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गणितज्ञ एवं ज्योतिर्विद उमर खैयाम…

आज ही के दिन वर्ष 1048 में फ़ारसी साहित्यकार, गणितज्ञ एवं ज्योतिर्विद उमर खैयाम का जन्म उत्तर-पूर्वी फ़ारस के निशाबुर (निशापुर) में ग्यागरहीं सदी में एक ख़ेमा बनाने वाले परिवार में हुआ था.

इन्होंने इस्लामी ज्योतिष को एक नई पहचान दी और इनके सुधारों के कारण सुल्तान मलिकशाह का पत्रा (तारीख़-ए-मलिकशाही), जलाली संवत या सेल्जुक संवत का आरंभ हुआ. खय्याम ने ज्यामिति बीजगणित की स्थापना की, जिसमें उसने अल्जेब्रिक समीकरणों के ज्यामितीय हल प्रस्तुत किए. इसमें हाइपरबोला तथा वृत्त जैसी ज्यामितीय रचनाओं द्बारा क्यूबिक समीकरण का हल शामिल है.

खगोलशास्त्र में कार्य करते हुए उमर खय्याम ने एक सौर वर्ष की दूरी दशमलव के छः स्थानों तक शुद्ध प्राप्त की तथा, इसी आधार पर एक नए कैलेंडर का आविष्कार किया. उस वक्त के ईरानी हुकूमत ने इसे जलाली कैलेंडर के नाम से लागू किया जो वर्तमान में ईरानी कैलंडर जलाली कैलेंडर का ही एक मानक रूप है.

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Mathematician Omar Khayyam…

On this day in the year 1048, the Persian litterateur, mathematician, and astrologer Omar Khayyam was born in Nishabur (Nishapur) of North-Eastern Persia in the 19th century in a tent-making family.

He gave a new identity to Islamic astrology and due to his reforms Sultan Malikshah’s letter (Tarikh-e-Malikshahi), Jalali Samvat or Seljuk Samvat started. Khayyam founded geometric algebra, in which he presented geometric solutions to algebraic equations. It includes the solution of cubic equations by geometrical constructions like hyperbolas and circles.

While working in astronomy, Omar Khayyam obtained the distance of a solar year accurate to six decimal places and, on this basis, invented a new calendar. The Iranian government of that time implemented it in the name of the Jalali calendar, which is currently a standard form of the Iranian calendar Jalali calendar.

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