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व्यक्ति विशेष

भाग - 80.

राजनीतिज्ञ बंगारू लक्ष्मण

बंगारू लक्ष्मण एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिनका जन्म 17 मार्च 1939 को आंध्र प्रदेश में हुआ था और उनकी मृत्यु 1 मार्च 2014 को हुई. वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजनेता थे और 2000 से 2001 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे.

बंगारू लक्ष्मण 1999 से 2000 तक भारत सरकार में रेल राज्य मंत्री के पद पर भी कार्यरत थे. उनकी राजनीतिक यात्रा में एक विवादित मोड़ तब आया जब उन्हें फर्जी रक्षा सौदों में लिप्त पाया गया और इसके लिए उन्हें चार वर्ष की कारावास की सजा भी मिली.

उनका निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ और उन्होंने सिकंदराबाद स्थित यशोदा अस्पताल में अंतिम साँस ली​.

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भूतपूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण

पृथ्वीराज चह्वाण एक अनुभवी भारतीय राजनेता हैं जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य हैं. उनका जन्म 17 मार्च 1946 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था. चह्वाण महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं. उनके पास विज्ञान और तकनीकी, भू-विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, जनशिकायत, पेंशन और संसदीय कार्य जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों में मंत्री के रूप में कार्य करने का अनुभव है. उनकी धर्मपत्नी का नाम सत्वशीला है.

पृथ्वीराज चह्वाण ने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक क्षमताओं के बल पर महाराष्ट्र राज्य की सेवा की है. वे भारत सरकार की पंद्रहवीं लोकसभा में मंत्री भी रह चुके हैं. उन्होंने विज्ञान और तकनीकी, भू-विज्ञान के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएँ दी हैं. उनका राजनीतिक कैरियर महाराष्ट्र के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी उल्लेखनीय रहा है​​​​.

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अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला

कल्पना चावला भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री थीं जिन्होंने नासा के साथ काम किया. उनका जन्म 1 जुलाई 1961 को हरियाणा, भारत में हुआ था. कल्पना ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भारत में पूरी की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं. उन्होंने एरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की.

1997 में, कल्पना ने नासा के स्पेस शटल कोलंबिया मिशन STS-87 में भाग लिया, जो उनकी पहली अंतरिक्ष यात्रा थी. वे इस मिशन में पेलोड स्पेशलिस्ट के रूप में शामिल हुईं और अंतरिक्ष में कई प्रयोग किए.

उनकी दूसरी और आखिरी अंतरिक्ष यात्रा 2003 में हुई थी, जब वे स्पेस शटल कोलंबिया के मिशन STS-107 में भाग ले रही थीं. दुर्भाग्यवश, यह मिशन एक त्रासदी में समाप्त हुआ जब कोलंबिया स्पेस शटल वापसी के दौरान वायुमंडल में पुनः प्रवेश करते समय टूट गया और कल्पना चावला सहित सभी सात चालक दल के सदस्यों की मृत्यु हो गई.

कल्पना चावला की विरासत और योगदान अब भी अंतरिक्ष अन्वेषण और विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरणादायक है.

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बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल

साइना नेहवाल एक प्रसिद्ध भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. उनका जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। साइना ने बैडमिंटन में अपने कैरियर की शुरुआत बहुत ही कम उम्र में की थी और वह भारत में इस खेल की सबसे सफल महिला खिलाड़ी बन गईं.

साइना के कैरियर में कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं. उन्होंने ओलंपिक खेलों में बैडमिंटन में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया है. 2012 लंदन ओलंपिक्स में, उन्होंने महिला एकल वर्ग में कांस्य पदक जीता.

साइना ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप, ऑल इंग्लैंड ओपन और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में पदक जीते हैं. वह भारत में बैडमिंटन के चेहरे के रूप में उभरीं और इस खेल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

साइना की कड़ी मेहनत, समर्पण और उपलब्धियों ने उन्हें विश्व बैडमिंटन में एक प्रमुख नाम बना दिया है. वह न केवल एक प्रेरणास्रोत हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श भी हैं.

