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कहाँ गए वो दिन..?

भाग – 05.

वर्ष 2026 की होली से एक दिन पहले बिहार की राजनीति परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा देने और राज्यसभा जाने की घोषणा की. उन्होंने आपने सोशल मीडिया पोस्ट पर राज्य सभा जाने की हार्दिक इच्छा के बारे में बताया साथ ही उन्होंने कहा कि, वह संसद के दोनों सदनों का सदस्य बनना चाहते थे. समाजवादी आंदोलन और लोहिया विचारधारा से प्रेरित नीतीश कुमार ने न केवल बिहार की राजनीति को एक नई दिशा दी, बल्कि अपनी अटूट राजनीतिक कुशलता से कई तूफानों को पार किया और खुद को सत्ता के केंद्र में बनाए रखा.

नीतीश कुमार का जन्म एक मार्च 1951 को बिहार के नालंदा जिले के बख्तियारपुर गाँव के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. वो एक इंजीनियर होने के बावजूद भी उन्होंने राजनीति को अपना कैरियर चुना. समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया के विचारों से प्रभावित थे नीतीश कुमार. वर्ष 1974 के जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद , वे वर्ष 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए . वर्ष 1989 में वे पहली बार लोकसभा सांसद बने और फिर वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं. उनके राजनीतिक जीवन की यह शुरुआती पड़ाव एक कुशल प्रशासक के रूप में उनकी छवि को गढ़ने वाला था. इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की कोशिस करना…

संकलन:         –       ज्ञानसागरटाइम्स टीम.

होस्ट:                  –  आजाद शक्ति,

अतिथि:               –  संजय कुमार सिंह और डॉ. अमरेंद्र कुमार.

Video Link:   –    https://youtu.be/cQW3c5rYbRM

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