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याद आते वो पल-181.

  1. सवाई जयसिंह: – आज ही के दिन वर्ष 1688 में सवाई जयसिंह का जन्म आमेर में हुआ था. उनके पिता का नाम राजा बिशनसिंह और माता का नाम इन्द्रकुंवरी (राठौड़ रानी ) था. सवाई जयसिंह का वास्तविक नाम विजयसिंह था जबकि उनके छोटे भाई का नाम जयसिंह था. सवाई जयसिंह को जयसिंह द्वितीय’ के नाम से भी जाना जाता है. जयसिंह ने बचपन में ही अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय देकर औरंगज़ेब जैसे कूटनीतिज्ञ और कट्टर बादशाह को भी प्रभावित कर दिया था. औरंगज़ेब की मृत्यु हो और मुग़ल साम्राज्य में अव्यवस्था व्याप्त थी, इसी समय जयसिंह ने अपना बग़ावत का झंडा बुलन्द कर दिया था. सवाई जयसिंह ने 44 वर्षों तक आमेर पर शासन किया था. सवाई जयसिंह संस्कृत और फ़ारसी भाषा का विद्वान होने के साथ गणित और खगोलशास्त्र के असाधारण ज्ञाता थे.
  2. ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की स्थापना: – आज ही के दिन वर्ष 1838 में ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की स्थापना ब्रिटिश राज के दौरान ‘बम्बई टाइम्स’ और ‘जर्नल ऑफ़ कामर्स’ के रूप में स्थापित किया गया था. वर्ष 1861 में ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ नाम दिया गया था.
  3. कर्नाटक गायिका, सांस्कृतिक कार्यकर्ता, विद्वान और देवदासी बैंगलोर नागरत्नम्मा: – आज ही के दिन वर्ष 1878 को कर्नाटक गायिका, सांस्कृतिक कार्यकर्ता, विद्वान और देवदासी बैंगलोर नागरत्नम्मा का जन्म नंजनगुड में हुआ था. उनके पिता का नाम सुब्बा राव जो कि वकील थे और उनकी माता का नाम पुतु लक्ष्मी था. बताते चलें कि, पुत्तु लक्ष्मी के पूर्वज मैसूर के दरबार में गायक और संगीतकार के रूप में काम करते थे. नागरत्नम्मा को उनके पिता सुब्बा राव द्वारा त्याग दिए जाने पर, उन्हें मैसूर महाराजा के दरबार में एक संस्कृत विद्वान शास्त्री के अधीन आश्रय मिला और उन्होंने नागरत्नम्मा को संस्कृत और संगीत की शिक्षा दी. नागरत्नम्मा की उम्र 05 वर्ष होने के बाद उन्हें देवदासी की शिक्षा दी गई थी. नागरत्नम्मा ने तिरुवैयारु में कर्नाटक गायक त्यागराज की समाधि पर एक मंदिर बनवाया और उनकी स्मृति में त्यागराज आराधना उत्सव की स्थापना में मदद की. नागरत्नम्मा अपने जीवन के आरंभ में एक गायिका बन गईं और अपने समय की सर्वश्रेष्ठ कर्नाटक गायिकाओं में से एक बनकर उभरीं थी. वह “भारत में देवदासी परंपरा के अंतिम अभ्यासकर्ताओं में से थीं साथ ही वो मद्रास प्रेसीडेंसी के देवदासी संघ की पहली अध्यक्ष थीं.
  4. मुख्य न्यायाधीश सर हरिलाल जे कनिया: – आज ही के दिन वर्ष 1890 में मुख्य न्यायाधीश सर हरिलाल जे कनिया का जन्म सूरत, (अविभाजित भारत) के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम जे किसुनदास था जो कि शामलदास कॉलेज में पहले संस्कृत प्राध्यापक रहे और फिर बाद में प्रधानाचार्य के रूप में काम करते थे. कनिया ने वर्ष 1910 में सामलदास कॉलेज से बी.ए. किया। उसके बाद वर्ष 1912 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से एलएलबी और वर्ष 1913 में उसी संस्थान से एलएलएम किया था. वर्ष 1915 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में बैरिस्टर के रूप में प्रैक्टिस शुरू की थी. कनिया इंडिया लॉ रिपोर्ट्स के कार्यकारी सम्पादक थे. वर्ष 1930 में कुछ वक़्त के लिए वह बम्बई उच्च न्यायालय में कार्यकारी न्यायाधीश बने और जून 1931 में वह उसी न्यायालय में उच्च न्यायाधीश पद पर नियुक्त हुए। यह पद उन्होने वर्ष 1933 तक सम्भाला था. देश की आजादी के बाद एच. जे. कनिया देश के सर्वोच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश बने थे.
