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योगी अनंत शिव…

सावन का पावन और पवित्र महीना अपने आखरी पडाव की ओर अग्रसर है. इस पावन और पवित्र महीने में भगवान शिव, रूद्र  भोलेनाथ, औघरदानी, आशुतोष की पूजा अर्चना की जाती है. एक ऐसे भगवान जिनके कई नाम हैं और हर नाम की अलग-अलग विशेषता है जैसे रूद्र. रूद्र का अर्थ होता है रोनेवाला, उसी  प्रकार उनका एक नाम है शिव. वैसे तो देखा जाय तो शिव की विवेचना ज्ञानी लोग अपने-अपने तरीके से करते हैं. आखिर शिव का अर्थ है क्या? तार्किक दृष्टिकोण हो या वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से भी देखते है तो भी शिव का अर्थ और उसके मायने भी एक ही होते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि, शिव का अर्थ होता है “ जो नहीं है” या यूँ कहें कि, इसका अस्तित्व नहीं है, धुंधला है या अपारदर्शी है.

अगर हम सभी हिन्दू परम्परा की बात करें तो भगवान शिव त्रिदेवों में एक देव हैं और इन्हें देवों के देव महादेव के भी नाम से जानते हैं. वेद के अनुसार इनका नाम रूद्र भी है, वहीं ऋग्वेद में जहां सूर्य, वरुण, वायु, अग्नि, इंद्र आदि प्राक्रतिक शक्तियों की उपासना की जाती है वहीं ‘रूद्र’ का भी उल्लेख किया गया है. सागर मंथन से पहले भगवान शिव को रूद्र के नाम से जाना जाता था. रूद्र जिन्हें विनाशकारी शक्तियों के प्रतीक के रूप में गौण देवता माने जाते थे, लेकिन सागर मंथन के बाद रूद्र नये रूप में शिव बने. शिव का विचित्र अमंगल स्वरूप दुसरे देवताओं से अलग है. शिव जो कि, नंग-धडंग, शरीर पर राख लपेटे या मले हुए, जटाजूटधारी, सर्प लपेटे, गले में हडडीयों एवं नरमुंडों  की माला पहने, हाथों में त्रिशूल व डमरू, माथे पर एक और आँख, सिर पर चन्द्रमा को धारण किये हुए और उनका वाहन नंदी तथा गण भूत, प्रेत या पिशाच.

ऐसे अबधूत रूप के धनी जिन्हें औघरदानी भी कहा जाता है और जो सबके लिए सुगम्य चाहे वो, देव हों या दानव. ऐसे अदभुत स्वरूप के स्वामी जो कई प्रकार के चिन्हों का प्रयोग करते है और हर चिन्ह के अपने-अपने महत्व हैं. भगवान शिव को त्रयंबक भी कहा जाता है, आमतौर पर देव हों या दानव उनकी दो ही आँख होती है लेकिन, भगवान शिव की तीसरी आँख भी है. जिस प्रकार दो आँखों से भौतिक पदार्थों को ही देख सकते है उसी प्रकार तीसरी आँख का मतलब होता है ‘बोध’. ‘बोध’ का अर्थ होता है ऊर्जा को विकसित करना या यूँ कहें कि, अपने स्तर को ऊँचा करना. शिव के कई नाम हैं उन्हें सोम या सोमसुंदर भी कहा जाता है. सोम का एक और अर्थ होता है चंद्रमा वैसे तो सोम का अर्थ होता है नशा. पुरानों में चंद्रमा को नशे का श्रोत भी कहा गया है. नशा सिर्फ बाहरी पदार्थों से नहीं होता है लेकिन, जो अपने आप में मदमस्त हो या यूँ कहें कि, जो जीवन की प्रक्रियाओं में मदमस्त रहता हो. पूर्णिमा की रात्री को जब चंद्रमा अपने पूर्ण आकर में हो तो उसकी शीतल किरने भी मदमस्त लगती है. अगर पूर्णिमा की रात्री में चंद्रमा को एक टक से निहारते हैं तो धीरे-धीरे सुरूर चढने लगता है.

भगवान शिव का वाहन नंदी है. आखिर नंदी का अर्थ क्या होता है? पुरानों के अनुसार नंदी का अर्थ होता है प्रतीक्षा या यूँ कहे अनंत प्रतीक्षा. हिन्दू परम्परा या संस्कृति में इन्तजार करना सबसे बड़ा गुण माना जाता है. इन्तजार जो चुपचाप बैठकर किया जाय और उम्मीद हो कि कल ‘वो’ आ जायेंगें. भगवान शिव के सबसे करीबी नंदी हैं चूकिं नंदी में एक गुण है “ग्रहणशीलता” का. आमतौर पर जब हम सभी मन्दिर जाते हैं तो हमारे बुजुर्ग कहते हैं कि, मन्दिर के अंदर शांत और सजग होकर बैठना चाहिए. चूकिं यह गुण सिर्फ और सिर्फ नंदी में ही था.

पुरानों में शिव को योगी व अनंत भी कहा गया है और उनके हाथों में हमेशा एक त्रिशूल होता है. त्रिशूल जो जीवन के तीन मूल आयाम है यह उसी को दर्शाता है. त्रिशूल में तीन कोण होते हैं उन्हें इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना भी कहते हैं. ये तीनों प्राणमय कोष मानव तंत्र के तीन मुलभुत नाड़ियाँ हैं जिसे हम सभी बाईं, दाहिनी और मध्य के नाम से जानते हैं. मानव शरीर में इन तीन नाड़ियों से प्राणवायु का संचार होता है. भगवान शिव के गले में सर्प की माला होती है. योग में कुंडलिनी का वर्णन होता है, और सर्प को कुंडलिनी का प्रतीक भी माना जाता है. कुंडलिनी का अर्थ होता है ऊर्जा. अगर ऊर्जा स्थिर हो तो उसका पता नहीं चलता है और उसे जाग्रत कर दिया जाय तो उसके स्वरूप का अहसास होता है.

