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जन्तु विज्ञान से संबंधित-120.

जीवाणु अति सूक्ष्म होते हैं और यह अनुकूल तथा प्रतिकूल दोनों ही परिस्थितियों में पाये जाते हैं. यह मनुष्य द्वारा साँस लेने की वायु, पीने के जल तथा भोजन में मौजूद रहते हैं. यह मिट्टी में, दूसरी जीवित वस्तुओं में और मृत जैव पदार्थों में भी उपस्थित रहते हैं. बतातें चलें कि, मानव के मुंह में भी कई प्रकार के जीवाणु पाये जाते हैं.

जीवाणु की खोज वर्ष 1683ई० में हॉलैंड के वैज्ञानिक एण्टॉनी वॉन ल्यूवेनहॉक (Antony Von Leeuwenhock) ने की थी. एक दिन एण्टॉनी वॉन ल्यूवेनहॉक अपने दांतों को खुरच रहे थे और अपने बनाए हुए सूक्ष्मदर्शी से उन खुरचानों को देखा तो उनमें इन जीवाणुओं को देख कर इन्हें सूक्ष्म जीव (Tiny animalcules) कहा. इसी कारण से ल्यूवेनहॉक को जीवाणु विज्ञान का पिता (Father of Bacteriology) कहा जाता है. उसके बाद वर्ष 1829 ई. में एहरेनबर्ग (Ehrenberg) ने इन सूक्ष्म जीवोन का नाम जीवाणु (Bacteria) दिया.

लुई पाश्चर ने किण्वन पर रिसर्च कर कहा कि, पदार्थों का सड़ना तथा अनेक रोगों का कारण सूक्ष्मजीव होते हैं. वर्ष 1881 रॉबर्ट कोच (Robert Koch) ने सिद्ध किया कि जानवरों में होनेवाली एन्थ्रेक्स (Anthrax) रोग तथा मनुष्यों में तपेदिक रोग (Tuberculosis) तथा हैजा (Cholera) रोग का कारण भी जीवाणु है. सबसे पहले जीवाणुओं का कृत्रिम संवर्द्धन (Artificial culture) रॉबर्ट कोच ने ही किया था.

जीवाणु का सम्पूर्ण शरीर एक ही कोशिका का बना होता है और इसके चारों ओर एक कोशिकाभित्ति पायी जाती है. कोशिकाभिति के नीचे कोशिका झिल्ली होती है जो प्रोटीन एवं फॉस्फोलिपिड की बनी होती है. इसके कोशिका द्रव्य में माइटोकॉण्ड्रिया, अंत:द्रव्य जालिका तथा अन्य विकसित विकसित कोशिकांग का अभाव होता है. इनमें प्राथमिक प्रकार का केन्द्रक पाया जाता है जिसे न्यूक्लिआइड (Nucleoid) कहते हैं. जीवाणुओं में रोम और कशाभिका भी पाए जाते हैं जो उन्हें गमन, पोषण एवं प्रजनन में सहायता प्रदान करते हैं.

लक्षण :-

·         विषाणु को छोड़कर जीवाणु सबसे सरलतम जीव है.

·         ये सभी स्थानों पर पाये जाते हैं.

·         ये एककोशिकीय जीव हैं जो एकल या समूहों में पाये जाते हैं.

·         इसका आकार 2-10 μ तक होता है.

·         इनकी कोशिकाभित्ति मोटी तथा पेप्टीडोग्लाइकैन (Peptidoglycan) की बनी होती है.

·         इनमें केन्द्रक का अभाव होता है और ये परजीवी, मृतोपजीवी अथवा सहजीवी होते हैं.

·         इनकी कोशिका में लवक, माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जी उपकरण तथा अंत:द्रव्यी जालिका नहीं होते हैं.

·         इनमें जनन मुख्य रूप से विखण्डन द्वारा होता है.

आकृति के आधार पर :-

1.       शलाकवत् (Bacillus):- इस प्रकार का जीवाणु छड़नुमा या बेलनाकार आकृति का होता है.जैसे- बेसिलिस एन्थ्रासिस.

2.       गोलाकार (Coccus):- गोलाकार आकृति के जीवाणुओं को कोकस (Coccus) के नाम से जाना जाता है. यह जीवाणु सबसे छोटा होता है.

कोशिकाओं के विन्यास के आधार पर ये कई प्रकार के होते हैं जैसे…

·         माइक्रोकोकाई (Micrococci):- एक कोशिका के रूप में, जैसे – माइक्रोकोकस (Micrococcus).

·         डिप्लोकोकाई (Diplococci):- दो-दो कोशिकाओं के समूह में,जैसे- डिप्लोकोकस न्यूमोनी (Diplococcus pneumoniae) .

·         स्ट्रेप्टोकाकी (Streptococci):- अनेक कोशिकाओं के समूह श्रृंखलाबद्ध एक जंजीर के रूप में रहते हैं .– स्ट्रेप्टोकॉकस लैक्टिस ( Streptococcus lactis)

·         सारसिनी(sarcinae):- 08, 64 और 128 के घनाकृतिक पैकेट में, जैसे- सारसीना (Sarcina).

3.       सर्पिलाकृतिक(spirallior Helical):- इस प्रकार का जीवाणु coiled या spiral होता है. जैसे- स्पाइरिलमसारसि रुप्रेम (Spirillum ruprem).

4.       कौमा(Comma):- इस प्रकार का जीवाणु अंग्रेजी के चिह्न कौमा (,) के आकार के होते हैं. जैसे- विब्रियो कोमा (Vibrio comma).

पोषण(Nutrition)…

जीवाणुओं में मुख्यतः दो प्रकार का पोषण पाया जाता है. (अ) स्वपोषी पोषण (Autotrophic  nutrition) और (ब) विषमपोशी पोषण (Heterotrophic nutrition).

