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राजा रामन्ना…

भारतीय परमाणु वैज्ञानिक  (28 जनवरी 1925 – 23 सितम्बर 2004) भारत के एक परमाणु वैज्ञानिक थे। राजा रामन्ना का जन्म कर्नाटक के टुम्कुर में हुआ था। वह भारत के प्रथम परमाणु परीक्षण के सूत्रधार भी थे। ‘राजा रमन्ना को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1973 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। जन्म: 28 जनवरी, 1925, तिप्तुर, तुमकूर, कर्नाटक मृत्यु: 24 सितम्बर 2004, मुंबई, महाराष्ट्र

कार्यक्षेत्र: परमाणु वैज्ञानिक, भारत के परमाणु कार्यक्रम से 4 दशक तक जुड़े रहे सम्मान: पद्म श्री (1968), पद्म भषण (1973) और पद्म विभूषण (1975)संस्थान: भाभा एटॉमिक रिसर्च सेण्टर, डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन, इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी, रक्षा मंत्रालय, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज शिक्षण संस्थाएँ: बिशप कॉटन बोयज़ स्कूल बेंगलुरु, मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ़ मुंबई, किंग्स कॉलेज लन्दन राजा रमन्ना एक भारतीय परमाणु वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे वर्ष 1964 में भारत के परमाणु कार्यक्रम में शामिल हुए थे और प्रारंभ में प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक डॉ होमी जहाँगीर भाभा के देख-रेख में कार्य किया और उनके निधन के बाद सन 1967 में इस कार्यक्रम के निदेशक बन गए। उन्होंने परमाणु हथियारों के विकास से सम्बंधित वैज्ञानिक शोध का निरिक्षण किया और बढ़ावा दिया। वे वर्ष 1974 में भारत के पहले परमाणु परिक्षण (स्मायिलिंग बुद्धा) करने वाले वैज्ञानिक दल के मुखिया भी थे।

राजा रमन्ना ने लगभग चार दशक तक भारत के परमाणु कार्यक्रम का संचालन किया जिसके कारण उन्हें ‘भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक’ माना जाता है। राष्ट्र के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (1968), पद्म भषण (1973) और पद्म विभूषण (1975) जैसे उच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा।राजा रमन्ना का जन्म 28 जनवरी, 1925 को मैसोर राज्य के तुमकूर में तिप्तुर नामक स्थान पर हुआ था। उनके पिता का नाम रमन्ना और माता का नाम रुक्मिणी था। बालक रमन्ना ने बचपन में संगीत के प्रति गहरी रूचि दिखाई जिसके बाद उनके माता पिता ने उन्हें पारंपरिक पश्चिमी संगीत से अवगत करवाया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बेंगलुरु के बिशप कॉटन बोयज़ स्कूल से प्रारंभ हुई जहाँ उन्होंने मुख्यतः साहित्य और पारंपरिक संगीत की शिक्षा ग्रहण दिया। उन्होंने मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज से भौतिकी विषय में बी.एस.सी. की डिग्री अर्जित की और वर्ष 1947 में ‘पारंपरिक संगीत’ में बी.ए. की डिग्री भी ली। इसके पश्चात उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने भौतिकी में एम.एस.सी. और फिर ‘संगीत’ विषय में M. Mus. किया।उसके पश्चात वर्ष 1952 में रमन्ना को राष्ट्रमंडल छात्रवृत्ति मिली जिसके उपरान्त वे डॉक्टरेट करने के लिए इंग्लैंड चले गए।

उन्होंने लन्दन विश्वविद्यालय के किंग्स कॉलेज में डॉक्टरेट के लिए दाखिला लिया और वर्ष 1954 में ‘परमाणु भौतिकी’ में अपना डॉक्टरेट पूरा किया। यूनाइटेड किंगडम में उन्होंने अपना शोध एटॉमिक एनर्जी रिसर्च एस्टाब्लिश्मेंट (AERE) में किया जहाँ उन्होंने ‘नुक्लेअर फ्यूल साइकिल’ और नुक्लेअर रिएक्टर डिजाइनिंग’ में निपुणता हासिल की। संगीत में उनकी गंभीर रूचि थी और इंग्लैंड प्रवास के दौरान उन्होंने यूरोपिय संगीत का खूब आनंद लिया और पश्चिमी दर्शन के बारे में भी पढ़ा और जाना।पश्चिमी संगीत और सभ्यता में राजा रमन्ना की रूचि और उत्साह जीवन पर्यंत रहा और भारत लौटने के बाद उन्होंने अपने आप को प्रतिभावान पियानो वादकों जैसा पारंगत किया। उन्होंने भारत और विदेशों में कई संगीत कार्यक्रमों में परंपरागत यूरोपिय संगीत का प्रदर्शन किया। वर्ष 1956 में पाकिस्तान के ‘नेशनल कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स’ और ‘नेशनल अकैडमी ऑफ़ परफोर्मिंग आर्ट्स’ के आमंत्रण पर उन्होंने वहां क्लासिकल पियानो पर एक भाषण दिया और अपनी कला का प्रदर्शन भी किया।