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अभिनेता पुनीत राजकुमार

पुनीत राजकुमार एक भारतीय फिल्म अभिनेता थे, जो मुख्य रूप से कन्नड़ सिनेमा में काम करते थे. वे कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता डॉ. राजकुमार के पुत्र थे और उनके परिवार को कर्नाटक में बहुत ही सम्मानित और प्रिय माना जाता है. पुनीत ने बचपन में ही अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत की थी और बाल कलाकार के रूप में कई फिल्मों में काम किया.

पुनीत ने अपने कैरियर में कई हिट फिल्मों में अभिनय किया और अपनी उत्कृष्ट अभिनय क्षमता के लिए कई पुरस्कार जीते. वे अपने अभिनय के अलावा अपने नृत्य कौशल के लिए भी प्रसिद्ध थे. पुनीत ने अपनी फिल्मों के माध्यम से न केवल युवाओं के दिलों में विशेष स्थान बनाया बल्कि हर आयु वर्ग के दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय रहे.

उनकी कुछ प्रमुख फिल्मों में ‘अप्पु’, ‘मिलाना’, ‘प्रिथ्वी’ और ‘राजकुमार’ शामिल हैं. पुनीत ने न केवल फिल्म उद्योग में अपनी छाप छोड़ी, बल्कि वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे और कई चैरिटी इवेंट्स में भाग लिया. उनके अचानक निधन ने उनके परिवार, फैंस और कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री को गहरे दुख में छोड़ दिया. पुनीत राजकुमार की विरासत और उनके योगदान को कन्नड़ सिनेमा और उनके प्रशंसकों द्वारा हमेशा याद किया जाएगा.

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राजनीतिज्ञ हेमवती नंदन बहुगुणा

हेमवती नंदन बहुगुणा एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे 1973 – 75 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में जाना जाता था और उनकी राजनीतिक कैरियर कई उपलब्धियों से भरी पड़ी थी.

बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल 1919 को उत्तराखंड के एक गांव में हुआ था।.उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और धीरे-धीरे भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया। उन्होंने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर काम किया, और उनके नेतृत्व में कई विकासात्मक परियोजनाएँ शुरू की गईं.

बहुगुणा ने अपने राजनीतिक जीवन में कई दलों की सदस्यता ली, लेकिन मुख्य रूप से वे कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़े रहे. उनके राजनीतिक कैरियर में कई उतार-चढ़ाव आए, पर वे हमेशा एक प्रभावशाली और सम्मानित नेता के रूप में रहे.

हेमवती नंदन बहुगुणा का निधन 17 मार्च 1989 को हुआ था, लेकिन उनका योगदान भारतीय राजनीति में सदैव स्मरणीय रहेगा.

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पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर

मनोहर पर्रीकर एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में चार बार कार्य किया. वे भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख सदस्य थे और उन्हें अपनी सरलता, विनम्रता और प्रशासनिक क्षमता के लिए व्यापक रूप से सम्मानित किया जाता था.

मनोहर पर्रीकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 को गोवा में हुआ था. उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में अपनी शिक्षा पूरी की. पर्रीकर ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से की और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

उन्हें पहली बार 2000 में गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया, और फिर वे 2002, 2012 और 2017 में इस पद पर वापस आए. पर्रीकर को गोवा में उनकी स्पष्टता और निष्पक्ष शासन के लिए जाना जाता था. वे भारत सरकार में रक्षा मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं.

मनोहर पर्रीकर का निधन 17 मार्च 2019 को लम्बी बीमारी के बाद हुआ. उनका निधन गोवा और भारतीय राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति थी. उनकी मृत्यु पर देश भर में शोक व्यक्त किया गया और उन्हें एक विनम्र और समर्पित राजनीतिज्ञ के रूप में याद किया गया.

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