Dharm

सुन्दरकाण्ड-12-1…

…समुन्द्र के इस पार आना, सबका लौटना, मधुवन प्रवेश-1…

चौपाई :-

जौं न होति सीता सुधि पाई। मधुबन के फल सकहिं कि खाई।।

एहि बिधि मन बिचार कर राजा। आइ गए कपि सहित समाजा।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, यदि सीताजी की खबर न पाई होती तो क्या वे मधुवन के फल खा सकते थे ? इस प्रकार राजा सुग्रीव मन मे विचार कर ही रहे थे कि समाज सहित वानर आ गए.

आइ सबन्हि नावा पद सीसा। मिलेउ सबन्हि अति प्रेम कपीसा।।

पूँछी कुसल कुसल पद देखी। राम कृपाँ भा काजु बिसेषी।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, सबने आकर सुग्रीव के चरणो से सिर नवाया. कपिराज सुग्रीव सभी से बड़े प्रेम के साथ मिले और उन्होने कुशल पुछी, तब वानरो ने उत्तर दिया कि – आपके चरणों के दर्शन से सब कुशल है. श्रीरामजी की कृपा से विशेष कार्य में  विशेष सफलता मिली है.

नाथ काजु कीन्हेउ हनुमाना। राखे सकल कपिन्ह के प्राना।।

सुनि सुग्रीव बहुरि तेहि मिलेऊ। कपिन्ह सहित रघुपति पहिं चलेऊ।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, हे नाथ ! हनुमान ने सब कार्य किया और सब वानरो के प्राण बचा लिए. यह सुनकर सुग्रीव जी हनुमानजी से फिर मिले और सब वानरो समेत श्रीरघुनाथजी के पास चले.

राम कपिन्ह जब आवत देखा। किएँ काजु मन हरष बिसेषा।।

फटिक सिला बैठे द्वौ भाई। परे सकल कपि चरनन्हि जाई।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, श्रीरामजी ने जब वानरो को कार्य किए हुए आते देखा तब उनके मन मे विशेष हर्ष हुआ. दोनो भाई स्फटिक शिला पर बैठे थे. सब वानर जाकर उनके चरणो पर गिर पड़े.

दोहा :-

प्रीति सहित सब भेटे रघुपति करुना पुंज।

पूँछी कुसल नाथ अब कुसल देखि पद कंज।।

श्लोक का अर्थ बताते हुए महाराजजी कहते है कि, दया के सागर श्रीरघुनाथजी सबसे प्रेम सहित गले लगकर मिले और  कुशल पूछी.  वानरो ने कहा – हे नाथ ! आपके चरण कमलो के दर्शन पाने से अब कुशल है.

वालव्याससुमनजीमहाराज,

 महात्मा भवन,

श्रीरामजानकी मंदिर,

राम कोट, अयोध्या.

Mob: – 8709142129.

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…Samundr Ke Is Paar Aana, Sabaka Lautana, Madhuvan Pravesh-1…

Choupai:-

Jaun Na Hoti seeta Sudhi Paee। Madhuban Ke Phal Sakahin Ki Khaee।।

Ehi Bidhi Man Bichaar Kar Raaja। Aai Gae Kapi Sahit Samaaja।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that, if he had not received the news of Sitaji, would he have been able to eat the fruits of Madhuvan? In this way, King Sugriva was thinking in his mind that the monkeys came along with society.

Aai Sabanhi Naava Pad Seesa। Mileu Sabanhi Ati Prem Kapeesa।।

Poonchhee Kusal Kusal Pad Dekhee।Raam Krpaan Bha Kaaju Biseshee।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that everyone came and bowed their heads at the feet of Sugriva. Kapiraj Sugreev met everyone with great love and asked about their well-being, then the monkeys replied that everyone is well after seeing their feet. With the grace of Shriramji, there has been special success in a special work.

Naath Kaaju Keenheu Hanumaana। Raakhe Sakal Kapinh Ke Praana।।

Suni Sugreev Bahuri Tehi Mileoo। Kapinh Sahit Raghupati Pahin Chaleoo।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says, O Nath! Hanuman did all the work and saved the lives of all the monkeys. Hearing this, Sugriv ji met Hanumanji again and went to Shrirghunathji along with all the monkeys.

Ram Kapinh Jab Aavat Dekha। Kien Kaju Man Haresh Bisesha।।

Phatik Sila Baithe Dvau Bhaee। Pare Sakal Kapi Charananhi Jaee।।

Explaining the meaning of the verse, Maharajji says that, when Shri Ramji saw the monkeys coming after doing the work, he was very happy. Both the brothers were sitting on the crystal rock. All the monkeys went and fell at his feet.

Doha…

Preeti Sahit Sab Bhete Raghupati Karuna Punj।

Poonchhee Kusal Naath Ab Kusal Dekhi Pad Kanj।।

Describing the meaning of the verse, Maharajji says that Shrirghunathji, the ocean of mercy, met everyone with a hug with love and inquired about his well-being. The monkeys said – O Nath! By having darshan of your lotus feet, he is now well.

Walvyassumanji Maharaj,

 Mahatma Bhawan,

Shriramjanaki Temple,

Ram Kot, Ayodhya.

Mob:- 8709142129.

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