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व्यक्ति विशेष

भाग - 46.

नाना फड़नवीस

नाना फड़नवीस एक महत्वपूर्ण इतिहासी व्यक्ति हैं, जिन्होंने मराठा साम्राज्य के समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वह 18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की प्रारंभिक दशकों में कार्यरत थे. फड़नवीस का असली नाम बालाजी जानराव भाट था, जिन्होंने ब्राह्मण परिवार से उत्पन्न होने के बावजूद, मराठा शासकों के दरबार में बड़ी स्थानीय और राजनीतिक अहमियत प्राप्त की.

नाना फड़नवीस ने अपने अद्वितीय राजनीतिक धाराओं और प्रतिष्ठित कार्यकाल के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्होंने पुणे के सार्वजनिक जीवन को अपनाया और उसका विकास किया. उन्होंने पेशवा बाजीराव द्वितीय के कार्यकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने प्रबंधन के दौरान कई पुराने प्रथाओं को सुधारा.

फड़नवीस ने समाज में शिक्षा, धर्म, और कला को प्रोत्साहित किया. उन्होंने न्यायिक और प्रशासनिक सुधार की बड़ी पहचान बनाई. उनकी राजनीतिक क्षमता, दिप्तिता, और कार्यशीलता ने उन्हें मराठा साम्राज्य के प्रमुख व्यक्तियों में एक विशिष्ट स्थान दिलाया.

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दयानंद सरस्वती

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती भारतीय संत, धार्मिक नेता, और समाज सुधारक थे. उन्होंने 19वीं सदी के मध्य और अंत में आर्य समाज की स्थापना की, जो एक आध्यात्मिक और सामाजिक सुधार की प्रेरणा प्रदान करता था.

स्वामी दयानन्द ने वेदों के महत्व को पुनः प्रतिष्ठित किया और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए काम किया. उन्होंने समाज में विश्वास का उत्थान किया और धर्मिक आदर्शों को प्रचारित किया. उनके विचारों में समाज के समर्थन, विश्वास, एकता, और स्वावलंबन को महत्व दिया गया.

स्वामी दयानन्द ने वेदों का अध्ययन किया और वेदांत फिलॉसफी की मानवता और धार्मिकता के सिद्धांतों को उन्नत किया. उनके प्रमुख में “सत्यार्थ प्रकाश” और “ऋग्वेदादिभाष्य भूमिका” शामिल हैं.

स्वामी दयानन्द का योगदान धार्मिक और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और उनके विचार और आदर्शों का अभी भी व्यापक प्रभाव है.

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अभिनेता प्राण

प्राण एक भारतीय अभिनेता हैं, जो भारतीय फ़िल्म उद्योग में काम करते हैं. वे अपने प्रसिद्ध अभिनय के लिए जाने जाते हैं. प्राण ने अपनी अद्वितीय अभिनय की क्षमता और व्यक्तित्व के लिए प्रशंसा प्राप्त की है.

प्राण का जन्म 12 फ़रवरी, 1920 को पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान इलाके में बसे एक रईस परिवार में हुआ था. उनके बचपन का नाम ‘ प्राण कृष्ण सिकंद ‘ था. प्राण ने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत पंजाबी फिल्म से की थी. उस फिल्म में प्राण हीरो की भूमिका अदा की थी. बंटवारे के बाद प्राण को अपना फिल्मी करियर मुंबई आकर दोबारा से शुरू करना पड़ा. प्राण ने दूसरी बार अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत देव आंनद की फिल्म जिद्दी से शुरुआत की जिसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा.

फिल्म: –

कश्मीर की कली, खानदान, औरत, बड़ी बहन, जिस देश में गंगा बहती है, हाफ टिकट, उपकार ,पूरब और पश्चिम और डॉन आदि.

प्राण ने अबतक 350 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय किया. उन्हें  03 बार ‘फ़िल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता’ का पुरस्कार मिला. साथ ही उन्हें वर्ष 1997 में फ़िल्मफेयर के लाइफ टाइम अचीवमेंट के ख़िताब से भी सम्मानित किया गया. प्राण को हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2001 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया था. उसके बाद वर्ष 2012 में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

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क्रिकेटर गुंडप्पा विश्वनाथ

क्रिकेटर गुंडप्पा विश्वनाथ भारतीय क्रिकेट के पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट के अग्रणी बल्लेबाजों में से एक थे. वे 1959 से 1983 तक भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे.

गुंडप्पा विश्वनाथ का जन्म 12 फ़रवरी 1949 को मैसूर भद्रावती में हुआ था. विश्वनाथ को उनके आत्मसमर्पण, शांतिपूर्ण स्वभाव, और अनूठे खेल की शैली के लिए जाना जाता है. उन्होंने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण और अनुप्राणित प्रदर्शन किए, जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार शतक और अन्य प्रमुख प्रदर्शन करते रहे.