  5. अभिनेता पृथ्वीराज कपूर: – आज ही के दिन वर्ष 1906 में अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का जन्म समुंद्री, पाकिस्तान में हुआ था. उनके पिता का नाम दीवान बशेस्वरनाथ कपूर जो कि पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर थे. पृथ्वीराज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लायलपुर और लाहौर (पाकिस्तान) से की थी. उन्होंने आगे की पढ़ाई पेशावर के एडवर्ड कॉलेज से की थी. पृथ्वीराज कपूर वर्ष 1928 में मुंबई में इंपीरियल फ़िल्म कंपनी से जुडे़ और वर्ष 1930 में बीपी मिश्रा की फ़िल्म ‘सिनेमा गर्ल’ में उन्होंने अभिनय किया था. रंजीत मूवी के बैनर तले वर्ष 1940 में प्रदर्शित फ़िल्म ‘पागल’ में पृथ्वीराज कपूर अपने सिने कैरियर में पहली बार एंटी हीरो की भूमिका निभाई थी. वर्ष 1941 में सोहराब मोदी की फ़िल्म सिकंदर की सफलता के बाद पृथ्वीराज कामयाबी के शिखर पर जा पहुंचे थे. वर्ष 1944 में पृथ्वीराज कपूर ने अपनी खुद की थियेटर कंपनी पृथ्वी थिएटर शुरू की थी. पचास के दशक में पृथ्वीराज कपूर की जो फ़िल्में प्रदर्शित हुईं उनमें शांताराम की दहेज 1950 के साथ ही उनके पुत्र राज कपूर की निर्मित फ़िल्म आवारा प्रमुख है.पृथ्वीराज को देश के सर्वोच्च फ़िल्म सम्मान दादा साहब फाल्के के अलावा पद्म भूषण तथा कई अन्य पुरस्कारों से भी नवाजा गया था.
  6. अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन: – आज ही के दिन वर्ष 1933 को अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का जन्म कोलकाता शहर के शांति निकेतन नामक स्थान में हुआ था.उनके पिता का नाम ‘आशुतोष सेन’ था जो कि ढाका विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र के अध्यापक थे. अमर्त्य सेन की प्रारम्भिक शिक्षा ढाका में हुई थी. उन्होंने कोलकाता के शांति निकेतन और ‘प्रेसीडेंसी कॉलेज’ से शिक्षा पूर्ण करके उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनीटी कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी. अमर्त्य ने गणितीय आधार यह सिद्ध किया है कि समाज इस तरह के नतीजों के असर को कम करने के उपाय ढूँढ सकता है. अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय अर्थशास्त्री डॉ. अमर्त्य सेन ने पश्चिमी देशों को भारत और चीन से सीख लेने की सलाह दी थी.
  7. चिदंबरम पिल्लई: – आज ही के दिन वर्ष 1936 में तमिल भाषा के विद्वान और समाज-सुधारक चिदंबरम पिल्लई का निधन हुआ था.
  8. संगीतकार लक्ष्मीकांत: – आज ही के दिन वर्ष 1937 को संगीतकार लक्ष्मीकांत का जन्म मुम्बई में हुआ था. अल्प आयु में पिता की मृत्यु होने के कारण लक्ष्मीकांत को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी. बचपन के दिनों से ही लक्ष्मीकांत का रुझान संगीत की ओर था और वह संगीतकार बनना चाहते थे. लक्ष्मीकांत ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ‘उस्ताद हुसैन अली’ से हासिल की थी. लक्ष्मीकांत ने अपने कैरियर की शुरुआत कल्याण जी आनन्द जी के सहायक के रूप में की थी. उन्होंने ‘मदारी’, ‘सट्टा बाज़ार’, ‘छलिया’ और ‘दिल तेरा हम भी तेरे’ जैसी कई फ़िल्मों में काम किया था.
  9. महावीर चक्र विजेता दीवान सिंह दानू: – आज ही के दिन वर्ष 1947 में दीवान सिंह दानू  कबाइलियों से युद्ध में शहीद हुए थे. दीवान सिंह दानू के मरणोपरांत तत्कालीन प्रधानमंत्री ने ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया था. बताते चलें कि, देश के पहले महावीर चक्र विजेता दीवान सिंह दानु थे.
