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व्यक्ति विशेष

भाग - 33.

साहित्यकार जयशंकर प्रसाद

साहित्यकार जयशंकर प्रसाद भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण नामों में से एक थे, और वे हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि और नाटककार थे. जन्म: – 30 जनवरी 1889,  वाराणसी, उत्तर प्रदेश और मृत्यु: – 15  नवम्बर 1937, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था.

उन्होंने अपने लेखनी से हिंदी साहित्य को नए और मोदर्न दिशाओं में ले जाने का प्रयास किया. उनकी कविताएँ, कहानियाँ और नाटक अपने समय के भारतीय समाज की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों को उजागर करते थे.

उनकी प्रमुख रचनाएँ:

कामायनी” (Kamayani) यह काव्य ग्रंथ उनका महत्वपूर्ण काव्य रचना है जिसमें वे मानव जीवन, भावनाओं, और धर्म के मुद्दे पर विचार करते हैं.

स्कंदगुप्त” (Skandagupta) इस नाटक में उन्होंने भारतीय इतिहास के मौर्य वंश के एक महान सम्राट, स्कंदगुप्त, के जीवन को प्रस्तुत किया।

चित्रांगदा” (Chitrangada) यह भारतीय महाकाव्य “महाभारत” की एक घटना पर आधारित एक नाटक है.

जयशंकर प्रसाद को “छायावाद” के आदि कवि माने जाते है, और उनका योगदान हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण है. उनकी रचनाओं में भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का महत्वपूर्ण स्थान है और वे साहित्य के माध्यम से समाज को सुधारने का संदेश देते थे.

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चित्रकार अमृता शेरगिल

अमृता शेरगिल एक चित्रकार थी जो 20वीं सदी की प्रमुख कला कल्पना के प्रति अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं. वह 1913 में बुढ़पेस्ट, हंगरी, में पैदा हुई थी और 1941 में इंडिया में अपने छवियों की एक छोटी उम्र में मौत हो गई.

अमृता शेरगिल का काम भारतीय और पश्चिमी कला के मिश्रण को प्रस्तुत करता है, और वे अपनी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने अपने चित्रों में भारतीय समाज की जीवन और संस्कृति को अद्वितीय तरीके से प्रकट किया। उनकी कला का एक मुख्य विशेषता था कि वे मानव रूपरेखा को बहुत ही सटीकता से दर्शाती थीं और अपनी छवियों में भावनाओं को अभिव्यक्त करने में माहिर थीं.

अमृता शेरगिल का काम आज भी भारतीय कला के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त करता है और उन्होंने भारतीय कला समुदाय में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है. उनकी कला के कुछ प्रमुख चित्र हैं “ब्राह्मणी” और “वर्गा गर्ल” जो उनकी महत्वपूर्ण छवियों में से कुछ हैं.

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महात्मा गाँधी

महात्मा गांधी, जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता थे. उन्होंने असहमति, अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मार्ग प्रशस्त किया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख चरणों में से एक के रूप में काम किया.

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था. उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने के दौरान वहाँ के भारतीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए सत्याग्रह की प्रारंभिक प्रक्रिया का संचालन किया. महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनेक महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया, जैसे कि चम्पारण सत्याग्रह, खिलाफत आंदोलन, नमक सत्याग्रह, और क्विट इंडिया मूवमेंट. उन्होंने अहिंसा, सत्य, स्वावलंबन, और सर्वोदय के मूल मूल्यों का पालन किया और भारतीय जनता को स्वतंत्रता संग्राम में जुटने के लिए प्रेरित किया.

1947 में भारत की आजादी के बाद, महात्मा गांधी ने विभिन्न समाजिक और आर्थिक मुद्दों को सुलझाने के लिए कई योजनाएँ बनाई, जैसे कि ग्राम सुवराज, हरि जन अभियान, और खादी पहनने की प्रोत्साहन.30 जनवरी, 1948, गांधी की उस समय नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वे नई दिल्ली के बिड़ला भवन (बिरला हाउस के मैदान में रात चहलकदमी कर रहे थे.

भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण और दुखद घटना था. उनकी आत्मबलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनका महत्वपूर्ण योगदान भारतीय जनता के लिए अविस्मरणीय है.

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साहित्यकार माखन लाल चतुर्वेदी

चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूँथा जाऊँ

चाह नहीं, प्रेमी-माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

माखन लाल चतुर्वेदी भारतीय साहित्यकार, कवि और स्वतंत्रता संग्राम समर्थक थे. वह हिंदी भाषा के प्रसिद्ध कवि थे और उनकी कविताएँ, लेखन और योगदान ने भारतीय साहित्य और समाज को गर्वित किया।

माखन लाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को बावई, मध्य प्रदेश में हुआ था. उन्होंने विभिन्न काव्य-रचनाओं, कविताओं और गीतों की रचना की जो साहित्यिक और सामाजिक मुद्दों को सुनिए और जागरूक करने में मदद करती थीं. उनका काव्य गीत-धर्म उनकी एक प्रमुख रचना है जिसमें वे गीत जैसे कृषि के क्षेत्र में किसानों की जीवनी और मानवता के मूल्यों को बताते हैं. माखन लाल चतुर्वेदी का योगदान स्वतंत्रता संग्राम के साथ भी था. उन्होंने गांधीजी के साथ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और विभिन्न स्वतंत्रता संग्राम संगठनों के साथ जुड़कर स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख कवियों में से एक बने.

माखन लाल चतुर्वेदी की कविताओं और लेखन को सम्पूर्ण भारत में प्रशंसा मिली. उनका जीवन और काव्य उनके द्वारा छाया गया एक महत्वपूर्ण योगदान है और उन्हें हिंदी साहित्य के महान कवि में गिना जाता है.

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