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व्यक्ति विशेष

भाग - 97.

स्वतंत्रता सेनानी कमला देवी चट्टोपाध्याय

कमला देवी चट्टोपाध्याय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख महिला नेता थीं. उनका जन्म 3 अप्रैल 1903 को हुआ था. वे एक समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, थिएटर आर्टिस्ट, लेखक, और सहकारिता आंदोलन की प्रवर्तक थीं. कमला देवी ने भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया और इस क्षेत्र में महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किया।

उनकी शिक्षा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में हुई, जहाँ उन्होंने समाजशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की. भारत वापस आकर, उन्होंने सक्रिय रूप से भारतीय नेशनल कांग्रेस में भाग लिया और महिला आंदोलन में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

कमला देवी ने साल्ट सत्याग्रह (1930) में भाग लिया और बाद में अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की स्थापना की, जैसे कि अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, और संगीत नाटक अकादमी। उन्होंने भारतीय संस्कृति और हेरिटेज को प्रोत्साहित और संरक्षित करने में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

कमला देवी की विरासत उनके द्वारा किए गए सामाजिक सुधार, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, और भारतीय हस्तशिल्प तथा हथकरघा उद्योग को सशक्त बनाने में निहित है. उनका निधन 29 अक्टूबर 1988 को हुआ। भारतीय समाज में उनके योगदान को याद किया जाता है और वे आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं.

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प्रथम फील्ड मार्शल एस एच एफ जे मानेकशॉ

फील्ड मार्शल सैम हॉर्मसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ, जिन्हें सैम बहादुर के नाम से भी जाना जाता है. वो भारतीय सेना के एक लेजेंडरी अफसर थे. उनका जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर, पंजाब में हुआ था. मानेकशॉ को भारतीय सेना में उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए 1973 में फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया, जिससे वे इस सम्मानित पद को प्राप्त करने वाले भारत के पहले अफसर बने.

मानेकशॉ ने अपना कैरियर 1934 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के साथ शुरू किया और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा अभियान में अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध हुए. उन्होंने अपनी सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और भारतीय सेना की विभिन्न शाखाओं में अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया.

सैम मानेकशॉ को खासतौर पर 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में उनकी रणनीतिक जीनियस के लिए याद किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश की स्थापना हुई. इस युद्ध में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने असाधारण सफलता प्राप्त की, जिसने दक्षिण एशिया के इतिहास को नई दिशा प्रदान की.

उनकी अद्वितीय नेतृत्व शैली, व्यक्तित्व, और सेना के प्रति उनकी अनुकरणीय सेवा ने उन्हें सैनिकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाया. सैम बहादुर के नाम से लोकप्रिय, मानेकशॉ को उनके योगदान के लिए पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया. उनका निधन 27 जून 2008 को वेलिंगटन, तमिलनाडु में हुआ. उनकी विरासत भारतीय सेना और देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगी.

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साहित्यकार निर्मल वर्मा

निर्मल वर्मा (1931-2005) आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखकों में से एक थे. उनका जन्म 3 अप्रैल 1931 को शिमला में हुआ था. निर्मल वर्मा ने अपनी लेखनी से कहानी, निबंध, यात्रा वृत्तांत, और डायरी जैसी विधाओं में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई. उन्हें मुख्य रूप से एक कहानीकार के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनका उपन्यास ‘वे दिन’ भी काफी चर्चित रहा.

निर्मल वर्मा के साहित्य में आंतरिक जगत की गहराइयों का अन्वेषण, परायेपन की भावना, और मानवीय संबंधों की जटिलताएँ प्रमुख विषय रहे हैं. उनकी रचनाएँ अक्सर विचारशीलता और गहन अनुभवों से परिपूर्ण होती हैं, जो पाठक को अपने आप से और अपने आस-पास की दुनिया से गहराई से जोड़ती हैं.

निर्मल वर्मा के प्रमुख कार्यों में ‘लाल टीन की छत’, ‘एक चिथड़ा सुख’, ‘अंतिम अरण्य’, और ‘खिले हुए वृक्ष के नीचे’ शामिल हैं. उनकी कहानियाँ और उपन्यास भारतीय साहित्य में अपनी अनूठी शैली और गहराई के लिए सराही जाती हैं.