  10. मेजर सोमनाथ शर्मा: – आज ही के दिन वर्ष 1947 में मेजर सोमनाथ शर्मा वीरगति को प्राप्त हुए थे. ज्ञात है कि मेजर सोमनाथ शर्मा भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजिमेंट की चौथी बटालियन की डेल्टा कंपनी के कंपनी-कमांडर थे जिन्होंने अक्टूबर-नवम्बर, 1947 के भारत-पाक संघर्ष में अपनी वीरता से शत्रु के छक्के छुड़ा दिये थे. भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया था. परमवीर चक्र पाने वाले ये प्रथम व्यक्ति मेजर सोमनाथ शर्मा ही हैं.
  11. स्वामी चिन्ना जियर: – आज ही के दिन वर्ष 1956 में स्वामी चिन्ना जियर का जन्म आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के अर्थमुरु गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम वेंकटाचार्युलु और माता का नाम अलिवेलुमंगा थायारू था. चिन्ना जियर की प्रारंभिक शिक्षा ओरिएंटल स्कूल, गौतम विद्या पीठम राजमुंदरी में हुई थी. युवा श्रीमन्नारायण रामानुजाचार्युलु को 23 वर्ष की बहुत कम उम्र में ‘जीयर’ (शेर) का संन्यासी पद ग्रहण करना पड़ा था. वर्ष 1983 में स्वामी जी ने एक वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. उन्होंने मानवता की समृद्धि और कल्याण के लिए असंख्य वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ और होम आयोजित किए हैं. स्वामी चिन्ना जियर 1981 में नदिगड्डापलेम में श्रीमद उभय वेदांत आचार्य पीठ के प्रमुख बने थे. उन्होंने दुनिया भर में समुदाय के लाभ के लिए जीयर एजुकेशनल ट्रस्ट और विकास तरंगिनी के तहत कई आध्यात्मिक और सेवा गतिविधियों का नेतृत्व किया था. स्वामी जी ने दूर दराज के इलाकों में आदिवासियों और मछुआरा समुदाय के लिए स्कूलों की स्थापना की थी.
  12. लोक गायिका रेशमा: – आज ही के दिन वर्ष 2013 में लोक गायिका रेशमा का निधन लाहौर, पाकिस्तान में हुआ था.

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Remember Those Moments-181.

  1. Sawai Jai Singh: – On this day in the year 1688, Sawai Jai Singh was born in Amer. His father’s name was Raja Bishan Singh and mother’s name was Indrakunwari (Rathore Rani). Sawai Jai Singh’s real name was Vijay Singh while his younger brother’s name was Jai Singh. Sawai Jai Singh is also known as ‘Jai Singh II’. Jai Singh had impressed even a diplomat and a staunch emperor like Aurangzeb by showing his extraordinary talent in his childhood. After Aurangzeb’s death and there was chaos in the Mughal Empire, at this time Jai Singh raised his flag of rebellion. Sawai Jai Singh ruled Amer for 44 years. Sawai Jai Singh was a scholar of Sanskrit and Persian language and was an extraordinary expert in mathematics and astronomy.
  2. Establishment of The Times of India: – On this day in the year 1838, ‘The Times of India’ was established during the British Raj as ‘Bombay Times’ and ‘Journal of Commerce’. The name ‘The Times of India’ was given in the year 1861.
  3. Karnataka singer, cultural activist, scholar and Devadasi Bangalore Nagarathnamma: – On this day in the year 1878, Karnataka singer, cultural activist, scholar and Devdasi Bangalore Nagarathnamma was born in Nanjangud. His father’s name was Subba Rao who was a lawyer and his mother’s name was Puthu Lakshmi. Let us tell you that Puthu Lakshmi’s ancestors used to work as singers and musicians in the court of Mysore. After Nagarathnamma was abandoned by her father Subba Rao, she found shelter under Shastri, a Sanskrit scholar in the court of the Mysore Maharaja and taught Nagarathnamma Sanskrit and music. After Nagaratnamma was 5 years old, she was given the education of a Devdasi. Nagarathnamma built a temple at the Samadhi of Carnatic singer Tyagaraja at Thiruvaiyaru and helped establish the Tyagaraja Aradhana Utsav in his memory. Nagarathnamma became a singer early in her life and emerged as one of the best Carnatic singers of her time. She was “among the last practitioners of the Devadasi tradition in India as well as the first president of the Devadasi Sangha of the Madras Presidency.
  4. Chief Justice Sir Harilal J Kania: – On this day in the year 1890, Chief Justice Sir Harilal J Kania was born in a middle class family of Surat, (undivided India). His father’s name was J Kisundas, who was first a Sanskrit professor in Shamaldas College and later worked as the Principal. Kania did her BA from Samaldas College in the year 1910. Did. After that, he did LLB from Government Law College, Bombay in the year 1912 and LLM from the same institution in the year 1913. In the year 1915, he started practicing as a barrister in the Bombay High Court. Kania was the executive editor of India Law Reports. For some time in the year 1930, he became an acting judge in the Bombay High Court and in June 1931, he was appointed to the post of High Justice in the same court. He held this post till 1933. After the independence of the country, H.J. Kania became the first Chief Justice of the Supreme Court of the country.
