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कंप्यूटर से संबंधित – 03.

यूनिकोड क्या है ?

You must know that computer cannot understand different languages like us. It can only understand binary numbers (0 and 1). That’s why whatever letters we type are ultimately converted into 0 and 1 only then the computer can understand them. The rules for determining which number will be used for which word of which language are determined by various character-sets or encoding systems. They store letters and characters by assigning a number to each letter and character. Before Unicode was invented, there were hundreds of different encoding systems for assigning such numbers. No one encoding has enough characters. For example, the European Union alone requires different notation scripts to store the characters for all its languages. Even for a language like English, a single notation was not sufficient for all the letters, punctuation marks, and technical symbols in common use.

There is no coordination among these sign scripts. Therefore, two encoding scripts may use the same number for two different letters, or different numbers for the same letter. Any computer requires various signal scripts; Yet when data is sent between two different encodings or platforms, there is always a risk of data corruption.

Birth of Unicode: To overcome the above problems, Unicode was born. As it is clear from its name that it works in the same way for all languages. Unicode assigns a unique number to each character, whatever the platform, whatever the program, whatever the language. The Unicode standard has been adopted by industry leading companies such as Apple, HP, IBM, Just Systems, Microsoft, Oracle, SAP, Sun, Sybase, Unisys, and many others.

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आप जानते ही होंगे कि, कंप्यूटर हमारी तरह विभिन्न भाषाऐं नहीं समझ सकता. यह केवल बायनरी नंबरों ( 0 और 1) को ही समझ सकता है. इसलिये हम जो भी अक्षर टाइप करते हैं वह अंतत: 0 और 1 में ही परिवर्तित किये जाते हैं तभी कंप्यूटर उन्हे समझ पाता है. किस भाषा के किस शब्द के लिये कौन सा नम्बर प्रयुक्त होगा इसका निर्धारण करने के नियम विभिन्न कैरेक्टर-सैट (character-set) या संकेत-लिपि प्रणाली (encoding systems) द्वारा निर्धारित होते हैं. ये प्रत्येक अक्षर और वर्ण के लिए एक नंबर निर्धारित करके अक्षर और वर्ण संग्रहित करते हैं. यूनिकोड का आविष्कार होने से पहले, ऐसे नंबर देने के लिए सैंकडों विभिन्न संकेत लिपि प्रणालियां थीं.किसी एक संकेत लिपि में पर्याप्त अक्षर नहीं है. उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ को अकेले ही, अपनी सभी भाषाओं के अक्षरों को संग्रहित करने के लिये विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है. यहां तक कि अंग्रेजी जैसी भाषा के लिए भी, सभी अक्षरों, विरामचिन्हों और सामान्य प्रयोग के तकनीकी प्रतीकों हेतु एक ही संकेत लिपि पर्याप्त नहीं थी.

इन संकेत लिपियों में आपस में तालमेल भी नहीं है. इसीलिए, दो संकेत लिपियां दो विभिन्न अक्षरों के लिए, एक ही नंबर प्रयोग कर सकती हैं, अथवा समान अक्षर के लिए विभिन्न नम्बरों का प्रयोग कर सकती हैं. किसी भी कम्प्यूटर को विभिन्न संकेत लिपियों की आवश्यकता होती है; फिर भी जब दो विभिन्न संकेत लिपियों अथवा प्लैटफॉर्मों के बीच डाटा भेजा जाता है तो उस डाटा के हमेशा खराब होने का जोखिम रहता है.

युनिकोड का जन्म : उपरोक्त समस्याओं को दूर करने के लिये ही युनिकोड को जन्म दिया गया.जैसा इसके नाम से से ही स्पष्ट है कि यह यह सभी भाषाओं के लिये एक ही तरह से काम करता है. यूनिकोड, प्रत्येक अक्षर के लिए एक विशेष नंबर प्रदान करता है, चाहे कोई भी प्लैटफॉर्म हो, चाहे कोई भी प्रोग्राम हो, चाहे कोई भी भाषा हो. यूनिकोड स्टैंडर्ड को ऐपल, एच.पी., आई.बी.एम., जस्ट सिस्टम, माईक्रोसॉफ्ट, औरेकल, सैप, सन, साईबेस, यूनिसिस जैसी उद्योग की प्रमुख कम्पनियों और कई अन्य ने अपनाया है.

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