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व्यक्ति विशेष

भाग - 22.

उर्दू शायर कैफ़ी आज़मी

कैफ़ी आज़मी एक प्रमुख उर्दू शायर थे, जो भारतीय शायरी के एक महत्वपूर्ण और प्रमुख नाम माने जाते हैं. उनका जन्म 14 जनवरी 1911 को आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था, और उनकी मृत्यु 10 मई 1976 को हुई.

कैफ़ी आज़मी की कविताएँ और शेर उर्दू और हिंदी में उनकी भाषा और बोलचाल के अद्वितीयता के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने समाजवादी और मानवाधिकार के मुद्दों पर भी अपनी रचनाएँ लिखीं. कैफ़ी आज़मी का जीवन परिपेक्ष्य में उनका काम उन्हें एक महत्वपूर्ण उर्दू शायर के रूप में स्थापित करता है, और उन्होंने अपनी कविताओं में समाज में जातिवाद, दलित अधिकारों, और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर भाषा बोली.

कैफ़ी आज़मी के कुछ प्रमुख काव्य संग्रह इस प्रकार हैं:

“नुमा-ए-अदब” (नये अदब का प्रदर्शन)

“आज़म” (कैफ़ी आज़मी की चयनित कविताएँ)

“आवाज़” (गीतों का संग्रह)

कैफ़ी आज़मी का काव्य उर्दू और हिंदी के प्रिय पाठकों और शायरी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है, और उनके शेर और कविताएँ आज भी प्रसिद्ध हैं.

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अभिनेता सौमित्र चटर्जी

 सौमित्र चटर्जी एक प्रमुख भारतीय अभिनेता और बंगाली सिनेमा के महान कलाकारों में से एक थे. उनका जन्म 19 जनवरी 1935 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत में हुआ था, और उनकी मृत्यु 15 नवम्बर 2020 को हुई.

सौमित्र चटर्जी को भारतीय सिनेमा के एक महत्वपूर्ण अभिनेता के रूप में माना जाता है, और वे सत्यजित रय की चर्चित फिल्मों में काम करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जैसे कि “पाथेर पांचाली,” “अपुर संसार,” “चारुलता,” “प्रतिद्वंद्वी,” और “जोकर.” सौमित्र चटर्जी ने बंगाली सिनेमा के साथ ही हिंदी सिनेमा में भी अद्वितीय कौशल और अभिनय की दिशा में अपनी प्रतिष्ठितता कमाई. उन्होंने भारतीय फिल्मों के कई प्रमुख निर्माता-निर्देशकों के साथ काम किया और उन्हें कई पुरस्कार और सम्मानों से नवाजा गया.

सौमित्र चटर्जी का अभिनय और कला में उनका योगदान भारतीय सिनेमा के इतिहास में अद्वितीय है, और उन्हें एक श्रेष्ठ अभिनेता के रूप में याद किया जाएगा.

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देवेन्द्र नाथ टैगोर

देवेन्द्रनाथ टैगोर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पूर्व संगठनकर्ता और भारतीय धार्मिक और सामाजिक विचारक थे. उनका जन्म 15 मई 1817 को कोलकाता, बंगाल प्रांत, ब्रिटिश भारत (अब कोलकाता, भारत) में हुआ था, और उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1905 को हुई थी.

देवेन्द्रनाथ टैगोर को ब्रह्म समाज के प्रमुख नेता के रूप में जाना जाता है. उन्होंने भारतीय समाज में सामाजिक सुधार और सामाजिक सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए. देवेन्द्रनाथ टैगोर ने ब्रह्म समाज की स्थापना की और इसके माध्यम से मानवता, सामाजिक समानता, और जाति व्यवस्था के खिलाफ उठे मुद्दों को प्रमोट किया. उन्होंने धर्म में व्यक्तिगत अनुषासन को महत्वपूर्ण धार्मिक अवधारणाओं के रूप में स्वीकार किया और उनके द्वारा प्रबंधित समाज को “ब्रह्म समाज” कहा जाने लगा.

देवेन्द्रनाथ टैगोर का अनुभव, उनके बेटे रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों को प्रभावित करता है, जिन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता कविता “गीतांजलि” और अन्य उपन्यास और कविताएँ लिखी. रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य के महान कवि और दर्शनिक के रूप में प्रसिद्ध हुए और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय गीत “जन गण मन” की रचना की.

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आचार्य रजनीश

 आचार्य रजनीश जिनका असली नाम चंद्र मोहन जैन था, भारतीय गुरु, धार्मिक विचारक, और स्वतंत्रता संग्रामकार थे. वे अपने अनुयायियों द्वारा “ओशो” के नाम से भी जाने जाते थे, और उन्होंने विशेष रूप से ध्यान और ज्ञान के क्षेत्र में अपनी शिक्षा और गुरुत्व के लिए प्रसिद्ध हुए.

ओशो का जन्म 11 दिसंबर 1931 को मध्यप्रदेश, भारत में हुआ था, और उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1990 को हुई. उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारे धार्मिक और दार्शनिक विचारों का प्रसार किया, और उनके शिष्यों को ध्यान, समय का महत्व, और मनोबल को सुधारने के लिए उपायों की प्रेरणा दी. ओशो के उपदेशों का मुख्य ध्यान ध्यान प्रौढ़ता, सच्चे जीवन का अनुभव, और जीवन के सभी पहलुओं को पूरी तरह से अपनाने का था. वे अपने उपासकों के साथ संज्ञाना की विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते थे, जैसे कि नाटक, संगीत, और झूला.

