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व्यक्ति विशेष

भाग – 178.

अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी

अमर शहीद राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी थे. उनका जन्म 23 जून 1901 को पबना जिले (अब बांग्लादेश में) में हुआ था. वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के एक प्रमुख सदस्य थे, जो बाद में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के नाम से जाना जाता है.

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी काकोरी कांड (1925) के मुख्य नायकों में से एक थे. यह घटना तब हुई जब HSRA के सदस्यों ने ब्रिटिश सरकार के खजाने को लूटने की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। उनका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार की वित्तीय प्रणाली को कमजोर करना था.

लाहिड़ी ने अपने जीवन के दौरान युवाओं को जागरूक करने और स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपने साहस और निष्ठा से कई युवाओं को प्रभावित किया.

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में फांसी दी गई. उनकी फांसी की तिथि पहले निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही तय कर दी गई थी ताकि कोई भी प्रयास उन्हें बचाने के लिए नहीं किया जा सके. उनकी आयु उस समय केवल 26 वर्ष थी.

राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है. उनका साहस और निष्ठा आज भी भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है.

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पर्यावरणविद् चण्डी प्रसाद भट्ट

चण्डी प्रसाद भट्ट एक भारतीय पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो मुख्य रूप से चिपको आंदोलन के लिए जाने जाते हैं. उनका जन्म 23 जून 1934 को उत्तराखंड के चमोली जिले में हुआ था. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं.

वर्ष 1970 के दशक में, चण्डी प्रसाद भट्ट ने चिपको आंदोलन की शुरुआत की, जो एक पर्यावरणीय और सामाजिक आंदोलन था. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जंगलों की कटाई को रोकना और पर्यावरण को बचाना था. इस आंदोलन में ग्रामीण महिलाओं ने पेड़ों से चिपक कर उनकी कटाई को रोका.

भट्ट ने 1964 में दशोली ग्राम स्वराज्य संघ (DGSS) की स्थापना की, जो ग्रामीण विकास और वन संरक्षण के लिए काम करता है. यह संगठन चमोली जिले में ग्रामीण समुदायों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

भट्ट ने अपने जीवन को ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, और स्थानीय समुदायों की सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया है. उन्होंने स्थानीय संसाधनों का सतत उपयोग और पारंपरिक ज्ञान को प्रोत्साहित किया.

चण्डी प्रसाद भट्ट को उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं, जिनमें शामिल हैं: –

रेमन मैगसेसे पुरस्कार: 1982 में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

पद्म भूषण: 2005 में भारत सरकार ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा.

गांधी शांति पुरस्कार: 2013 में उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला.

चण्डी प्रसाद भट्ट का कार्य न केवल पर्यावरण संरक्षण में बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुधार में भी महत्वपूर्ण रहा है. उनके प्रयासों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा दिया है.

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह

वीरभद्र सिंह भारतीय राजनीति के एक राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कई बार कार्य किया। उनका जन्म 23 जून 1934 को हुआ था और उनका निधन 8 जुलाई 2021 को हुआ. वीरभद्र सिंह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और हिमाचल प्रदेश के सबसे अधिक समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री थे.

वीरभद्र सिंह सात बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. उनके कार्यकाल 1983-1990, 1993-1998, 2003-2007, 2012-2017 तक. उन्होंने भारतीय संसद के सदस्य के रूप में भी कार्य किया। वे लोकसभा के सदस्य के रूप में 1962, 1967, 1971, 1980, और 2009 में चुने गए थे. इसके अलावा, वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे. वीरभद्र सिंह ने केंद्र सरकार में भी विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। वे इस्पात मंत्री, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री, और उद्योग राज्य मंत्री रहे.

वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश में विकास और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, और सड़क निर्माण के क्षेत्र में कई परियोजनाएं शुरू कीं. वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू कीं. उनके प्रयासों से सेब और अन्य फलों की खेती में वृद्धि हुई. वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू कीं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ.

वीरभद्र सिंह का व्यक्तिगत जीवन भी काफी चर्चित रहा. उन्होंने प्रतिभा सिंह से विवाह किया और उनके दो बच्चे हैं. उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह भी एक राजनीतिक नेता हैं और लोकसभा सदस्य रही हैं.