निर्मल वर्मा को उनके योगदान के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए, जिसमें साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, और पद्म भूषण शामिल हैं. उनके निधन के बाद भी, उनका साहित्य अध्ययन और अनुसंधान का विषय बना हुआ है.

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साहित्यकार मन्नू भंडारी

मन्नू भंडारी (1931-2021) हिंदी साहित्य की एक प्रमुख लेखिका थीं, जिन्होंने अपने उपन्यासों, कहानियों, और नाटकों के माध्यम से हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनका जन्म 3 अप्रैल 1931 को बीकानेर, राजस्थान में हुआ था. मन्नू भंडारी की रचनाएँ आधुनिक भारतीय समाज के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालती हैं, खासकर महिलाओं के जीवन और उनके संघर्षों पर उनकी लेखनी की गहरी छाप है.

मन्नू भंडारी का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास “आपका बंटी” है, जिसमें एक माँ और उसके बेटे के बीच के संबंधों को बहुत ही मार्मिक तरीके से चित्रित किया गया है. इस उपन्यास ने समाज में माँ-बेटे के रिश्ते को एक नई दृष्टि से देखने का आधार प्रदान किया.

उनकी अन्य प्रमुख रचनाओं में “महाभोज”, “यही सच है”, और “एक प्लेट सैलाब” शामिल हैं. इन रचनाओं के माध्यम से उन्होंने समाजिक विसंगतियों, राजनीतिक अन्याय, और नैतिकता के संकटों को उजागर किया. मन्नू भंडारी की कहानियाँ और उपन्यास भारतीय समाज के बदलते परिदृश्य को दर्शाते हैं और महिलाओं की स्वतंत्रता, आत्म-सम्मान, और अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास करते हैं.

मन्नू भंडारी का साहित्यिक योगदान उन्हें हिंदी साहित्य के इतिहास में एक विशेष स्थान पर रखता है. उनकी रचनाएँ पाठकों को न केवल मनोरंजन प्रदान करती हैं बल्कि गहन चिंतन और आत्म-मंथन के लिए भी प्रेरित करती हैं. उनकी रचनात्मकता और विचारों की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उनके जीवनकाल में थी.

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गज़ल गायक  हरिहरन

 हरिहरन भारतीय संगीत जगत के प्रमुख संगीतकारों में से एक हैं. उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक भारतीय संगीत के अल्बमों की रचना की और विभिन्न संगीत संस्थानों और संगीत कार्यशालाओं में भाग लिया.

हरिहरन का जन्म 03 अप्रैल 1955 को दादर मुंबई में हुआ था. इनका पूरा नाम हरिहरन अनंत सुब्रमण्यम है. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत कॉन्सर्ट सर्केट और टीवी से की थी और कई टीवी शो के लिए अपनी आवाज दी है.

हरिहरन के संगीत में शांत, भावपूर्ण और आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण स्थान है. उनका संगीत लोगों के दिलों को छूने वाला होता है और उन्होंने अपने संगीतीय योगदान से एक प्रमुख स्थान बनाया. उनकी ध्वनि और गायन कला ने लोगों को आकर्षित किया और उन्हें एक अनूठा संगीतकार बना दिया.

गज़ल गायकी में एक प्रमुख नाम हरिहरन का भी है. उन्होंने अपने सुंदर आवाज़ और भावनात्मक प्रदर्शन से गज़ल गायन में एक अलग पहचान बनाई. उनकी गज़लें अक्सर प्यार, दर्द, और इश्क के मुद्दों पर आधारित होती हैं, जो उनके श्रोताओं के दिलों को छू लेती हैं. उनकी गज़लों में शायरी का एक अद्वितीय रूप है, जिसमें संवेदनाएँ, भावनाएँ, और जीवन के गहराई को व्यक्त किया गया है.

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अभिनेत्री जयाप्रदा

जयाप्रदा एक भारतीय अभिनेत्री हैं. जिन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, और मराठी फिल्मों में काम किया है. उनका जन्म 3 अप्रैल 1962 को आंध्र प्रदेश में हुआ था. उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत 1974 में तेलुगु फिल्म ‘भूमि कोसम’ से की थी. उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में ‘सरगम’, ‘कामचोर’, ‘साजन बिना सुहागन’, ‘शराबी’, और ‘आदमी खिलौना है’ जैसी कई फिल्में शामिल हैं.

