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भारतीय रेल का इतिहास…

भारतीय रेल विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है जबकि, एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क माना जाता है. 160 वर्षों से भी अधिक समय से भारत के परिवहन क्षेत्र का मुख्य घटक माना जाता है इसमें करीब 13 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. यह न केवल देश की मूल संरचना की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका दिखाता है अपितु बिखरे हुए क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने में और देश राष्ट्रीकय अखंडता का भी प्रचार करता है. राष्ट्रीय आपदा की स्थिति के दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने में भारतीय रेलवे की भूमिका अग्रणी रही है. यह देश की जीवनधारा है और सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल का महत्वपूर्ण स्थान है.

बताते चलें कि, एशिया महाद्वीप में पहली बार रेलगाड़ी वर्ष 1853 में मुम्बई और ठाने के बीच चली थी. इस रेलगाड़ी में ‘फाकलैंड’ नामक भाप इंजन लगा था जिसमें 14 डब्बे थे जिनमे 400 यात्री सवार थे. इस दिन मुम्बई में सावर्जनिक अवकाश घोषित किया गया था और रेलगाड़ी को 21 तोपों की सलामी दी गई थी. यह रेलगाड़ी दोपहर को मुम्बई के बोरीबंदर स्टेशन से 34 किलोमीटर दूर स्थित ठाने स्टेशन के लिए रवाना हुई थी. 34 किलोमीटर की दुरी तय करने में 75 मिनट का समय लगा था.

भारत में रेल की शुरुआत की कहानी अमेरिका में कपास की फसल से जुडी हुई है. बताते चलें कि, वर्ष 1846 में अमेरिका में कपास की फसल को भारी नुक्सान पहुंचा था जिसके कारण मैनचेस्टर और ग्लासगो की कपड़े किए मीलों को वैकल्पिक स्थान तलाश करने पर विवश होना पड़ा था. तब उनकी नजर भारत पर पड़ी और उपयुक्त स्थान भी नजर आया. इसके बाद ब्रिटिश सरकार को प्रशासनिक और सैन्य दृष्टि से भारत में रेलवे का विकास करना उचित लगा. इसके बाद लार्ड डलहौजी ने वर्ष 1843 में भारत में रेल चलाने की संभावना को तलाश करने का काम शुरू किया. इसके बाद वर्ष 1849 में ‘ग्रेट इंडियन पेनिन्यूसर कंपनी कानून’ पारित हुआ उसके बाद भारत में रेलवे की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ.

वर्ष 1843 में ब्रिटेन के जी०टी० क्लार्क (इंजीनियर) ने भारत में रेलवे की संरचना कार्य शुरू करने के लिए मुम्बई भेजा गया लेकिन, उनकी तैयार की गई योजना को तत्कालीन ब्रिटिश भारतीय सेना की एक समिति ने रद्द कर दिया था. उसके बाद ग्रेट इंडियन पेनिन्यूसर रेलवे के नाम से एक योजना पर कार्य आरंभ हुआ. वर्ष 1849 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने 35 मील लंबी परीक्षण लाइन बिछाने की अनुमति दी. वर्ष 1850 में मुम्बई से ठाने के बीच रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ और वर्ष 1852 के अंत में रेल पटरी बनकर तैयार हो गई. भारत में पहली रेलयात्रा 16 अप्रैल 1853 को शुरू की गई.

बताते चलें कि, दक्षिन भारत में मद्रास गारंटी रेलवे द्वारा 28 जून 1856 को पहली रेलगाड़ी रोयापुरम-वालाजाह रोड के बीच चली थी जबकि, उत्तर भारत में पहली रेलगाड़ी इलाहाबाद और कानपुर के बीच 03 मार्च 1859 को चली थी. शुरूआती दौर में जब भारत में रेलगाड़ी का सफ़र शुरू हुआ तब रेलगाड़ी में टॉयलेट नहीं होता था. करीब 55 सालों बाद “ओखिल चंद्रा” नामक एक रेल यात्री ने रेलवे को शिकायत भेजी उसके बाद वर्ष 1891 में पहली बार प्रथम श्रेणी में ट्रेन टॉयलेट का इस्तेमाल शुरू हुआ जबकि, निम्न श्रेणी में ट्रेन टॉयलेट का इस्तेमाल वर्ष 1907 से शुरू हुआ.