  5. Actor Prithviraj Kapoor: – On this day in the year 1906, actor Prithviraj Kapoor was born in Samudri, Pakistan. His father’s name was Dewan Basheswarnath Kapoor who was a sub inspector in the police department. Prithviraj did his primary education from Lyallpur and Lahore (Pakistan). He did his further studies from Edward College, Peshawar. Prithviraj Kapoor joined the Imperial Film Company in Mumbai in 1928 and acted in BP Mishra’s film ‘Cinema Girl’ in 1930. Prithviraj Kapoor played the role of an anti-hero for the first time in his cine career in the film ‘Pagal’, released in 1940 under the banner of Ranjit Movie. In the year 1941, Prithviraj reached the pinnacle of success after the success of Sohrab Modi’s film Sikandar. In the year 1944, Prithviraj Kapoor started his own theater company Prithvi Theatre. Among the films of Prithviraj Kapoor which were released in the fifties, Shantaram Ki Dahej 1950 as well as the film Awara produced by his son Raj Kapoor are prominent. Apart from the country’s highest film award Dadasaheb Phalke, Prithviraj was also awarded Padma Bhushan and many other awards. Was awarded.
  6. Economist Amartya Sen: – On this day in the year 1933, economist Amartya Sen was born in a place called Shanti Niketan in Kolkata city. His father’s name was ‘Ashutosh Sen’ who was a chemistry teacher at Dhaka University. Amartya Sen’s primary education was in Dhaka. After completing his education from Shanti Niketan and ‘Presidency College’ in Kolkata, he received education from Trinity College, Cambridge. Amartya has proved on the mathematical basis that society can find ways to reduce the impact of such consequences. Indian economist Dr. Amartya Sen, who won the Nobel Prize in Economics, had advised western countries to learn from India and China.
  7. Chidambaram Pillai: – On this day in the year 1936, Tamil language scholar and social reformer Chidambaram Pillai died.
  8. Musician Laxmikant: – On this day in the year 1937, musician Laxmikant was born in Mumbai. Due to the death of his father at a young age, Laxmikant had to leave his studies midway. Laxmikant was inclined towards music since his childhood days and he wanted to become a musician. Laxmikant received his initial education in music from ‘Ustad Hussain Ali’. Laxmikant started his career as an assistant to Kalyan ji Anand ji. He had worked in many films like ‘Madaari’, ‘Satta Bazaar’, ‘Chhaliya’ and ‘Dil Tera Hum Bhi Tere’.
  9. Mahavir Chakra winner Diwan Singh Danu: On this day in the year 1947, Diwan Singh Danu was martyred in the war with the tribals. After the death of Diwan Singh Danu, the then Prime Minister honored him with ‘Mahavir Chakra’. Let us tell you that the country’s first Mahavir Chakra winner was Diwan Singh Danu.
  10. Major Somnath Sharma: – On this day in the year 1947, Major Somnath Sharma was martyred. It is known that Major Somnath Sharma was the company commander of the Delta Company of the 4th Battalion of the Kumaon Regiment of the Indian Army, who, with his bravery, killed six of the enemy in the Indo-Pak conflict of October-November, 1947. The Government of India honored him with Paramvir Chakra posthumously. Major Somnath Sharma is the first person to receive Paramvir Chakra.
  11. Swami Chinna Jeeyar: On this day in the year 1956, Swami Chinna Jeeyar was born in Arthamuru village of East Godavari district of Andhra Pradesh. His father’s name was Venkatacharyulu and mother’s name was Alivelumanga Thayaru. Chinna Jeyar’s early education was at Oriental School, Gautam Vidya Peetham, Rajahmundry. Young Srimannarayana Ramanujacharyulu had to take the monastic vow of ‘Jeer’ (Lion) at the very young age of 23. In the year 1983, Swamiji had established a Vedic University. He has conducted innumerable Vedic rituals, Yagyas and Homas for the prosperity and welfare of humanity. Swami Chinna Jeyar became the head of Srimad Ubhaya Vedanta Acharya Peeth in Nadigaddapalem in 1981. He had led many spiritual and service activities under Jeer Educational Trust and Vikas Tarangini for the benefit of the community across the world. Swamiji had established schools for the tribals and fishermen community in remote areas.
  12. Folk singer Reshma: – On this day in the year 2013, folk singer Reshma died in Lahore, Pakistan.
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