स्वपोषी पोषण (Autotrophic nutrition) :- जीवाणु अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं. यह दो प्रकार के होते हैं…

·         प्रकाश संश्लेषी (Photo synthetic) :- इस प्रकार के पोषण के अन्तर्गत जीवाणु प्रकाश ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं. इनमें पर्णहरित की जगह जीवाणु पर्णहरित होता है. जैसे- क्रोमैटियम (Chromatium), रीडोस्पिरिलम (Rhodospirillum).

·         रसायन संश्लेषी (Chemosynthetic):- इस प्रकार के पोषण के अन्तर्गत जीवाणु अकार्बनिक पदार्थों के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करते हैं. जैसे- नाइटोसोमोनास (Nitosomones), नाइटोबैक्टर (Nitobacter).

विषमपोशी पोषण (Heterotrophic nutrition):- इस प्रकार के पोषण के अंतर्गत जीवाणु अपना भोजन दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं. ये तीन प्रकार के होते हैं…

1.       परजीवी (Parasitic):- इस प्रकार के पोषण में एक जीवाणु दूसरे जीव पर आश्रित रहते हैं और रोग कारक होते हैं. जैसे- माइकोबैक्टीरियम (Mycobacterium).

2.       सहजीवी (symbiotic):- इस प्रकार के पोषण में जीवाणु अन्य जीव के शरीर में रहकर भोजन प्राप्त करते हैं, लेकिन उस जीव को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुँचाते हैं. जैसे- राइजोबियम (Rhizobium).

3.       मृतोपजीवी (saprophytic):- इस प्रकार के पोषण में जीवाणु मृत अवशेषों से भोजन प्राप्त करते हैं. जैसे- लैक्टोबेसिलस (Lactobacillus).

डॉ. (प्रो.) अमरेंद्र कुमार.

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Related to Zoology-120

Bacteria are very microscopic and are found in both favorable and unfavorable conditions. They are present in the air that humans breathe, drinking water and food. They are present in soil, other living things and also in dead organic matter. Let us tell you that many types of bacteria are found in the human mouth.

The bacterium was discovered by the Dutch scientist Antony Von Leeuwenhock in the year 1683. One day, Antonie von Leeuwenhoek was scratching his teeth and when he looked at those scratches through the microscope he had made, he saw these bacteria in them and called them tiny animalcules. For this reason Leeuwenhoek is called the Father of Bacteriology. After that, in the year 1829, Ehrenberg named these micro-organisms as Bacteria.

Louis Pasteur did research on fermentation and said that microorganisms are the cause of decay of substances and many diseases. In the year 1881, Robert Koch proved that bacteria are the cause of Anthrax disease in animals and Tuberculosis and Cholera disease in humans. The first artificial culture of bacteria was done by Robert Koch.

The entire body of a bacterium is made up of a single cell and a cell wall is found around it. Below the cell wall is the cell membrane which is made of proteins and phospholipids. Its cytoplasm lacks mitochondria, endoplasmic reticulum and other well-developed organelles. Primary type of nucleus is found in these which is called nucleoid. Hair and flagella are also found in bacteria which help them in movement, nutrition and reproduction.

Symptoms: –

• Apart from viruses, bacteria are the simplest organisms.

• These are found everywhere.

• These are unicellular organisms which are found singly or in groups.

• Its size ranges from 2-10 μ.

• The cell wall is thick and made of Peptidoglycan..

• They lack a nucleus and are parasitic, saprophytic or symbiotic.

• Their cells do not contain plasma, mitochondria, Golgi apparatus and endoplasmic reticulum.

• In these, reproduction occurs mainly through fission.

On the basis of shape :-

1. Bacillus:- This type of bacteria is rod-shaped or cylindrical in shape. Like- Bacillus anthracis.

2. Spherical (Coccus):- Spherical shaped bacteria are known as Coccus. This bacterium is the smallest.

Based on the configuration of cells, there are many types of them like…

Micrococci:- In the form of a single cell, like – Micrococcus.

Diplococci:- In groups of two cells, like- Diplococcus pneumoniae.

Streptococci:-  In a group of many cells form a linear chain like — Streptococcus lactis .

Sarcinae:- In cuboid packets of 08, 64 and 128, like- Sarcina.

3. Spiralior Helical:- This type of bacteria is coiled or spiral. Like- Spirillum ruprem.

4. Comma:- This type of bacteria is in the shape of the English symbol comma (,). Like- Vibrio comma.

Nutrition…

Mainly two types of nutrition are found in bacteria. (a) Autotrophic nutrition and (b) Heterotrophic nutrition.

Autotrophic nutrition:- Bacteria produce their own food. These are of two types…

Photosynthetic:- Under this type of nutrition, bacteria make their own food by using light energy. In these, bacteria are chlorophyll instead of chlorophyll. Like- Chromatium, and Rhodospirillum.

Chemosynthetic:- Under this type of nutrition, bacteria obtain energy from the oxidation of inorganic substances. Like Nitosomonas, Nitobacter.

Heterotrophic nutrition:- Under this type of nutrition, bacteria obtain their food from other organisms. These are of three types…

1. Parasitic:- In this type of nutrition, one bacteria remains dependent on another organism and causes disease. Like- Mycobacterium.

2. Symbiotic:- In this type of nutrition, bacteria get food by living in the body of another organism, but do not cause any harm to that organism. Like- Rhizobium.

3. Saprophytic:- In this type of nutrition, bacteria obtain food from dead remains. Like- Lactobacillus.

Dr.  (Prof.)  Amarendra Kumar.

 

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