भगवान शिव के मूल मंत्र में पांच मन्त्रों का समायोजन है, जिसे पंचाक्षर भी कहा जाता है. प्रकृति में मौजूद पांच तत्वों के प्रतीक को ही पंचाक्षर माना जाता है. जिस प्रकार मानव शरीर में पांच द्वार कहे गये है और पाँचों द्वार की शुद्धि की जाती है, और इन पांच केन्द्रों को जगाकर योग क्रिया की जाती है. पुरानों के अनुसार भगवान शिव एक लोटे जल और एक वेलपत्र से खुश या प्रसन्न हो जाते हैं. आखिर विल्वपत्र या वेल पत्र शिव को इतना प्रिय क्यों है? पुरानों के अनुसार बेल के वृक्ष को सम्पूर्ण सिद्धियों का आश्रय स्थल भी कहा जाता है. चूकिं बेलपत्र को भगवान शिव के त्रिनेत्र रूप का प्रतीक भी माना जाता है या यूँ कहें कि, इसकी तीन पत्तियों को सत्व, रज और तम के रूप में भी जाना जाता है. बेल के वृक्ष के नीचे स्त्रोत या जप करने से उसका फल अनंत गुना बढ़ जाता है.

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Yogi Anant Shiva…

The auspicious and holy month of Sawan is moving towards its last stage. Lord Shiva, Rudra Bholenath, Aughardani, and Ashutosh are worshiped in this holy month. A God has many names and each name has different characteristics like Rudra. Rudra means one who weeps, similarly one of his names is Shiva. By the way, wise people discuss Shiva in their own way. After all, what is the meaning of Shiva? Whether it is from a logical point of view or from a scientific point of view, even then the meaning and meaning of Shiva are the same. Some people say that the meaning of Shiva is “that which is not” or rather it does not exist, it is blurred or opaque.

If we talk about all the Hindu traditions, then Lord Shiva is one of the three Gods and is also known by the name of Mahadev, the God of Gods. According to Vedas, his name is also Rudra, while in Rigveda, where natural powers like Surya, Varuna, Vayu, Agni, Indra, etc. are worshipped, ‘Rudra’ is also mentioned. Before the churning of the ocean, Lord Shiva was known as Rudra. Rudra was considered a minor deity as a symbol of destructive powers, but after the churning of the ocean, Rudra became Shiva in a new form. The strange inauspicious form of Shiva is different from other deities. Shiva who is naked, covered with ashes or smeared with ashes, wrapped in cobwebs, wrapped in snakes, wearing a garland of bones and narmunds around his neck, Trishul and damru in his hands, one eye on his forehead, holding the moon on his head and His vehicle is Nandi and Gana Bhoota, Pret or Pishacha.

Rich in the form of an about who is also known as Aughardani and who is accessible to everyone, be it a god or a demon. Lord of such a wonderful form who uses many types of symbols and each symbol has its own importance. Lord Shiva is also called Trayambaka, generally, gods or demons have only two eyes, but Lord Shiva also has a third eye. Just as with two eyes, only material things can be seen, in the same way, the meaning of the third eye is ‘perception’. The meaning of ‘realization’ is to develop energy or to say that, to raise your level. Shiva has many names, he is also called Som or Somasundar. Another meaning of Som is Moon, whereas Som means intoxication. Moon has also been called the source of intoxication in Puranas. Intoxication is not caused by external substances only, but by the one who is intoxicated in himself or rather, who remains intoxicated in the processes of life. On the full moon night, when the moon is in its full form, its cool rays also seem intoxicating. If you look at the moon with a glance on the night of the full moon, then slowly it starts rising.

Nandi is the vehicle of Lord Shiva. After all, what is the meaning of Nandi? According to the Puranas, the meaning of Nandi is waiting or it can be said infinite waiting. In Hindu tradition or culture, waiting is considered the greatest virtue. The wait that should be done sitting quietly and hoping that ‘he’ will come tomorrow. Nandi is closest to Lord Shiva because Nandi has a quality of “receptiveness”. Usually, when we all go to the temple, our elders say that we should sit quietly and alert inside the temple. Because this quality was only and only in Nandi.

In Puranas, Shiva has also been called Yogi and Anant and always has a Trishul in his hands. The Trishul represents the three basic dimensions of life. Trishul has three angles, they are also called Ida, Pingala, and Sushumna. These three pranamaya koshas are the three basic nadis of the human system, which we all know by the name of left, right, and middle. In the human body, the circulation of vital air takes place through these three nadis. Lord Shiva has a garland of snakes around his neck. Kundalini is described in yoga, and the snake is also considered a symbol of Kundalini. Kundalini means energy. If the energy is stable then it is not detected and if it is awakened then its form is realized.

There is a combination of five mantras in the original mantra of Lord Shiva, which is also known as Panchakshar. Panchakshar is considered to be the symbol of the five elements present in nature. Just as there are five doors in the human body purification of all five doors is done, and by awakening these five centers yoga is done. According to the Puranas, Lord Shiva becomes happy or pleased with a glass of water and a Velpatra. After all, why is Vilvapatra or Vel Patra so dear to Shiva? According to the Puranas, the Bael tree is also called the shelter of complete achievements. Since belpatra is also considered to be the symbol of the Trinetra form of Lord Shiva or rather its three leaves are also known as Sattva, Raja, and Tama. By reciting a source or chanting under a Bael tree, its fruit increases infinitely.

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