वीरभद्र सिंह का राजनीतिक कैरियर और उनके योगदान हिमाचल प्रदेश की राजनीति और विकास में महत्वपूर्ण रहे हैं. उनके नेतृत्व में राज्य ने कई क्षेत्रों में प्रगति हुई थी.

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अभिनेता रहमान

रहमान, जिनका पूरा नाम रहमान खान है, भारतीय फिल्म उद्योग के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं. उन्होंने मुख्य रूप से तमिल और मलयालम फिल्मों में काम किया है, लेकिन उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. उनका जन्म 23 मई 1967 को अब्दुल रहमान के रूप में केरल, भारत में हुआ था.

रहमान ने 1983 में मलयालम फिल्म “Koodevide” से अपने कैरियर की शुरुआत की.  इस फिल्म में उनकी अभिनय क्षमता की काफी सराहना हुई और उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी मिला.

तमिल फिल्मों में सफलता: रहमान ने तमिल फिल्म उद्योग में भी सफलता हासिल की. उनकी प्रमुख तमिल फिल्मों में “Kanni Rasi,” “Pudhu Pudhu Arthangal,” और “Duet” शामिल हैं. उन्होंने तमिल सिनेमा में अपने विविधतापूर्ण अभिनय से एक मजबूत पहचान बनाई है. मलयालम फिल्मों में वापसी: 2000 के दशक में, रहमान ने मलयालम फिल्मों में वापसी की और कई सफल फिल्मों में अभिनय किया. उनकी प्रमुख मलयालम फिल्मों में “Manichitrathazhu,” “Aaram Thampuran,” और “Karmayodha” शामिल हैं.

रहमान ने अपने अभिनय कैरियर में कई पुरस्कार जीते हैं. उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार और विभिन्न अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

रहमान का व्यक्तिगत जीवन भी काफी दिलचस्प है. उनका विवाह मेहेरा से हुआ और उनके दो बच्चे हैं. रहमान का परिवार फिल्म उद्योग से दूर रहा है, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने परिवार का समर्थन प्राप्त किया है.

रहमान ने अपनी अभिनय यात्रा में विभिन्न भाषाओं और शैलियों में काम किया है, जिससे उन्होंने एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाई है. उनका योगदान भारतीय सिनेमा में महत्वपूर्ण है और वे आज भी सक्रिय रूप से फिल्में कर रहे हैं.

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निर्देशक जाब्बिर पटेल

जब्बार पटेल भारतीय फिल्म निर्देशक और नाटककार हैं, जिन्हें मराठी सिनेमा और थिएटर में उनके योगदान के लिए जाना जाता है. उनका जन्म 23 जून 1942 को हुआ था. पटेल ने अपने कैरियर में कई समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्में और नाटक प्रस्तुत किए हैं, जिनमें समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाया गया है.

प्रमुख फिल्में:-

सामना (1974): –यह फिल्म भ्रष्टाचार और राजनीतिक गलतियों पर आधारित है. इसे मराठी सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है. इस फिल्म में स्मिता पाटिल और मोहन अगाशे मुख्य भूमिकाओं में थे.

सिंहासन (1979): – यह एक राजनीतिक ड्रामा फिल्म है जो पत्रकारिता और राजनीति के बीच के संबंधों को उजागर करती है. इसे भी मराठी सिनेमा की एक क्लासिक फिल्म माना जाता है.

उंबरठा (1982): – इस फिल्म में स्मिता पाटिल मुख्य भूमिका में थीं और यह महिलाओं के संघर्ष और अधिकारों पर केंद्रित थी

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर (2000): –यह फिल्म डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के जीवन पर आधारित है और इसे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं

जब्बार पटेल ने थिएटर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन किया है जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित हैं. उनके नाटकों में प्रगतिशील विचारधारा की झलक मिलती है. जब्बार पटेल को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने काम की पहचान बनाई है.

पटेल का व्यक्तिगत जीवन उनके काम की तरह ही प्रेरणादायक है. वे एक डॉक्टर थे लेकिन उन्होंने अपने जुनून के कारण फिल्म निर्माण और थिएटर की ओर रुख किया. उनका परिवार भी उनके काम में समर्थन देता रहा है.

