News

व्यक्ति विशेष

भाग - 89.

अभिनेता और निर्देशक धीरेन्द्र नाथ गांगुली

धीरेन्द्र नाथ गांगुली, जिन्हें अधिकतर लोग धीरेन गांगुली के नाम से जानते हैं, बंगाली सिनेमा के प्रमुख अभिनेता और निर्देशक थे. वे भारतीय सिनेमा के प्रारंभिक दिनों के एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व थे और उन्होंने बंगाली थिएटर और सिनेमा में अपने योगदान के लिए ख्याति प्राप्त की.

धीरेन गांगुली ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत मूक फिल्म युग में की थी और बाद में उन्होंने टॉकी फिल्मों में भी काम किया. वे अपने समय के एक प्रगतिशील निर्देशक माने जाते थे और उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर आधारित कई फिल्में बनाईं. उनकी कुछ फिल्में उस समय के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाती हैं.

धीरेन गांगुली ने न केवल निर्देशन में अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि वे एक कुशल अभिनेता भी थे. उनके काम ने बंगाली सिनेमा को नई दिशा और पहचान दी. उनके योगदान को भारतीय सिनेमा के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और उनकी रचनाएँ आज भी सिनेमा प्रेमियों द्वारा सराही जाती हैं.

==========  =========  ===========

कवयित्री महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा एक हिन्दी कवयित्री थीं और छायावाद युग की प्रमुख हस्तियों में से एक मानी जाती हैं. उनकी कविताएँ प्रकृति, प्रेम, विरह और मानवतावादी मूल्यों पर केंद्रित हैं. महादेवी वर्मा को उनके संवेदनशील कविता के लिए ‘आधुनिक मीरा’ के रूप में भी जाना जाता है.

उन्होंने हिन्दी साहित्य में अपने विशिष्ट योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए, जिसमें ज्ञानपीठ पुरस्कार और पद्म भूषण शामिल हैं. उनकी कुछ प्रमुख कृतियों में ‘नीरजा’, ‘रश्मि’, ‘नीहार’, और ‘दीपशिखा’ शामिल हैं. उनकी कविताएँ अत्यधिक भावुक और चिंतनशील होती हैं, और वे मानवीय संवेदनाओं और प्रकृति के अद्वितीय चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं.

महादेवी वर्मा का निधन 11 सितम्बर 1987 को प्रयाग में हुआ था. महादेवी वर्मा का जीवन और काम हिन्दी साहित्य के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है, और उनकी रचनाएँ आज भी पाठ्यक्रमों में शामिल की जाती हैं.

==========  =========  ===========

संगीत निर्देशक सरस्वती देवी

सरस्वती देवी एक भारतीय संगीत निर्देशक थीं, जिन्होंने विशेष रूप से हिंदी सिनेमा में अपनी संगीत प्रतिभा के लिए पहचान बनाई. उनका असली नाम  खुर्शीद मिनोखर होमजी था, लेकिन वे सरस्वती देवी के नाम से अधिक प्रसिद्ध हुईं.

1930 – 40 के दशक में, वह उन पहली महिला संगीत निर्देशकों में से एक बनीं जिन्होंने भारतीय सिनेमा में संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया. सरस्वती देवी ने बॉम्बे टॉकीज के लिए काम किया और उन्होंने फिल्म ‘जवानी की हवा’ (1935) से अपने संगीत निर्देशन कैरियर की शुरुआत की. उन्होंने ‘अछूत कन्या’ (1936) और ‘बंधन’ (1940) जैसी कुछ प्रमुख फिल्मों में अपना संगीत दिया, जो उस समय बहुत लोकप्रिय हुईं.

सरस्वती देवी की संगीत शैली में विविधता और मौलिकता देखने को मिलती है. उन्होंने पारंपरिक भारतीय संगीत के साथ-साथ आधुनिक पश्चिमी संगीत तत्वों का भी समावेश किया. सरस्वती देवी ने संगीत उद्योग में महिलाओं के लिए एक नई दिशा निर्धारित की और उनके योगदान को भारतीय सिनेमा के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है.

==========  =========  ===========

लेखक  कुबेरनाथ राय

कुबेरनाथ राय एक हिन्दी और भोजपुरी के लेखक थे. उनका जन्म 26 नवंबर 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुआ था. कुबेरनाथ राय ने हिन्दी साहित्य में अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और लेखन कौशल के लिए व्यापक प्रशंसा प्राप्त की.