उन्हें 1971 में भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में उत्कृष्टता के लिए पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.

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योगाचार्य धीरेन्द्र ब्रह्मचारी

योगाचार्य धीरेन्द्र ब्रह्मचारी एक प्रसिद्ध योग गुरु थे, जिन्होंने भारतीय योग और ध्यान की परंपरा को प्रचारित किया. उन्हें भारतीय योग और आयुर्वेद के एक प्रमुख प्रवक्ता के रूप में मान्यता प्राप्त है. धीरेन्द्र ब्रह्मचारी का असली नाम धीरेन्द्र नाथ था.

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी का जन्म 12 फ़रवरी, 1924 को गांव चानपुरा बासैठ, मधुबनी, बिहार में हुआ था. उन्होंने अपने जीवन के बड़े हिस्से को योग और ध्यान को समर्पित किया और लोगों को इस अनुभव से लाभान्वित करने की शिक्षा दी.

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी ने अपने जीवन में भूखरंग क्रिया, शैलाजा योग, और ध्यान की अनेक विधियों को सिखाया। उनकी प्रमुख शिष्या में विवेकानंद, भगवान श्रीरामण महर्षि, और अनुप जलोटा जैसे व्यक्तित्व शामिल हैं.

धीरेन्द्र ब्रह्मचारी ने योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में अपनी विशेष योगदान किया और उनकी शिक्षाओं का अभियान आज भी जारी है. उनकी शिक्षाओं और योग के सिद्धांतों को आज भी लोग मानते हैं और उनके द्वारा साझा किए गए योगिक तकनीकों का उपयोग करते हैं.

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जहाँदारशाह

जहाँदारशाह किशोर, भारतीय इतिहास में मुग़ल साम्राज्य का चौथा सम्राट था. उनका पूरा नाम अबुल मुज़फ़्फ़र मुहम्मद जहाँदारशाह किशोर था. उनका राज्यकाल 1627 से 1658 तक चला. जहाँदारशाह का उद्यानपुर, दिल्ली में जन्म हुआ था और उनके पिता शाहजहाँ, जहाँदारशाह के प्रारंभिक शिक्षा और तालिम का मुख्य उपाध्यक्ष रहे हैं.

जहाँदारशाह का शासन काल उस समय में हुआ जब मुग़ल साम्राज्य में बहुत सारी आंदोलन और विद्रोह हुए. उनके शासन काल में अनेक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संकटों का सामना किया गया.

जहाँदारशाह का शासनकाल बहुत ही विवादित था. उन्होंने अपनी अनिष्ट कार्यवाहियों के कारण जनसमूह के बीच प्रियता खो दी और उन्हें अपने पिता शाहजहाँ के तुलनात्मक रूप से कम प्रिय माना जाता है.

जहाँदारशाह का राजा बनने के बाद उन्होंने कई कठिनाईयों का सामना किया, जो उन्हें एक शक्तिशाली और स्थिर शासक बनने की प्रतीति दिलाई. लेकिन उनका अव्यवस्थित और अनियंत्रित शासन उन्हें उनके राज्य की विपत्ति में डाल दिया, और उनका शासन 1658 में उनके विरोधियों द्वारा उत्तराधिकारी और पुत्र औरंगजेब को बाद में बदल दिया गया.जहाँदारशाह का निधन 12 फ़रवरी 1713 को दिल्ली में हुआ था.

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उद्योगपति राहुल बजाज

राहुल बजाज एक प्रमुख उद्योगपति और भारतीय उद्योग क्षेत्र के अग्रणी नामों में से एक हैं. उनका पूरा नाम राहुल बजाज है. वह बजाज ऑटोमोबाइल्स लिमिटेड के चेयरमैन हैं, जो भारत के अग्रणी ऑटोमोबाइल उद्योगी है.

राहुल बजाज का उद्योगी परिवार देश में एक प्रमुख स्थान रखता है. उन्होंने बजाज ऑटोमोबाइल्स को अग्रणी ऑटोमोबाइल उत्पादकों में स्थान दिलाया है, और वह एक समृद्धि और विश्वासनीय ब्रांड के रूप में स्थापित किया..

राहुल बजाज ने अपने योगदान के लिए अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं. उनकी नेतृत्व में बजाज ऑटोमोबाइल्स कंपनी ने आधुनिक तकनीकी नवाचार, उत्कृष्ट उत्पादों का निर्माण, और सामाजिक योजनाओं में योगदान किया है.

राहुल बजाज ने उद्योग, वित्तीय संस्थानों, और सरकारी नीतियों के क्षेत्र में भी अपनी सकारात्मक भूमिका से महत्वपूर्ण संबंध स्थापित किए हैं. राहुल बजाज का निधन 12 फरवरी 2022 को मुंबई में हुआ था.

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