ओशो के विचारों और उनके विचारधारा के साथ, उनके व्यक्तिगत रूप की अपनी अनूठी शैली के लिए वे प्रसिद्ध थे. हालांकि उनके दृष्टिकोण और उनका अच्छंदा तरीका उन्हें विशेष चर्चा में लाए और उनके अनुयायियों को प्रभावित किया, वे भारतीय समाज के कुछ हिस्सों में विवादित रूप से जाने जाते हैं.

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साहित्यकार उपेंद्रनाथ अश्क

उपेंद्रनाथ अश्क भारतीय हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक थे. उनका जन्म 14 दिसंबर 1910 को उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था, और उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1996 को हुई.

उपेंद्रनाथ अश्क का लेखन साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में हुआ, लेकिन उन्होंने विशेष रूप से कहानियों और उपन्यासों के क्षेत्र में अपनी प्रमुख पहचान बनाई. उनकी कहानियाँ और उपन्यास जीवन के अलग-अलग पहलुओं को छूने वाली कहानियाँ होती थीं और वे आम आदमी के जीवन और समस्याओं को विवेचने में महिर थे.

उपेंद्रनाथ अश्क के प्रमुख काव्य रचनाओं में “गधा गदर” और “मेरा नाम बसंती” जैसे उपन्यास शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें भारतीय हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण नामों में शामिल किया. उनका लेखन आम जनता के दर्द और अनुभवों को दर्शाने का काम करता था और उन्होंने समाज में गरीबी, असमानता, और न्याय के मुद्दों पर अपनी कविताएँ और कहानियाँ लिखी. उपेंद्रनाथ अश्क को भारतीय हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण लेखकों में से एक माना जाता है, और उनका योगदान भारतीय साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण है.

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रजनी कोठारी

रजनी कोठारी भारतीय राजनीतिक विज्ञान के प्रमुख और प्रमिनेंट विचारकों में से एक थे. उनका जन्म 16 अगस्त 1928 को भारतीय राजकोट, गुजरात में हुआ था, और उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1994 को हुई.

रजनी कोठारी को भारतीय राजनीति, समाज, और शासन के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पहचाना जाता है. उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के प्रस्तावना, समाज के विकास, और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अपने लेखन और विचारों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान किया. रजनी कोठारी ने भारतीय राजनीति के कई पहलुओं को गहराई से अध्ययन किया और उन्होंने भारतीय लोकतंत्र के विकास के मामूले में अपनी रचनाओं के माध्यम से साझा किया. उनकी पुस्तक “पोलिटिक्स इन भारत” और “कॉर्पोरेटिज्म और शासन” जैसी प्रमुख रचनाएँ उनके महत्वपूर्ण योगदानों में से हैं.

रजनी कोठारी का अध्ययन और विचारधारा भारतीय राजनीति के माध्यम से उनके छात्रों और पठकों के लिए महत्वपूर्ण रहे और उन्होंने अपने जीवन के दौरान भारतीय समाज के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के समर्थकों के रूप में बड़ी प्राधिकृति बनाई.

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राजनीतिज्ञ माता प्रसाद

माता प्रसाद एक प्रमुख भारतीय राजनीतिज्ञ और समाजसेवी थे, जिन्होंने अपने जीवन में समाज के विकास और सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्धता प्राप्त की.

माता प्रसाद का जन्म 11 अक्टूबर, 1924 को हुआ था और उनकी मृत्यु 19 जनवरी, 2021 को हुई. उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक कार्यों के क्षेत्र में अपनी प्रमुख पहचान बनाई. माता प्रसाद ने अपने समाजसेवा कार्यों के माध्यम से जनता के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सुधार किया. वे विशेष रूप से दलितों और गरीब लोगों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काम करते रहे और उनके उत्थान के लिए योजनाएँ बनाई.

माता प्रसाद का योगदान भारतीय समाज में सामाजिक सुधार और जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण था, और उन्होंने अपने जीवन के दौरान अपने आदर्शों के साथ कई लोगों को प्रेरित किया. उन्हें भारतीय समाज में एक महान सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में याद किया जाता है.

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महाराणा प्रताप

 महाराणा प्रताप सिसोदिया राजपूत राजवंश के एक महत्वपूर्ण और प्रमुख राजा थे, जो 16वीं शताब्दी के भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. वे मेवाड़ के चित्तौड़गढ़ किले के महाराजा थे और मुग़ल सम्राट अकबर के खिलजा के खिलफ शूरवीरता और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध हुए.

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था और उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1597 को हुई. उनका बचपन मेवाड़ के उदयपुर में गुजरा, और उन्होंने अपने जीवन के बड़े हिस्से को मुग़ल साम्राज्य के विरुद्ध युद्ध करके गुजारा. महाराणा प्रताप का प्रसिद्ध युद्ध “हल्दीघाटी का युद्ध” है, जो 18 जून 1576 को लड़ा गया था. इस युद्ध में वे अकबर के सेना के खिलाफ लड़े, हालांकि इस युद्ध में वे हार गए. फिर भी, उन्होंने अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखी और आपके जीवन में मुग़ल साम्राज्य के खिलफ गुजराते रहे.

महाराणा प्रताप को भारतीय इतिहास में एक वीर और स्वतंत्रता संग्रामक के रूप में याद किया जाता है, और उनकी शौर्य और साहस की कथाएँ आज भी भारतीय लोगों के बीच पूरी तरह से जीवित हैं. उन्होंने भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है और उनका नाम गर्व से याद किया जाता है.

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