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व्यक्ति विशेष

भाग - 12.

उपन्यासकार वृंदावनलाल वर्मा

वृंदावनलाल वर्मा एक प्रमुख हिंदी उपन्यासकार और निबंधकार थे। उन्होंने हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।

वृंदावनलाल वर्मा का जन्म 18 जनवरी 1889 को वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की थी और फिर उन्होंने अपनी लेखनी का कार्य शुरू किया।

वृंदावनलाल वर्मा के प्रमुख उपन्यास में “चित्त-चोर” और “दिनकर” शामिल हैं, जिन्होंने हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया। उनके उपन्यास समाज में जातिवाद, जाति प्रतिष्ठा, और मानवीय समस्याओं पर विचार करते थे।

वृंदावनलाल वर्मा ने निबंध, कविता, और उपन्यास के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया और वे अपने साहित्यिक कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने भारतीय साहित्य को एक नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वृंदावनलाल वर्मा का निधन 1969 में हुआ, लेकिन उनके लेखन का प्रभाव और महत्व आज भी हिंदी साहित्य के इतिहास में बना हुआ है।

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हरगोविन्द खुराना

हरगोविन्द खुराना एक प्रमुख भारतीय-अमेरिकी जैव रसायनशास्त्री थे जिन्होंने वर्गीय विज्ञान और नोबेल पुरस्कार की श्रेय जीती। वे 9 जनवरी 1922 को पाकिस्तान के खुशाब जिले में पैदा हुए थे और 15 नवम्बर 2011 को बोस्टन, मासाचुसेट्स, संयुक्त राज्य अमेरिका में निधन हुए।

हर गोबिंद खुराना ने डीओक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) की विशेष धारा और उसके कोड को खोजने में महत्वपूर्ण योगदान किया। उन्होंने जन्मसूत्रीय कोड (Genetic Code) के बारे में महत्वपूर्ण खोज की और यह प्रमाणित किया कि कैसे जीवों के जीवन प्रक्रियाओं के लिए विभिन्न उपकारक और अमिनो एसिड्स का उपयोग होता है।

हर गोबिंद खुराना को 1968 में नोबेल रसायन शास्त्र का पुरस्कार मिला था, जिसके साथ ही वे इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक बने थे।

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पार्श्व गायक महेन्द्र कपूर

महेंद्र कपूर एक प्रमुख भारतीय फ़िल्म अभिनेता थे जिन्होंने हिन्दी सिनेमा में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने अपनी कैरियर के दौरान बहुत सारी सफल फ़िल्में की हैं और उन्हें “पार्श्व गायक” के रूप में भी जाना जाता है।

महेंद्र कपूर का जन्म 1923 में इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री के मुख्य केंद्र मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। उनका कैरियर 1940 के दशक में शुरू हुआ था और उन्होंने बहुत सारी मशहूर फ़िल्मों में काम किया।

महेंद्र कपूर की कुछ मशहूर फ़िल्में शामिल हैं:

“पारवान” (1954)

“श्री 420” (1955)

“मेरा नाम जोकर” (1970)

“जब जब फूल खिले” (1970)

“अपना देस” (1972)

उन्होंने अपने कैरियर में विभिन्न जीनों का काम किया और वे एक प्रमुख और प्रिय अभिनेता बने। महेंद्र कपूर का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने 1992 में अपनी कैरियर की आखिरी फ़िल्म “जब तक है जान” में काम किया और उन्होंने 2008 में इस दुनिया को छोड दिया।

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माधव सिंह सोलंकी

माधव सिंह सोलंकी एक भारतीय राजनेता थे जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के सदस्य थे। उनका जन्म 30 जुलाई 1927 को गुजरात राज्य के जुनागढ़ जनपद में हुआ था और उनका निधन 9 जनवरी 2021 को हुआ।

माधव सिंह सोलंकी ने अपनी राजनीतिक कैरियर की शुरुआत गुजरात राज्य में की और उन्होंने कई बार गुजरात विधानसभा में सदस्य रहकर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने 1980 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और 1985 और 1989 में भी इस पद पर चयन हुआ।

सोलंकी ने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया और उन्होंने विदेश मामलों और संरक्षण मंत्रालय का प्रबंधन किया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और राजनीतिक क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान दिया।

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अभिनेता सुनील लहरी

सुनील लहरी एक भारतीय फिल्म अभिनेता है जो अपने काम के लिए जाने जाते हैं, और उन्होंने अपनी कला के लिए जाने जाते हैं। उनका जन्म 9 जून, 1963 को हुआ था और वे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई प्रमुख फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं।

सुनील लहरी का सबसे प्रसिद्ध कार्य उनके टेलीविजन शो “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” में अभिनय करना है, जहां उन्होंने अच्छूत का किरदार निभाया है। इस शो में उनका कॉमेडी अभिनय लोगों को बहुत पसंद आया है और उन्हें इस कारण बहुत पहचान मिली है।