डॉ राजा रमन्ना भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु द्वारा प्रारंभ किये गए देश के ‘परमाणु कार्यक्रम’ से जुड़े हुए सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक थे। वर्ष1954 में इंग्लैंड से डॉक्टरेट करने के बाद वे भारत लौट आये और डॉ होमी जहाँगीर भाभा के नेतृत्व में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेण्टर में वरिष्ठ तकनिकी दल में नियुक्त हो गए। वर्ष1958 में उन्हें इस कार्यक्रम का चीफ डायरेक्टिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया। डॉ होमी जहाँगीर भाभा के दुखद मौत के बाद उन्हें इस कार्यक्रम का मुखिया बना दिया गया और वर्ष1974 में उनके नेत्रत्व में भारत ने पहले परमाणु परीक्षण (स्मायिलिंग बुद्धा) किया जिसके बाद राजा रमन्ना को अन्तराष्ट्रीय ख्याति मिली और भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। वर्ष 1978 में इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने राजा रमन्ना के सामने इराक के लिए परमाणु बम बनाने का प्रस्ताव रखा पर उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और भारत वापस लौट गए।

अपने करियर के बाद के दिनों में राजा रमन्ना ने सख्त नीतियों को बनाने की वकालत की ताकि परमाणु प्रसार रोका जा सके। उन्होंने ‘अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी सम्मलेन’ में भाग लेने के लिए पाकिस्तान की भी यात्रा की और परमाणु भौतिकी पर भाषण दिया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के मध्य शांति स्थापित करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और इस क्षेत्र में ‘परमाणु टकराव’ रोकने में अग्रणी भूमिका भी निभाई। वर्ष 1984 में उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा संस्थान ज्वाइन कर लिया और IAEA के 30वें महा अधिवेशन का अध्यक्ष भी रहे।डॉ राजा रमन्ना महुमुखी प्रतिभा के धनि व्यक्ति थे। परमाणु भौतिकी के साथ-साथ संगीत और दर्शन में भी उनकी गहरी रूचि थी। वे पियानो बजाने में बहुत पारंगत थे और देश-विदेश में कई समारोहों में अपनी कला का प्रदर्शन भी किया। संगीत उनके दिल के बहुत करीब था और इस विषय पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी – ‘द स्ट्रक्चर ऑफ़ म्यूजिक इन रागा एंड वेस्टर्न सिस्टम्स (1993)। उन्होंने एक और पुस्तक (आत्मकथा) ‘इयर्स ऑफ़ पिल्ग्रिमेज’ (1991) भी लिखी।

वर्ष1990 में वी.पी.सिंह सरकार में राजा रमन्ना को रक्षा राज्य मंत्री बनाया गया। वर्ष 1997 से लेकर 2003 तक वे राज्य सभा के सदस्य भी रहे। वे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी बॉम्बे के साथ भी करीब से जुड़े थे और इसके बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स का लगातार तीन सत्रों के लिए अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2000 में उन्हें नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज बैंगलोर का पहला निदेशक बनाया गया।देश के लिए किये गए उनके कार्यों के मद्देनजर भारत सरकार ने समय-समय पर राजा रमन्ना को सम्मानित किया।वर्ष1963 में उन्हें विज्ञानं और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार दिया गया वर्ष 1968 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया वर्ष 1973 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया वर्ष 1976 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया निधन 24 सितम्बर 2004 को डॉ राजा रमन्ना परलोक सिधार गए। मृत्यु के समय उनकी आयु 79 साल थी।

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Indian nuclear scientist (28 January 1925 – 23 September 2004) was a nuclear scientist from India. Sri Raja Ramanna was born in Tumkur, Karnataka. He was also the architect of India’s first nuclear test. Raja Ramanna was awarded the Padma Bhushan in 1973 by the Government of India in the field of science and engineering. Born: January 28, 1925, Tiptur, Tumkur, Karnataka Death: September 24, 2004, Mumbai, Maharashtra

Occupation: Nuclear scientist, associated with India’s nuclear program for 4 decades Honours: Padma Shri (1968), Padma Bhushan (1973) and Padma Vibhushan (1975) Institution: Bhabha Atomic Research Centre, Defense Research and Development Organisation, International Atomic Energy Agency, Ministry of Defence, National Institute of Advanced Studies Educational Institutions: Bishop Cotton Boys’ School Bangalore, Madras Christian College, the University of Bombay, King’s College London Raja Ramanna was an Indian nuclear scientist who played a key role in the development of India’s nuclear program. He joined India’s nuclear program in the year 1964 and initially worked under the supervision of renowned nuclear scientist Dr. Homi Jehangir Bhabha and became the director of the program in 1967 after his death. He oversaw and promoted scientific research related to the development of nuclear weapons. He was also the head of the scientific team that conducted India’s first nuclear test (Smiling Buddha) in the year 1974.