बताते चलें कि, पहली बार रेलगाड़ी चलाने की परिकल्पना वोलाटन (इंग्लैण्ड) में हुई थी. उस वक्त पटरियों पर लकड़ी के डब्बों की ट्रेन को वर्ष 1604 में घोड़ों ने खींचा था. उसके बाद “रिचर्ड ट्रिथविक” ने पहली बार भाप रेल इंजन का निर्माण किया और ट्रेन की गति 08 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती थी. उसके बाद “जॉर्ज स्टीवेंसन” ने परिष्कृत भाप इंजन बनाया जो 25 किलोमीटर की रफ्तार से चलती थी. उसके बाद 27 सितंबर 1825 को पहली बार भाप इंजन की सहायता से 38 रेल डब्बों को को खींचा गया. यह रेलगाड़ी डार्लिंगटन (लंदन) से स्टॉकटन तक 37 मील का सफर 14 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चली थी जिसमें 600 यात्री सवार थे.

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History of Indian Railways…

Indian Railways is the fourth largest rail network in the world, while it is considered to be the second largest rail network in Asia. For more than 160 years, it is considered to be the main component of India’s transport sector, in which more than 13 lakh employees work. It not only plays an important role in meeting the basic infrastructure requirements of the country but also in connecting the scattered areas together and the country also promotes national integration. Indian Railways has played a leading role in providing relief material to disaster-affected areas during national calamities. It is the lifeline of the country and Indian Railways has an important place in the socio-economic development.

Let us tell you that, for the first time in the continent of Asia, the train ran between Mumbai and Thane in the year 1853. This train had a steam engine named ‘Falkland’ which had 14 coaches carrying 400 passengers. On this day a public holiday was declared in Mumbai and the train was given a 21-gun salute. This train left in the afternoon for Thane station, located 34 kilometers away from Mumbai’s Bori Bunder station. It took 75 minutes to cover the distance of 34 km.

The story of the beginning of rail in India is related to the cotton crop in America. Let us tell you that, in the year 1846, the cotton crop in America was severely damaged, due to which the cloth mills of Manchester and Glasgow were forced to find an alternative place. Then his eyes fell on India and a suitable place was also seen. After this, the British government found it appropriate to develop railways in India from administrative and military points of view. After this, in the year 1843, Lord Dalhousie started the work of exploring the possibility of running railways in India. After this, in the year 1849, the ‘Great Indian Peninuser Company Act’ was passed, after which the way was paved for the establishment of railways in India.

In the year 1843, Britain’s GT Clark (engineer) was sent to Mumbai to start the construction work of railways in India, but his prepared plan was canceled by a committee of the then British Indian Army. After that work started on a plan named Great Indian Peninsular Railway. In the year 1849, the East India Company gave permission to lay a 35-mile-long test line. In the year 1850, the work of laying the railway line between Mumbai and Thane started and at the end of the year 1852, the railway track was ready. The first train journey in India was started on 16 April 1853.

Let us tell you that, the first train ran between Royapuram-Walajah road on 28 June 1856 by the Madras Guarantee Railway in South India, while the first train in North India ran between Allahabad and Kanpur on 03 March 1859. In the early days, when the train journey started in India, there was no toilet on the train. About 55 years later, a railway passenger named “Okhil Chandra” sent a complaint to the Railways, after which the use of train toilets started in the first class for the first time in the year 1891, while the use of train toilets in the lower class started from the year 1907.

Let us tell you that, for the first time, the idea of running a train was conceived in Wollaton (England). At that time the train of wooden boxes on the tracks was pulled by horses in the year 1604. After that “Richard Trithwick” built a steam rail engine for the first time and the speed of the train used to run at a speed of 08 kilometers per hour. After that “George Stevenson” made a sophisticated steam engine that ran at a speed of 25 kilometers. After that, on 27 September 1825, for the first time, 38 rail coaches were pulled with the help of a steam engine. This train traveled 37 miles from Darlington (London) to Stockton at a speed of 14 miles per hour, carrying 600 passengers.

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