जब्बार पटेल का योगदान मराठी सिनेमा और थिएटर में महत्वपूर्ण ह.। उनकी फिल्मों और नाटकों ने समाज के विभिन्न मुद्दों को उठाने और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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अभिनेता और राजनेता राज बब्बर

राज बब्बर एक भारतीय अभिनेता और राजनीतिज्ञ हैं. उनका जन्म 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के टुंडला में हुआ था. उन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाई और बाद में राजनीति में भी सक्रिय हो गए.

राज बब्बर ने अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत 1977 में फिल्म “किस्सा कुर्सी का” से की. उन्होंने हिंदी और पंजाबी फिल्मों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा है.

प्रमुख फिल्में: –

इंसाफ का तराजू (1980): – यह फिल्म उनकी करियर की प्रमुख फिल्मों में से एक है, जिसमें उन्होंने एक खलनायक की भूमिका निभाई थी.

निकाह (1982): – यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसमें राज बब्बर की अदाकारी को बहुत सराहा गया.

आज की आवाज़ (1984): – इस फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली

आंधी-तूफान (1985): – यह एक एक्शन ड्रामा फिल्म थी, जिसमें उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी.

राज बब्बर ने 1989 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में राजनीति में प्रवेश किया. वे तीन बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं और उन्होंने राज्यसभा में भी सेवा दी है. 2006 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी जॉइन की, लेकिन बाद में 2008 में वे फिर से कांग्रेस में लौट आए.

राज बब्बर ने लोकसभा चुनाव में कई बार हिस्सा लिया और जीत हासिल की. वे फतेहपुर सिकरी और आगरा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे हैं. उन्होंने राज्यसभा में भी अपनी सेवाएं दी हैं. वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं और पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में कार्य किया है.

राज बब्बर का व्यक्तिगत जीवन भी दिलचस्प रहा है. उनकी पहली पत्नी नादिरा बब्बर हैं, जो एक प्रसिद्ध थिएटर कलाकार और निर्देशक हैं. उनके दो बच्चे हैं, आर्य बब्बर और जूही बब्बर, जो दोनों ही अभिनेता हैं. बाद में, उन्होंने अभिनेत्री स्मिता पाटिल से शादी की, जिनसे उनका एक बेटा प्रतीक बब्बर है, जो भी एक अभिनेता है.

राज बब्बर ने अपने फिल्मी और राजनीतिक कैरियर में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. वे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं, जिन्होंने दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

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‘भारतीय जनसंघ’ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीतिज्ञ और शिक्षाविद थे, जो भारतीय जनसंघ के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं. उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था. वे भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उनके योगदान को भारतीय राजनीति और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे थे. उनके पिता, सर आशुतोष मुखर्जी, एक प्रमुख शिक्षाविद और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे. श्यामा प्रसाद ने अपनी शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्राप्त की, जहां उन्होंने 1923 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया और बाद में कानून की डिग्री भी प्राप्त की.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की, लेकिन जल्द ही वे कांग्रेस की नीतियों से असंतुष्ट हो गए. उन्होंने हिंदू महासभा में शामिल होकर अपने राजनीतिक विचारों को आगे बढ़ाया। वे 1944 से 1946 तक हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे.

वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में विकसित हुई. भारतीय जनसंघ का उद्देश्य एक सशक्त और संगठित भारत का निर्माण करना था, जो भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल्यों को समर्पित हो. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने धारा 370 के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके तहत जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्राप्त थी.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन 23 जून 1953 को जम्मू-कश्मीर में हिरासत में रहते हुए हुआ. उनकी मृत्यु विवादास्पद परिस्थितियों में हुई और इसे लेकर कई सवाल उठाए गए.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. वे 1934 से 1938 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और इस दौरान उन्होंने शिक्षा में सुधार और विस्तार के लिए कई प्रयास किए. भारतीय राजनीति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और संस्कृति को प्राथमिकता दी और भारतीय राजनीति में अपने आदर्शों और सिद्धांतों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया.

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति और शिक्षा के एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया. उनका योगदान आज भी भारतीय समाज और राजनीति में प्रेरणा स्रोत बना हुआ है.

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राजनीतिज्ञ संजय गाँधी

संजय गांधी भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता और इंदिरा गांधी के छोटे बेटे थे. उनका जन्म 14 दिसंबर 1946 को हुआ था और 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया. संजय गांधी का राजनीतिक कैरियर और उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बने रहते हैं.

