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प्रजा एक खतरा है!

मैं राजा नहीं हूं पर राजा से कम भी नहीं हूं,

मैं तुम्हें पड़ोसी राजा की तरह पसंद नहीं करता,

हर समय (तुमपर)हमला करने उत्सुक रहता हूं.

तुम भी रहते हो, मैं जानता हूं,

इसलिए तुमसे, सतर्क रहता हूं.

कल मैंने उसकी हत्या की.

यह सोचकर कि, वह भी कोई राजा है,

पर वह बच गया क्योंकि वह राजा नहीं था,

वह प्रजा था—थी, उसके बचने पर

मुझे खुशी हुई,

राजा कभी नहीं चाहता कि, उसकी प्रजा मर जाए,

हां! वह उसे जीने नहीं देता! प्रजा को क्या मारना?

वह एक दिन, खुद अपनी मौत मर जाएगा,

मैं भी राजा, तुम भी राजा

हम दोनों संधि(गठबंधन) कर लेते हैं,

जब हमारे राज्य को, प्रजा से खतरा होता है,

प्रजा एक खतरा है, उसकी चेतना से डरो !

उसे लगातार डराओ कि, वह निश्चेतन बना रहे!

आओ! हम संधि कर लें!

उस प्रजा के खिलाफ,  जो दमघोंटू माहौल में भी

चेतना के गीत गा रहा है! आओ हम मिलकर

उस अकेली चेतना का, बलात्कार कर, हत्या कर दें !और

राजा बने रहें !राजा बने रहने के लिए गठबंधन जरुरी है,

प्रजा के खिलाफ! प्रजा एक खतरा है!

प्रभाकर कुमार.

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