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विचार…

रविवार 23 अप्रैल 2023, हिंदी पंचांग के अनुसार, वर्ष का दुसरा माह बैशाख है. तिथिनुसार, शुक्ल पक्ष की तृतीय है. हिदी पंचांग के अनुसार आज का दिन बड़ा ही पवन और पवित्र है. सनातन संस्कृति और उसके इतिहास में आज के दिन का महत्व का वर्णन स्कंद और भविष्य पुराण में विस्तार पूर्वक मिलता है.

सनातन धर्म, संस्कृति और इतिहास की बात आती है तब ऐतिहसिक नदियों की याद आती है. इन ऐतिहसिक नदियों में सरस्वती और सिन्धु नदी का भी नाम आता है. सिन्धु और सरस्वती के बगैर सनातन धर्म का कोई मतलब नहीं रह जाता है. इन नदियों के किनारे ही वैदिक धर्म और संस्कृति का जन्म हुआ. इन नदियों को प्रचीन नदी की संज्ञा दी गई है. पौराणिक ग्रन्थ वाल्मीकि रामायण में सिन्धु नदी को महानदी की संज्ञा दी गई है. इसी नदी के तट पर वैदिक धर्म या यूँ कहें कि सनातन धर्म और सभ्यता की नींव रखी गई थी.

पौराणिक ग्रन्थ ऋग्वेद में भी कई नद और नदियों का वर्णन मिलता है. ऋग्वेद के अनुसार सिन्धु की कई सहायक नदियाँ थी उनके नाम कुभा, सुवास्तु, कुमू ,गोमती के साथ-साथ इनकी सहायक नदियाँ वितस्ता, चन्द्रभागा, इरावती और शुतुद्री है. बताते चलें कि,  शुतुद्री एशिया की सबसे बड़ी उपनदी है और इनकी सहायक नदियाँ झेलम, चिनाब, राबी ,व्यास और सतलुज है.

मुझे (लेखक) समझ में यह नहीं आता है कि जब वैदिक या सनातन धर्म का जन्म पौराणिक नदी सिधु के तट पर हुआ तो इसे सिन्धुवासी ना कहकर हिन्दुवासी कहा जाता है. वहीँ, वर्तमान समय में कुछ देशों के लोग हिन्दवासी का प्रयोग करते हैं. पौराणिक ग्रन्थों में उल्लेखीत जिन नदियों का जिक्र आया है उनमे से तो कुछ विलुप्त हो गई या यूँ कहें कि विलुप्त के कगार पर खड़ी हैं. वहीँ, सनातनी नदी सिन्धु जो 3,600  किलोमीटर लम्बी और कई किलोमीटर चौड़ी नदी अरब सागर में जाकर मिल जाती थी.

बताते चलें कि, पौराणिक नदी सिन्धु नदी मानसरोबर (तिब्बत) से निकलकर हिमालय की दुर्गम कन्दराओं से गुजरती हुई कश्मीर और गिलगिट से होती हुई पकिस्तान में प्रवेश करती है और पकिस्तान के मैदानी इलाकों से गुजरती हुई अरब सागर में मिल जाती है. कभी यह सनातनी नदी मानसरोबर(तिब्बत) से निकलकर हिमालय की दुर्गम कन्दराओं से गुजरती हुई कश्मीर और गिलगिट से होती हुई कच्छ (गुजरात) से गुजरती हुई अरब सागर में मिलती थी.

देश चलाने वाले लोग अपनी निजी स्वार्थ के कारण इंसानी बस्तियों की जड़ों को बेदखल करते रहेंगें तो, नदी नाले, भवन, पर्वत और जंगल तो वहीँ रह जाते हैं लेकिन, सभ्यता और इतिहास का दफ़न हो जाता है. वहीँ कुछ लोग अपनी इतिहास और संस्कृति को बचाने के लिए काल की गति के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं लेकिन, वर्तमान समय में  कालचक्र अपनी गति से चलते हुए आज उस स्थान पर खड़ी हो गई है कि धरती और मानव समुदाय के अस्तित्व पर ही गहरा संकट छा गया है.

काल की गति ने समयानुसार कई धरती के अस्तित्व को बचाने के लिए कई महापुरुषों ने कई तरीकों  से धरती के अस्तित्व और मानव कल्याण के लिए कई पंथ बने और मानव सभ्यता टूटते बिखरते 21वीं सदी में प्रवेश कर गया. अँगुलियों के ईशारे पर ही संसार का अधिकतर काम हो जाता है. इस युग में मानव का अगर कोई दुश्मन है तो वो मानव ही है. मशीनों के साथ काम करते हुए आज का मानव मशीन ही बन गया है. इस युग में स्वार्थ और लालच की प्रथमिकता सबसे उपर है.

