्षा को छिपाने के लिए आक्रामक और भ्रामक तरीके अपना सकते हैं. कई बार राजनीतिक व्यवस्था में पर्याप्त जवाबदेही की कमी के कारण नेता अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार महसूस नहीं करते और मनमानी करते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है जनता की उदासीनता!

राजनीति में “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाला मुहावरा उस नकारात्मक पहलू को उजागर करता है जहाँ नेता अपनी असफलता, निराशा या क्रोध को गलत तरीकों से व्यक्त करते हैं. यह व्यवहार न केवल राजनीतिक माहौल को दूषित करता है बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है. जहाँ एक एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के लिए यह आवश्यक है कि राजनीति सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और जनसेवा के सिद्धांतों पर आधारित हो। नेताओं को अपनी गलतियों को स्वीकार करने और समस्याओं का समाधान करने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि “खंभा नोचकर” ध्यान भटकाना चाहिए.

संजय कुमार सिंह,

राजनैतिक एडिटर.

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