उनके लेखन में प्रकृति, ग्रामीण जीवन और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था और प्रेम झलकता है. उनके निबंध और आलोचनात्मक लेख उनकी विस्तृत सोच और अद्वितीय लेखन शैली के परिचायक हैं. कुबेरनाथ राय की रचनाओं में लोकजीवन की सच्चाई और सौंदर्य को बड़ी सहजता और गहराई से उजागर किया गया है.

उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें ‘निषाद बांसुरी’, ‘अर्धनारीश्वर’, और ‘उर्वशी और गांधार्व’ जैसी कृतियाँ शामिल हैं. कुबेरनाथ राय का साहित्यिक योगदान न केवल हिन्दी बल्कि भारतीय साहित्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथ साहित्यिक अध्ययनों और शोध कार्यों में आज भी प्रमुखता से पढ़े और अध्ययन किए जाते हैं.

==========  =========  ===========

कलाकार के. के. हेब्बार

के. के. हेब्बार, पूरा नाम कट्टिंगेडी कृष्ण हेब्बार, भारतीय चित्रकला के प्रमुख कलाकारों में से एक थे. उनका जन्म 15 जून 1911 को कर्नाटक के कट्टिंगेडी गाँव में हुआ था और उनका निधन  26 मार्च, 1996 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुई थी. हेब्बार की कला में भारतीय परंपराओं और आधुनिक तकनीकों का अद्भुत सम्मिश्रण देखने को मिलता है. उन्होंने मुख्यतः लैंडस्केप, नृत्य, ग्रामीण और शहरी जीवन के दृश्यों को अपने चित्रों में उतारा.

हेब्बार की कला में रंगों का इस्तेमाल, लाइनों की सूक्ष्मता और रूपों की संरचना उनकी अद्वितीय शैली को प्रकट करती है. उन्होंने अपने चित्रों में भारतीय जीवन की विविधता और सौंदर्य को चित्रित किया. हेब्बार ने भारत और विदेश में कई प्रदर्शनियों में अपनी कलाकृतियों को प्रस्तुत किया और उन्हें उनके योगदान के लिए कई सम्मान और पुरस्कारों से नवाजा गया.

के. के. हेब्बार की कलाकृतियाँ भारतीय चित्रकला के इतिहास में एक अनूठी जगह रखती हैं. उनका काम भारतीय कला के विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है और उनकी कलाकृतियाँ दुनिया भर के कला संग्रहालयों और गैलरियों में प्रदर्शित की जाती हैं.

==========  =========  ===========

गीतकार और संगीतकार आनंद शंकर

आनंद शंकर एक भारतीय संगीतकार और संगीत निर्देशक थे. जिन्होंने विशेष रूप से अपनी अद्वितीय संगीत शैली के लिए पहचान बनाई. वे भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी फ्यूज़न संगीत के मिलाप के लिए विख्यात थे. उनका संगीत भारतीय और पश्चिमी वाद्य यंत्रों के बीच एक अनूठा संतुलन प्रस्तुत करता है.

आनंद शंकर का जन्म 11 दिसंबर 1922 को हुआ था. वे पंडित रवि शंकर के भतीजे थे और संगीत के एक गौरवशाली परिवार से आए थे. उन्होंने विभिन्न संगीत शैलियों का अध्ययन किया और विशेष रूप से अपने संगीत में भारतीय और पश्चिमी तत्वों का समावेश किया.

आनंद शंकर के कुछ प्रसिद्ध कामों में उनके फ्यूज़न एल्बम शामिल हैं, जैसे कि ‘Ananda Shankar’ और ‘Ananda Shankar And His Music’, जिसमें उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिमी रॉक और इलेक्ट्रॉनिक म्यूजिक के साथ मिलाया. उनकी यह अनोखी संगीत शैली उन्हें विश्व संगीत के क्षेत्र में एक मान्यता प्राप्त नाम बनाती है.

आनंद शंकर का निधन 26 सितंबर 1999 को हुआ, लेकिन उनका संगीत आज भी उनके प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है. उनका काम संगीत की दुनिया में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

==========  =========  ===========

राजनीतिज्ञ अनिल बिस्वास

राजनीतिज्ञ अनिल बिस्वास एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे. जिनका निधन 26 मार्च 2006 को हुआ था​​. वे माकपा के दिवंगत राज्य सचिव थे और उनकी बेटी अजंता बिस्वास राजनीतिक हलकों में चर्चा में रही हैं, खासकर जब उन्होंने तृण मूल कांग्रेस के समर्थन में लेख लिखा था.

उनके इस कदम ने वामपंथी समर्थकों और सीपीएम के बीच काफी चर्चा और विवाद को जन्म दिया. अजंता बिस्वास को सीपीएम ने बाद में बहिष्कृत कर दिया था और उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया था.

Rate this post
:

Related Articles

Back to top button