कई बीमारियों की एक दवा… - Gyan Sagar Times
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कई बीमारियों की एक दवा…

मानसून के आगमन के साथ ही बाजार में काले जामुन दिखने लगते हैं. जामुन का फल ही नहीं, इस वृक्ष के जड से लेकर पत्ती तक उपयोगी होता है. इसका वैज्ञानिक नाम  (Syzygium cumini) है. यह एक सदाबहार वृक्ष होता है, इसके  फल  बैंगनी रंग के होते हैं. यह वृक्ष भारतएवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं  में भी पाया जाता है. जामुन का पेड़ आम के पेड़ की ही तरह काफी बड़ा लगभग 20 से 25 मीटर ऊंचा होता है और इसके पत्ते 2 से 6 इंच तक लम्बे व 2 से 3 इंच तक चौड़े होते हैं. जामुन के पेड़ की छाल का रंग सफेद भूरा होता है. इसके पत्ते आम और मौलसिरी के पत्तों के ही जैसे होते हैं. जामुन के पेड़ की उम्र लगभग सैकडों साल बतायी गयी है. आमतौर पर जामुन के पेड़ में बीमारी कम से कम होती हैं. जामुन के फूल अप्रैल के महीने में लगते हैं, और जुलाई से अगस्त तक जामुन का फल पक जाता हैं. इसके कच्चे फल का रंग हरा और पका फल बैगनी, नीला, काला और अन्दर से गाढ़ा गुलाबी होता है.

इसका स्वाद अम्लीय व कसैला और मीठा होता है. अम्लीय प्रकृति के कारण सामान्यत: इसे नमक के साथ ही खाया जाता है. जामुन का फल 70 प्रतिशत तक खाने योग्य होता है.इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं. इस फल में खनिजों की मात्रा अधिक होती है, अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है. एक मध्यम आकार का जामुन 3-4 कैलोरी ही देता है. इसमें विटामिन बी, कैरोटिन, मैग्नीशियम और फाइबर भी पाए जाते हैं. जामुन में लौह व फास्फोरस प्रचुर मात्रा में होता है. जामुन में कोलीन तथा फोलिक एसिड भी होता है. इस फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम की अधिकता होती है, साथ ही इसमें ग्लुकोसाइड, जम्बोलिन, फेनोलयुक्त पदार्थ, पीलापल लिए सुगन्धित तेल की भी काफी मात्रा में होती है.

प्राचीनकाल में अधिकतर जामुन के वृक्ष तालाब और बावडियों के पास इसलिए लगाये जाते थे, कि  इनकी जडें काफी गहराई तक चली जाती हैं जिससे तालाब के पानी को शुद्ध रखने में मदद करती हैं. गांव में कुआं बनाते समय नींव में जामुन के लकड़ी का ही उपयोग किया जाता था. जामुन की लकडी जल को शुद्ध करने का काम करती है और जल को खराब होने से बचाती है. जामुन का वृक्ष आंधी में भी नहीं गिरता इसलिए बाग के चारों ओर इसके वृक्ष लगाये जाते हैं. जामुन का अधिक मात्रा में सेवन करने से  गैस,  बुखार,  सीने का दर्द,  कफवृद्धि व वात विकारों के रोग भी हो सकते हैं. जामुन को हमेशा खाना खाने के बाद ही खाना चाहिए. जामुन खाने के तुरन्त बाद दूध नहीं खाना चाहिए. कालानमक, कालीमिर्च और सोंठ का चूर्ण छिड़ककर खाने से उसके सारे दोष दूर हो जाते हैं.

  • जमुन को मधुमेह के बेहतर उपचार के तौर पर जाना जाता है.
  • पाचनशक्ति मजबूत करने में जामुन काफी लाभकारी होता है.
  • यकृत(लिवर) से जुड़ी बीमारियों के बचाव में जामुन रामबाण साबित होता है.
  • अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसरगुण होता है.
  • कीमोथेरेपीऔर रेडिएशन में जामुन लाभकारी होता है.
  • हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना औरअर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है.
  • जामुन का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं.
  • जामुन का जूस पाचनशक्ति को बेहतर करने में सहायक होता है.
  • जामुन के पेड़ की छाल और पत्तियां रक्तचाप को नियंत्रित करने में कारगर होती हैं.

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