वर्तमान समय में मानव समुदाय कई भागों में विभक्त हो कर टूट के कगार पर पहुंच ‘गया है. कभी भारतीय परिवेश में रहने वाले लोग अपने परिवार को ‘संसार’ की संज्ञा देते थे वहीँ , आज का संसार’ एक अंगुली पर आकर सिमट गया है. कभी संसार  रूपी घर में सुख और दुःख की बाते होती थी और आज सुख और दुःख भी अंगुली पर ही सिमट गया है.

कभी भारतीय घरों में  जड़ी-बूटियों से हवन और मन्त्र सहित भक्ति गीत सुनाई पड़ती थी लेकिन, सुर, ताल ओर लय से दूर तेज आवाज में झूमते नजर आते हैं. बुजुर्ग एक कहावत का प्रयोग अक्सर ही करते हैं “ विनाश काले विपरीत बुद्धि “ . शायद यह कहावत आज वर्तमान समय के मानव पर ही चिरतार्थ होता दिख रहा है.

ज्ञानसागरटाइम्स के सभी पाठकों को बैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीय या यूँ कहें कि अक्षय तृतीय की हार्दिक शुभकामनाएं . 

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Idea…

Sunday 23 April 2023 According to Hindi Panchang, the second month of the year is Baisakh. According to the date, it is the third of Shukla Paksha. According to Hindi Panchang, today is a very auspicious and holy day. The importance of this day in Sanatan culture and its history is described in detail in Skanda and Bhavishya Purana.

When it comes to Sanatan Dharma, culture and history, historical rivers come to mind. The names of the Saraswati and Indus Rivers come from these historical rivers. Sanatan Dharma has no meaning without Sindhu and Saraswati. Vedic religion and culture were born on the banks of these rivers. These rivers have been given the noun of an ancient river. In the mythological text Valmiki Ramayana, the Indus River has been given the name of Mahanadi. On the banks of this river, the foundation of Vedic religion, or rather Sanatan Dharma and civilization was laid.

The description of many rivers and streams is also found in the mythological text Rigveda. According to Rigveda, there were many tributaries of the Indus, their names are Kubha, Suvastu, Kumu, and Gomti and seven of their tributaries are Vitasta, Chandrabhaga, Iravati, and Shutudri. Let us tell you that Shutudri is the largest tributary of Asia and its tributaries are Jhelum, Chenab, Rabi, Beas, and Sutlej.

I (the author) do not understand that when Vedic or Sanatan Dharma was born on the banks of the mythological river Indus, it is called Hindu and not Sindhu. At the same time, in the present time, people in some countries use the word Hindu. Some of the rivers that have been mentioned in the mythological texts have become extinct or rather they are standing on the verge of extinction. Wherein, Sanatani River Indus which is 3,600 kilometers long and several kilometers wide used to merge into the Arabian Sea.

Let us tell that, the mythical river Indus originates from Mansarovar (Tibet), passes through the inaccessible caves of the Himalayas, enters Pakistan via Kashmir and Gilgit and passes through the plains of Pakistan, and joins the Arabian Sea. Once upon a time, this Sanatani river used to emerge from Mansarovar (Tibet), passing through the inaccessible caves of the Himalayas, passing through Kashmir and Gilgit, passing through Kutch (Gujarat), and meeting in the Arabian Sea.

If the people running the country continue to evict the roots of human settlements due to their personal interests, then the rivers, drains, buildings, mountains, and forests remain there but, civilization and history get buried. On the other hand, some people mold themselves according to the speed of time to save their history and culture, but, in the present time, moving at its own pace, the time cycle has stood at that place today, which has a deep impact on the existence of the earth and the human community. The crisis is over.

In order to save the existence of many piles of the earth according to the speed of time, many great men have created many cults for the existence of the earth and human welfare in many ways and human civilization has entered the 21st century after breaking down. Most of the world’s work is done on the instructions of the fingers. In this era, if there is any enemy of humans, then it is human only. Today’s human has become a machine while working with machines. In this era, the priority of selfishness and greed is at the top.

At present, the human community has reached the verge of disintegration after being divided into many parts. Once upon a time people living in the Indian environment used to name their family as ‘world’ whereas, today’s ‘world’ has come down to one finger. Once upon a time, there used to be the talk of happiness and sorrow in the worldly house and today happiness and sorrow have also been limited to the finger.

Once upon a time, devotional songs with herbs and mantras were heard in Indian homes, but far from tune, rhythm, and rhythm, they are seen swinging in a loud voice. Elders often use the saying “Destruction is black opposite intelligence”. Perhaps this proverb seems to be eternal in the present-day human being.

Best wishes to all the readers of Gyansagartimes on the third day of Baisakh Shukla Paksha or rather Akshay Tritiya.

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