जयाप्रदा ने अपने फिल्मी कैरियर के अलावा राजनीति में भी अपनी जगह बनाई है. उन्होंने तेलुगु देसम पार्टी (TDP) से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया था. बाद में, वह समाजवादी पार्टी (SP) के साथ जुड़ गईं और उत्तर प्रदेश से सांसद भी रह चुकी हैं. जयाप्रदा ने अपने राजनीतिक कैरियर में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं और समाज सेवा में भी अपना योगदान दिया है.

उनकी खूबसूरती और प्रतिभा ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक प्रमुख स्थान दिलाया। उन्होंने अपने फिल्मी कैरियर में विभिन्न भाषाओं की फ़िल्मों में काम करके एक विस्तृत दर्शक वर्ग को अपनी ओर आकर्षित किया है.

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चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत निज़ामुद्दीन औलिया

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया चिश्ती सिलसिले के एक प्रमुख सूफी संत थे, जिनकी गिनती इस्लामिक धर्म में बहुत ही उच्च मानी जाती है. उनका जन्म 1238 में हुआ था और उनका देहांत 1325 में हुआ था. उन्हें चिश्ती सम्प्रदाय के चौथे संत के रूप में जाना जाता है. उनका मकबरा दिल्ली में स्थित है और यह भारतीय उपमहाद्वीप में सूफीवाद का एक महत्वपूर्ण केंद्र है.

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया का जीवन अध्यात्म, प्रेम, और समाज के प्रति सेवा के आदर्शों पर आधारित था. उन्होंने अपने उपदेशों में प्रेम को ईश्वर के साथ एकात्मता का मार्ग बताया. उनके शिष्यों में अमीर खुसरो जैसे महान कवि और संगीतकार भी शामिल थे, जिन्होंने सूफी संगीत में नवाचार किया.

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया ने लोगों को आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाने के लिए ध्यान, सिमरन (ईश्वर का स्मरण), और सेवा के महत्व पर बल दिया. उनका मानना था कि ईश्वर के प्रति प्रेम और मनुष्यों की सेवा करने में ही सच्ची आध्यात्मिकता है.

उनके द्वारा स्थापित धार्मिक और आध्यात्मिक मूल्य आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. उनका उर्स (पुण्यतिथि) हर साल उनके समाधि स्थल पर बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है, जिसमें दुनिया भर से हज़ारों श्रद्धालु और भक्त शामिल होते हैं.

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छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के एक महान योद्धा और एक कुशल प्रशासक थे. जिन्होंने 17वीं सदी में मराठा साम्राज्य की स्थापना की. उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था, जो आज के महाराष्ट्र में स्थित है. शिवाजी महाराज का नेतृत्व कौशल, उनकी रणनीति, और उनके प्रशासनिक नवाचारों ने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली और सम्मानित नायकों में से एक बना दिया.

शिवाजी महाराज ने अपने जीवनकाल में विशाल मराठा साम्राज्य की नींव रखी और उसे विस्तार दिया. उन्होंने मुगल साम्राज्य, आदिलशाही, और कुतुबशाही से कई युद्ध लड़े और विजयी हुए. उनकी गुरिल्ला युद्ध की रणनीतियों ने उन्हें अपने दुश्मनों पर बड़े पैमाने पर बढ़त दिलाई.

शिवाजी महाराज ने एक अच्छे प्रशासनिक ढांचे की स्थापना की, जिसमें न्याय, समृद्धि, और जन कल्याण को प्रमुखता दी गई. उन्होंने स्वराज्य की अवधारणा को बढ़ावा दिया, जिसका अर्थ है स्वतंत्र और स्वायत्त शासन. उनकी ये पहल भविष्य के मराठा साम्राज्य के लिए एक मजबूत नींव साबित हुई.

शिवाजी महाराज के शासन में समावेशिता का भी बड़ा महत्व था. उन्होंने विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को अपने प्रशासन में शामिल किया. उनका देहांत 3 अप्रैल 1680 को हुआ. आज भी, शिवाजी महाराज को एक महान नायक और भारतीय इतिहास के एक ज्वलंत चरित्र के रूप में याद किया जाता है.