इसके अलावा, सुनील लहरी ने बॉलीवुड फिल्मों में भी अभिनय किया है और उनका कार्य उन्हें बॉलीवुड में भी मान्यता दिलाई है।

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अभिनेता फ़रहान अख़्तर

फरहान अख़्तर एक भारतीय फिल्म निर्देशक, लेखक, अभिनेता, गायक, और फ़िल्म निर्माता हैं। उनका जन्म 9 जनवरी 1974 को हुआ था। वह बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता-निर्देशकों में से एक हैं और उन्होंने अपने कई प्रशंसा प्राप्त करने वाले कामों के लिए जाने जाते हैं।

फरहान अख़्तर का नाम उनके परिवार से जुड़े फिल्म इंडस्ट्री से है, क्योंकि उनके पिता का नाम जाने-माने लेखक-निर्देशक जावेद अख़्तर है और उनकी मां का नाम हैना अज़ार। फरहान ने अपने कैरियर की शुरुआत फिल्म “दिल चाहता है” (2001) के निर्देशन से की थी, जिसके लिए उन्हें बेहद सराहना मिली और वह एक सफल निर्देशक के रूप में पहचान बना लिए।

उन्होंने कई और महत्वपूर्ण फिल्में निर्देशित की हैं जैसे कि “लक्ष्य” (2004), “दोन” (2006), “रॉक ऑन!!” (2008) और “डिल धड़कने दो” (2011)। फरहान ने अभिनय में भी अच्छे प्रदर्शन किए हैं और उन्होंने कई फिल्मों में मुख्य भूमिकाओं में भी अभिनय किया है, जैसे कि “रॉक ऑन!!”, “दिल चाहता है”, “बख्तियार ख़लिद” (2006) और “करवाँ” (2018)।

फरहान अख़्तर का योगदान बॉलीवुड में सशक्त निर्देशकों और अभिनेताओं में से एक के रूप में है और उनका काम साहित्यिक और विशेषज्ञ दृष्टिकोण से भी माना जाता है।

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हिमा दास

हिमा दास भारतीय खेलों की एक प्रमुख एथलीट हैं, जो धावाक्षमता में अपने प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध हैं। वह हैमर थ्रो और जेवलिन थ्रो के लिए अपनी क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

हिमा दास का जन्म 9 जुलाई 2000 को भारतीय राज्य असम के नागाओं में हुआ था। उन्होंने अपने खेलकूद की कैरियर की शुरुआत फुटबॉल खेलते हुए की थी, लेकिन फिर उन्होंने धावाक्षमता में ध्यान केंद्रित किया।

हिमा ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 2016 में प्रदर्शन किया था। उन्होंने 2018 में जाकार्ता एशियाई खेलों में भारतीय टीम के साथ स्वर्ण पदक जीता और उनकी गतिविधियों ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई।

हिमा दास ने 2018 में एशियाई खेलों में जीते गए स्वर्ण पदक के बाद भारत में “धावा की रानी” कहलाने लगीं। उन्होंने 2018 के कील-स्टोन गेम्स में भी तीन स्वर्ण पदक जीते। हिमा ने 2019 में एथलेट ऑफ द ईयर अवार्ड प्राप्त किया और उन्होंने 2019 में भारतीय खेल के इतिहास में एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीता।

हिमा दास ने अपनी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्टता के लिए देशभर में पहचान बनाई है और वह एक प्रेरणा स्रोत के रूप में मानी जाती हैं।

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गीतकार व कवि क़मर जलालाबादी

क़मर जलालाबादी भारतीय गीतकार और कवि थे जो हिंदी सिनेमा में अपने शानदार गीतों के लिए प्रसिद्ध थे। उनका जन्म 1918 में हुआ था और उनका असली नाम स्येद हसन जलालाबादी था।

क़मर जलालाबादी ने अपने कैरियर की शुरुआत बॉम्बे (अब मुंबई) में 1940 के दशक में की और उन्होंने लगभग तीन दशकों तक गीतकारी की। उन्होंने कई हिट गाने लिखे हैं और उनका संबोधन शैलीबद्ध, जोरदार और भावनात्मक था।

कुछ क़मर जलालाबादी के मशहूर गाने हैं:

“Yeh Raat Bheegi Bheegi” – फिल्म: Ajanabee (1974)

“Mere Samne Wali Khidki Mein” – फिल्म: Padosan (1968)

“Chhup Gaye Saare Nazaare” – फिल्म: Do Raaste (1969)

“Tum Bin Jaoon Kahan” – फिल्म: Pyar Ka Mausam (1969)

“Yeh Jo Mohabbat Hai” – फिल्म: Kati Patang (1971)

क़मर जलालाबादी का योगदान हिंदी सिनेमा में अमर रहा है और उनकी कविताएँ और गीत आज भी सुने जा रहे हैं।

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