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जीव विज्ञान से संबंधित-95.

“बल्ड ग्रुप” की खोज सबसे पहले किसने की थी?

अगर मनुष्य के शरीर में खून की कमी होने पर कमजोरी लगने लगती है,शरीर पीला हो जाता है,और कई मामलों में खून की कमी होने से मौत भी हो सकती है. आमतौर पर हमसभी लोगों का बल्ड ग्रुप क्या है इसका पता होता है. अगर कभी किसी इंसान को ब्लड की जरूरत होती है तो उसके ग्रुप का ब्लड मिलान करने के बाद  ही उस ब्लड को चढ़ाया जाता है. ब्लड में 4 ग्रुप होते हैं A, B, AB, O इनमें से दो इंटीजन होते हैं और दो एंटीबॉडी. इंसान के ब्लड में अंतर एंटीजन और एंटीबॉडी की वजह से ही होता है. ब्लड ग्रुप इंसान को अपने माता-पिता से आनुवांशिक तरह से मिलता है.

अमेरिका में एक रोग विज्ञानी थे, जिनका नाम था “कार्ल लैंडस्टीनर”. पढ़ाई के दौरान उन्होंने देखा कि कई व्यक्ति सिर्फ इसलिए मर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ब्लड की जरूरत है जो उन्हें नहीं मिल पाती थी. उन्होंने जब एक व्यक्ति के खून को दूसरे व्यक्ति के शरीर में चढ़ाया तो “ब्लड” के थक्के जमने लगे. कई व्यक्तियों को पीलिया जैसी बीमारी या और गंभीर बीमारियों में कई लोगों की मौत भी हुई, उसके बाद ही उन्होंने “ब्लड” पर रिसर्च करने का काम शुरु किया.

कार्ल लैंडस्टीनर ने बल्ड ग्रुप और उसके प्रकार के बारे में बताया कि, खून देने वाले व्यक्ति का ब्लड पाने वाले व्यक्ति के लिए मैच नहीं कर रहा है, इसका पता हेमागल्युटिनेशन के कारण होने वाली क्रॉस मैचिंग से चला. जो की खून देने वाले के खून की कोशिकाओं और खून पाने वाले के सेरम या प्लाजमा के मिलान करने पर किया गया. वर्ष 1901 में लैंडस्टीनर ने यह पता लगाया की, ऐसा रक्त जो रक्त सीरम के सम्पर्क में आने के कारण ही होता है. इसके बाद हर व्यक्ति का ब्लड अलग-अलग होता गया और इसी वजह से खून देने वाले व्यक्ति और खून पाने वाले व्यक्ति की कोशिकाओं में अंतर आने लगा.

रिसर्च को आगे बढ़ाते हुए, लैंडस्टीनर ने सैंकड़ों लोगों के ब्लड का सैंपल लिए और एक साल के अध्ययन के बाद वो इस परिणाम पर पहुंचे कि, ब्लड के तीन ग्रुप का होते हैं. जिनका उन्होंने नाम दिया ए, बी और सी. इसके बाद “सी” बल्ड ग्रुप को “ओ” का नाम दिया गया. लैंडस्टीनर की इस खोज को उनके दो साथियों ने आगे बढ़ाया और चौथे ब्लड ग्रुप का भी पता लगा लिया, जिसे ‘एबी’ ग्रुप का नाम दिया गया. न्यूयॉर्क के सेनाई हॉस्पिटल में लैंडश्टीनर ने अविष्कार के चार सालों बाद सबसे पहला आधुनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया था. इसके बाद ही बल्ड ग्रुप के सिद्धांत को पूरी दुनिया ने माना और अपनाया, जो आज तक लगातार चलता चला आ रहा है.

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Who was the first to discover “Blood Group”?

If there is a lack of blood in the human body, weakness starts, the body becomes pale, and in many cases, death can also occur due to lack of blood. Generally, we all know what is the blood group of people. If ever a person needs blood, then only after matching his blood group, that blood is offered. There are 4 groups in blood A, B, AB, and O out of which two are antigens and two are antibodies. The difference in human blood is due to antigens and antibodies only. Humans get the blood group from their parents in a genetic way.

There was a pathologist in America, whose name was “Karl Landsteiner”. During his studies, he saw that many people were dying just because they needed blood, which they could not get. When he offered the blood of one person to the body of another person, the “blood” started to clot. Many people also died due to diseases like jaundice or other serious diseases, only after that they started doing research on “Blood”.

Karl Landsteiner told about the blood group and its type that the donor’s blood is not matching with the recipient’s blood, it is detected by cross-matching due to hemagglutination. Which was done by matching the blood cells of the donor and the serum or plasma of the recipient. In the year 1901, Landsteiner discovered that such blood is formed only due to contact with blood serum. After this, the blood of every person started getting different and due to this, there was a difference between the cells of the person who gave blood and the person who received blood.

Taking the research further, Landsteiner took blood samples of hundreds of people and after one year of study, he came to the conclusion that there are three groups of blood. They were named A, B, and C. After this the “C” blood group was named “O”. This discovery of Landsteiner was carried forward by two of his companions, and the fourth blood group was also detected, which was named the ‘AB’ group. The first modern blood transfusion was performed four years after Landsteiner’s invention at the Senai Hospital in New York. Only after this, the whole world accepted and adopted the principle of blood group, which is continuing till today.

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