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मसाला नहीं औषधि भी है दालचीनी…

भारतीय संस्कृति की बात ही अनोखी है. इस अनोखी संस्कृति में जीवन जीने के तमाम उपाय दैनिक दिनचर्या में ही पूरा करते है. भारतीय खान-पान में मसाले का जिक्र ना हो ऐसा हो नहीं सकता है. मसाला सिर्फ गर्म मसाला नहीं है बल्कि शुद्ध औषधि भी है.

भारतीय घरों में मसालों की पोटली में किसी पेड़ की छाल भी रखी होती है जिसे हम सभी दालचीनी के नाम से जानते हैं. इसमें एक अलग खुशबु होती है जिसका, प्रयोग भारतीय व्यंजनों में प्रयुक्त मसालों के साथ-साथ आयुर्वेदिक औषधि व सुगंधित तेल बनाने में किया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम सिनामोन (Cinnamomum verum) है. इसके अन्य नाम तवाक, लवानगमू , डालोचाइनी. आयुर्वेद में दालचीनी की विस्तृत चर्चा की गई है.

आमतोर पर दालचीनी का पेड़ छोटा और सदाबहार होता है. इसकी उन्चाइन 10-15 मीटर होती है. दक्षिन भारत एवं श्रीलंका में बहुतायत रूप से मिलाता है. इसकी खेती उपजाऊ भूमि से दूर की जाती है. इसके वृक्षों का प्रसारण बीजों और कलमों से किया जाता है. वर्षा ऋतू में इसकी   छाल को उतार कर सुखाया जाता है. इतिहास के अध्ययन से पता चलता है कि, दालचीनी का निर्यात भारत हजारों सालों से करता आ रहा है.

दालचीनी में मनमोहक सुगंध के साथ एक मीठा-उष्म स्वाद होता है. यह शक्तिशाली रोगाणुरोधी एंटी-इन्फ्लेमेंटरी और एंटी-क्लोटिंग गुण होते हैं. यह एंटी-ओक्सिडेंट, पोलिफेनोल, मैंगनिज, आयरन, फाइबर और कैल्शियम के अलावा शर्करा, कार्बोहाइड्रेट, फैटी-एसिड और एमिनो एसिड का प्राकृतिक श्रोत माना जाता है. आमतौर पर दालचीनी दो प्रकार की होती है पहला  सीलोन दालचीनी  और दूसरा कैसिया दालचीनी.

  1. सीलोन दालचीनी को शुद्ध दालचीनी के रूप से जानते है.
  2. कैसिया दालचीनी – यह आमतौर पर मिलती है जिसका प्रयोग दैनिक जीवन में किया जाता है.

कहा जाता है कि, प्राचीन समय से ही दालचीनी का प्रयोग मसालों और दवाई में किया जा रहा है. प्राचीन काल में इसके गुण के कारण इसकी कीमत सोने से ज्यादा थी. आज भी आमलोग इसे गरीब आदमी का इन्सुलिन भी कहते हैं.

आयुर्वेदिक ग्रंथो व जानकारों के अनुसार दालचीनी का प्रयोग दूध, पानी (जल) या शहद के साथ चिकित्सक की सलाह पर कर सकते हैं. दालचीनी का प्रयोग अधिक मात्र में नहीं करना चाहिए. इसे थोड़ी-थोड़ी मात्र में प्रयोग करना चाहिए. आयुर्वेद के जानकार बताते हैं कि, घरों में आमतौर  पर दालचीनी वाली दूध पीनी चाहिए. जिसके कई फायदे होते हैं. दालचीनी वाली दूध पीने से गैस की समस्या से राहत मिलती है साथ ही पाचन क्रिया को ठीक करती व अच्छी नींद आती है. इसके पीने ब्लड शुगर कंट्रोल होता है. दालचीनी वाली दूध पीने से स्किन और इन्फेक्शन से बचाब करता है. गठिया के रोगियों को दालचीनी वाली दूध पीने से काफी आराम मिलता है.

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Cinnamon is not only a spice but also a medicine…

There is something unique about Indian culture. In this unique culture, all the ways to live life are fulfilled in daily routine. It is impossible that there is no mention of spices in Indian food. Masala is not just a hot spice but also a pure medicine.

In Indian homes, the bark of a tree is also kept in the spice bundle, which we all know by the name of cinnamon. It has a distinct aroma which is used in making spices used in Indian cuisine as well as Ayurvedic medicines and aromatic oils. Its scientific name is Cinnamon (Cinnamomum verum). Its other names are Tawak, Lawangmu, Dalchini. Cinnamon has been discussed in detail in Ayurveda.

Generally, the cinnamon tree is small and evergreen. Its height is 10-15 meters. It is found extensively in South India and Sri Lanka. Its cultivation is done away from fertile land. Its trees are propagated through seeds and cuttings. During the rainy season, its bark is removed and dried. A Study of history shows that India has been exporting cinnamon for thousands of years.

Cinnamon has a sweet-hot flavour with a pleasant aroma. It has powerful antimicrobial, anti-inflammatory and anti-clotting properties. Apart from antioxidants, polyphones, manganese, iron, fiber and calcium, it is considered to be a natural source of sugars, carbohydrates, fatty acids and amino acids. Generally, there are two types of cinnamon, Ceylon cinnamon and second is Cassia cinnamon.

  1. Ceylon cinnamon is known as pure cinnamon.
  2. Cassia Cinnamon – It is commonly available and is used in daily life.

It is said that cinnamon has been used in spices and medicines since ancient times. In ancient times, due to its qualities, its price was more than gold. Even today people call it poor man’s insulin.

According to Ayurvedic texts and experts, cinnamon can be used with milk, water or honey on the advice of a doctor. Cinnamon should not be used in excessive quantities. It should be used in small quantities. Ayurveda experts say that milk with cinnamon should generally be drunk in homes. Which has many benefits? Drinking milk with cinnamon provides relief from gas problem and also improves digestion and gives good sleep. Drinking this helps control blood sugar. Drinking milk with cinnamon protects from skin and infections. Arthritis patients get a lot of relief by drinking cinnamon milk.

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