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साहित्यकार एस. एच. वात्स्यायन

साहित्यकार एस. एच. वात्स्यायन, जिन्हें उनके उपनाम ‘अज्ञेय’ के नाम से अधिक जाना जाता है. हिंदी साहित्य के एक प्रमुख लेखक, कवि, उपन्यासकार, आलोचक, और पत्रकार थे. उनका जन्म 7 मार्च 1911 को हुआ था और उनका देहांत 4 अप्रैल 1987 को हुआ. अज्ञेय ने अपने लेखन के माध्यम से हिंदी साहित्य को नई दिशा और नई पहचान प्रदान की.

अज्ञेय के लेखन में व्यक्तित्व की स्वतंत्रता, अस्तित्ववाद, और आधुनिकता के प्रति उनकी गहरी समझ झलकती है. उन्होंने अपनी रचनाओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया और मानव मन की जटिलताओं को बारीकी से चित्रित किया. उनके कुछ प्रमुख उपन्यासों में ‘शेखर: एक जीवनी’, ‘नदी के द्वीप’, ‘अपने-अपने अजनबी’ और कविता संग्रहों में ‘आंगन के पार द्वार’, ‘हरी घास पर क्षण भर’ शामिल हैं.

अज्ञेय ने साहित्य के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त किए, जिनमें ज्ञानपीठ पुरस्कार (1978) और साहित्य अकादमी पुरस्कार शामिल हैं. उनका काम हिंदी साहित्य में प्रगतिशील और आधुनिक धाराओं के विकास में एक मील का पत्थर माना जाता है.

अज्ञेय ने ‘तार सप्तक’ नामक कविता संग्रहों की श्रृंखला का संपादन किया, जिसने हिंदी कविता में नई कविता आंदोलन को जन्म दिया. इस आंदोलन ने हिंदी कविता को नई दिशाओं में ले जाने का काम किया और युवा कवियों को एक नई पहचान और मंच प्रदान किया.

अज्ञेय का जीवन और कार्य हिंदी साहित्य के विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है, और उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों और आलोचकों द्वारा समान रूप से सराही जाती हैं.

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गायिका किशोरी अमोनकर

किशोरी अमोनकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक उल्लेखनीय गायिका थीं. जिन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की जयपुर-अतरौली घराने में अपनी गहरी पैठ बनाई. उनका जन्म 10 अप्रैल 1932 को हुआ था और उनका देहांत 3 अप्रैल 2017 को हुआ. उनकी माँ, मोगुबाई कुर्डीकर, जो खुद एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका थीं, ने उन्हें संगीत की शिक्षा दी. किशोरी अमोनकर की संगीत शैली उनके गहन भावनात्मक अभिव्यक्ति, रागों के सूक्ष्म नुकसान, और संगीत के प्रति उनकी आध्यात्मिक दृष्टिकोण के लिए जानी जाती है.

उनकी गायकी में अद्वितीय व्याख्या और गहराई थी, जिसे उन्होंने अपने रागों की व्याख्या में प्रदर्शित किया. अमोनकर ने शास्त्रीय संगीत के परंपरागत ढांचे के भीतर रचनात्मकता और नवीनता का संचार किया, जिससे उन्होंने संगीत की एक व्यापक श्रोता वर्ग को आकर्षित किया.

किशोरी अमोनकर को उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें पद्म भूषण (1987) और पद्म विभूषण (2002) शामिल हैं. उन्होंने संगीत के क्षेत्र में शिक्षा और प्रदर्शन दोनों ही स्तरों पर अपने जीवन को समर्पित किया और आगामी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनी रहीं.

किशोरी अमोनकर के संगीत में व्यक्त भावनात्मक गहराई और तकनीकी कुशलता ने उन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महानतम गायकों में से एक के रूप में स्थापित किया. उनकी विरासत उनके शिष्यों और उनकी रिकॉर्डिंग्स के माध्यम से जीवित है, जो आज भी विश्वभर के संगीत प्रेमियों द्वारा सुनी और प्रशंसित की जाती हैं.

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