संजय गांधी का जन्म दिल्ली में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के वेल्हम बॉयज़ स्कूल और बाद में दून स्कूल से प्राप्त की. संजय ने विमानन इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और रोल्स-रॉयस कंपनी में प्रशिक्षण लिया।

संजय गांधी का राजनीतिक कैरियर 1970 के दशक में शुरू हुआ, जब उनकी मां, इंदिरा गांधी, प्रधानमंत्री थीं. वे जल्दी ही कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता बन गए और उनके पास विशेष प्रभाव और शक्ति थी.

संजय गांधी का राजनीतिक कैरियर मुख्य रूप से आपातकाल के दौरान उभरा। आपातकाल के दौरान वे कई विवादास्पद नीतियों और अभियानों के लिए जाने गए, जैसे परिवार नियोजन कार्यक्रम और दिल्ली के तुर्कमान गेट पर चलाया गया अतिक्रमण विरोधी अभियान. संजय गांधी ने कांग्रेस पार्टी में युवा कांग्रेस के माध्यम से युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

वर्ष 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद भी संजय गांधी ने पार्टी को पुनर्गठित करने और उसकी पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.23 जून 1980 को नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे पर एक विमान दुर्घटना में संजय गांधी का निधन हो गया. वे एक प्रशिक्षु पायलट थे और उस दिन वे अपने विमान को स्वयं उड़ा रहे थे.

संजय गांधी की राजनीतिक शैली और उनकी नीतियां हमेशा विवाद का विषय रही हैं, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक कुशल संगठनकर्ता और एक दृढ़ नेता मानते हैं. उनकी विरासत उनके परिवार द्वारा जारी रही, जिसमें उनकी पत्नी, मेनका गांधी, और बेटा, वरुण गांधी, दोनों ही भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं.

संजय गांधी का जीवन और उनके कार्य भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतिनिधित्व करते हैं. उनकी नीतियां और उनके राजनीतिक दृष्टिकोण आज भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय बने रहते हैं.

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चौथे राष्ट्रपति वी.वी. गिरी

वी.वी. गिरी (वराहगिरी वेंकट गिरी) भारत के चौथे राष्ट्रपति थे. उनका पूरा नाम वराहगिरी वेंकट गिरी था और उनका जन्म 10 अगस्त 1894 को वर्तमान आंध्र प्रदेश के बेरहमपुर (अब ओडिशा) में हुआ था. वे भारतीय राजनीति और श्रमिक आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे. उनका कार्यकाल राष्ट्रपति के रूप में 24 अगस्त 1969 से 24 अगस्त 1974 तक रहा.

वी.वी. गिरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास (अब चेन्नई) में प्राप्त की और बाद में आयरलैंड के डबलिन विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई की. वे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ जुड़ गए. वी.वी. गिरी एक प्रमुख श्रमिक नेता थे और उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वे अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) के अध्यक्ष रहे और भारतीय मजदूर संघ (INTUC) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

वी.वी. गिरी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई और महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन में भाग लिया. स्वतंत्रता के बाद, वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए और उन्होंने श्रम और रोजगार मंत्री के रूप में कार्य किया. वे उत्तर प्रदेश, केरल, और कर्नाटक के राज्यपाल भी रहे. वी.वी. गिरी 1967 में भारत के उप राष्ट्रपति बने.

वर्ष 1969 में राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन के निधन के बाद वी.वी. गिरी को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने राष्ट्रपति पद का चुनाव स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ा. उन्हें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का समर्थन प्राप्त हुआ और वे राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचित हुए.

वी.वी. गिरी ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और विभिन्न कानूनों और नीतियों के माध्यम से उनकी स्थिति को सुधारने का प्रयास किया. उन्होंने शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. वी.वी. गिरी को 1975 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न, से सम्मानित किया गया.

वी.वी. गिरी का निधन 24 जून 1980 को चेन्नई में हुआ. उनका जीवन और कार्यभार भारतीय राजनीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में माना जाता है.

वी.वी. गिरी का जीवन संघर्ष, सेवा, और समर्पण का प्रतीक है. उनके योगदान को भारतीय इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा.

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