Raja Ramanna operated India’s nuclear program for almost four decades, due to which he is considered the ‘father of India’s nuclear program’. For his services to the nation, the Government of India honored him with high civilian honors such as Padma Shri (1968), Padma Bhushan (1973), and Padma Vibhushan (1975). Raja Ramanna was born on January 28, 1925, in Tumkur, Mysore State. I was born in a place called Tiptur. His father’s name was Ramanna and his mother’s name was Rukmini. The child Ramanna showed a keen interest in music in his childhood after which his parents introduced him to traditional western music. His early education began at the Bishop Cotton Boys’ School in Bangalore, where he mainly studied literature and traditional music. He did B.Sc in Physics from Madras Christian College. degree in ‘Traditional Music’ in the year 1947. Took degree. After this, he joined Bombay University where he did M.Sc in Physics. And then M. Mus in the subject of ‘Music’. After that, in the year 1952, Ramanna received the Commonwealth Scholarship, after which he went to England to do his doctorate.

He enrolled for a doctorate at King’s College, University of London, and completed his doctorate in ‘Nuclear Physics’ in the year 1954. In the United Kingdom, he did his research at the Atomic Energy Research Establishment (AERE) where he specialized in ‘Nuclear Fuel Cycle’ and ‘Nuclear Reactor Designing’. He had a keen interest in music and during his stay in England, he enjoyed European music and read and learned about Western philosophy. Raja Ramanna’s interest and enthusiasm in Western music and civilization remained life-long and after his return to India, he Mastered you like a talented piano player. He performed traditional European music in many concerts in India and abroad. In the year 1956, Pakistan’s ‘National College of Arts and ‘National Academy of Performing Arts On invitation, he gave a lecture on classical piano and also performed his art there.

Dr. Raja Ramanna was one of the most important persons associated with the country’s ‘Atomic Program’ initiated by Jawaharlal Nehru, the first Prime Minister of India. After completing his doctorate in England in 1954, he returned to India and joined the senior technical team at the Bhabha Atomic Research Center under the leadership of Dr. Homi Jehangir Bhabha. In the year 1958, he was appointed the Chief Directing Officer of this program. After the tragic death of Dr. Homi Jehangir Bhabha, he was made the head of this program and under his leadership in 1974, India conducted the first nuclear test (Smiling Buddha) after which Raja Ramanna got international fame and the Government of India awarded him the Padma Vibhushan. did. In the year 1978, the then President of Iraq, Saddam Hussain, proposed to Raja Ramanna to make an atomic bomb for Iraq, but he turned down the offer and returned to India.

In the later days of his career, Raja Ramanna advocated strict policies to prevent nuclear proliferation. He also traveled to Pakistan to participate in the ‘International Physics Conference’ and delivered a speech on Nuclear Physics. He contributed significantly to efforts to establish peace between India and Pakistan and also played a leading role in preventing ‘nuclear confrontation’ in the region. In the year 1984, he joined the International Institute of Atomic Energy and was also the President of the 30th General Session of IAEA. Dr. Raja Ramanna was a man of many talents. He had a keen interest in nuclear physics as well as in music and philosophy. He was very proficient in playing the piano and also performed his art at many festivals in the country and abroad. Music was very close to his heart and he wrote a book on the subject – The Structure of Music in Raga and Western Systems (1993). He also wrote another book (autobiography) ‘Years of Pilgrimage’ (1991).

In the year 1990, Raja Ramanna was made the Minister of State for Defense in the VP Singh government. He was also a member of the Rajya Sabha from 1997 to 2003. He was also closely associated with the Indian Institute of Technology Bombay and was the chairman of its board of directors for three consecutive terms. In the year 2000, he was made the first director of the National Institute of Advanced Studies, Bangalore. In recognition of his work for the country, the Government of India honored Raja Ramanna from time to time. In the year 1963, he was awarded the Shanti Swarup Bhatnagar Award in the field of science and technology. Awards are given He was awarded the Padma Shri in the year 1968 He was awarded the Padma Bhushan in the year 1973 He was awarded the Padma Vibhushan in the year 1976 Death Dr. Raja Ramanna passed away on 24 September 2004. He was 79 years old at the time of his death.

 

Prabhakar Kumar.

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