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लाल बहादुर शास्त्री…

जब 1965 में देश भुखमरी की समस्या से गुजर रहा था, तब उस समय शास्त्री जी ने सैलरी लेना बंद कर दिया था। इसी दौरान अपने घर काम करने आने वाली बाई को भी काम पर आने से मना कर दिया था और घर का काम खुद करने लगे थे। उन्हें सादगी पसंद थी, इस कारण वे फटे कुर्ते को भी कोट के नीचे पहन लिया करते थे।

लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े कुछ रोचक और प्रेरक किस्से “ थर्ड क्लास में लगवाए थे पंखे ”. लाल बहादुर शास्‍त्री प्रधानमंत्री बनने से पहले विदेश मंत्री, गृह मंत्री और रेल मंत्री जैसे अहम पदों पर थे। एक बार वे रेल की एसी बोगी में सफर कर रहे थे। इस दौरान वे यात्रियों की समस्या जानने के लिए थर्ड क्लास (जनरल बोगी) में चले गए। इसके बाद उन्होंने वहां की दिक्कतों को देखा और अपने PA पर नाराज भी हुए। फिर उन्‍होंने थर्ड क्लास में सफर करने वाले पैसेंजर्स को फैसिलिटी देने का फैसला करते हुए जनरल बोगियों में पहली बार पंखा लगवाया और साथ ही पैंट्री की सुविधा भी शुरू करवाई।

बचपन में तैरकर जाते थे स्कूल शास्‍त्री जी बचपन में काफी शरारती हुआ करते थे। घर में लोग उन्हें नन्हे कहते थे। उन्हें गांव के बच्चों के साथ नदी में तैरना बहुत अच्छा लगता था। वे दोस्तों के साथ गंगा में तैरने भी जाते थे। बचपन में उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाले एक दोस्‍त को डूबने से बचाया था। काशी के रामनगर के अपने पुश्तैनी घर से रोज माथे पर बस्ता और कपड़ा रखकर वे कई किलोमीटर लंबी गंगा को पार कर स्कूल जाते थे।

हरिश्चन्द्र इंटर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे अक्सर लेट पहुंचते थे और क्लास के बाहर खड़े होकर पूरे नोट्स बना लेते थे। शास्त्री जी फटे कपड़ों से बाद में रूमाल बनवाते थे औऱ फटे कुर्तों को कोट के नीचे पहनते थे। इस पर जब उनकी पत्नी ने उन्हें टोका तो उनका कहना था कि देश में बहुत ऐसे लोग हैं, जो इसी तरह गुजारा करते हैं। VVIP कल्चर नहीं था पसंद शास्त्री जी किसी भी प्रोग्राम में VVIP की तरह नहीं, बल्कि आम आदमी की तरह जाना पसंद करते थे।

प्रोग्राम में इवेंट ऑर्गनाइजर उनके लिए तरह-तरह के पकवान बनवाते तो वे उन्हें समझाते थे कि गरीब आदमी भूखा सोया होगा और मै मंत्री होकर पकवान खाऊं, ये अच्छा नहीं लगता। दोपहर के खाने में वे अक्सर सब्जी-रोटी खाते थे।लाल बहादुर शास्त्री की मौत की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझी है। वर्ष  1965 में पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम के बाद लाल बहादुर शास्त्री सोवियत संघ का हिस्सा रहे उज्बेकिस्तान के ताशकंद गए थे, जहां उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करना था। 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौता हुआ और इस समझौते के महज 12 घंटे बाद ही 11 जनवरी को तड़के 1 बजकर 32 मिनट पर उनकी मौत हो गई। आज भारत माता के लाल शास्त्री जी को शत् शत् नमन्।

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When the country was passing through the problem of starvation in 1965, Shastriji stopped taking a salary. Meanwhile, the maid who used to come to work at his home also refused to come to work and started doing the household work himself. He liked the simplicity, that’s why he used to wear torn kurta under his coat.

Some interesting and inspiring stories related to the life of Lal Bahadur Shastri, “Fans were installed in the third class”. Lal Bahadur Shastri held important positions like Foreign Minister, Home Minister, and Railway Minister before becoming the Prime Minister. Once he was traveling in an AC bogie of the train. During this, he went to the third class (general bogie) to know the problems of the passengers. After this, he saw the problems there and also got angry with his PA. Then, deciding to provide facilities to the passengers traveling in third class, he installed fans for the first time in the general bogies and also started the facility of a pantry.

Shastri used to go to school by swimming in his childhood. He used to be very mischievous in his childhood. People in the house used to call him Nanhe. He loved swimming in the river with the village children. He also used to go swimming in the Ganges with friends. As a child, he had saved a friend who studied with him from drowning. Every day from his ancestral home in Ramnagar, Kashi, he used to go to school by crossing several kilometer long Ganga with a sack and cloth on his forehead.

While studying at Harishchandra Inter College, he often used to reach late and used to stand outside the class and make complete notes. Shastri ji later used to make handkerchiefs from torn clothes and used to wear torn kurtas under his coat. When his wife interrupted him on this, he said that there are many people in the country who live like this. VVIP culture was not a choice Shastri ji preferred to attend any program not like a VVIP but like a common man.

In the program, when the event organizer used to make different dishes for him, he used to explain to them that the poor man must have slept hungry and that I, being a minister, should eat the dish, it is not good. He often used to eat vegetables and roti for the lunch. The mystery of Lal Bahadur Shastri’s death is still not solved. After the ceasefire with Pakistan in 1965, Lal Bahadur Shastri went to Tashkent in Uzbekistan, then a part of the Soviet Union, where he was to sign an agreement with Ayub Khan, the President of Pakistan. On January 10, 1966, Tashkent agreement was signed between India and Pakistan, and just 12 hours after this agreement, he died on January 11 at 1.32 am. Today, hundreds of salutations to Lal Shastri ji of Mother India.

Prabhakar Kumar.

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