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व्यक्ति विशेष

भाग – 204.

मंगल पांडे

मंगल पांडे (1827-1857) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी थे. उन्हें 1857 के भारतीय विद्रोह (जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है) के पहले वीर योद्धा के रूप में जाना जाता है.

मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था. वह बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (बीएनआई) की 34वीं रेजिमेंट के सिपाही थे.29 मार्च 1857 को, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका. उन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ खुले-आम विद्रोह किया और इस कार्रवाई को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रथम प्रहार माना जाता है.

उनकी गिरफ्तारी और 8 अप्रैल 1857 को फांसी के बाद, उनका बलिदान एक प्रेरणा स्रोत बन गया और 1857 के विद्रोह का आगाज हुआ. उनके इस साहसिक कदम ने कई भारतीयों को अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े होने के लिए प्रेरित किया. मंगल पांडे का नाम आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता है.

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मुस्लिम नेता ख़्वाजा नजीमुद्दीन

ख़्वाजा नजीमुद्दीन (1894-1964) एक प्रमुख पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ थे और मुस्लिम लीग के महत्वपूर्ण नेता थे. उन्होंने पाकिस्तान के दूसरे प्रधानमंत्री और पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य किया. नजीमुद्दीन का जन्म 19 जुलाई 1894 को ब्रिटिश भारत के ढाका में हुआ था.

नजीमुद्दीन ने अपनी शिक्षा ढाका और इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पूरी की. वे एक शिक्षित और प्रभावशाली व्यक्ति थे. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा मुस्लिम लीग के साथ शुरू की और जल्द ही बंगाल के एक प्रमुख नेता बन गए. वे 1943 – 45 तक बंगाल के मुख्यमंत्री भी रहे. वर्ष 1947 में भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना के बाद, नजीमुद्दीन पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल बने. वर्ष 1951 में लियाकत अली खान की हत्या के बाद, उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में पद भार संभाला.

नजीमुद्दीन का कार्यकाल चुनौतीपूर्ण था. उनके कार्यकाल में कई राजनीतिक और आर्थिक समस्याएं आईं, जिनमें नौकरशाही और राजनीतिक अस्थिरता प्रमुख थे. वर्ष 1953 में, उन्हें राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा द्वारा पद से हटा दिया गया. नजीमुद्दीन के बाद मोहम्मद अली बोगरा ने प्रधानमंत्री का पद संभाला. नजीमुद्दीन ने पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके योगदान को आज भी सम्मानित किया जाता है.

ख़्वाजा नजीमुद्दीन ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई और भारतीय उपमहाद्वीप के मुस्लिम समुदाय के लिए एक प्रमुख नेता के रूप में स्थापित हुए. उनकी विरासत और योगदान को पाकिस्तान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है.

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दिनेश सिंह

दिनेश सिंह एक भारतीय राजनेता और कांग्रेसी नेता थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं. वह कई बार लोकसभा के सदस्य रहे और विभिन्न केंद्रीय मंत्रिमंडलों में विभिन्न पदों पर कार्य किया.

दिनेश सिंह का जन्म 19 जुलाई 1925 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. दिनेश सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की. वे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय में कांग्रेसी सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे. उन्होंने विभिन्न केंद्रीय मंत्रिमंडलों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें विदेश मंत्री, वाणिज्य मंत्री, और पेट्रोलियम मंत्री शामिल हैं. उन्होंने 1971-77 के बीच विदेश मंत्री के रूप में सेवा की और इस दौरान भारत की विदेश नीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

दिनेश सिंह का राजनीति में योगदान और प्रभाव व्यापक था. उन्होंने भारत की आंतरिक और बाह्य नीतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके कार्यकाल में भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत किया. दिनेश सिंह का जीवन सरल और विनम्र था. उनके परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे शामिल थे, और वे अपने सरल स्वभाव और लोगों के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते थे. दिनेश सिंह का निधन 30 नवंबर 1995 को हुआ. उनके निधन से भारतीय राजनीति को एक बड़ा झटका लगा, लेकिन उनकी विरासत और योगदान को हमेशा याद किया जाएगा.

दिनेश सिंह ने भारतीय राजनीति में अपने योगदान और सेवाओं के माध्यम से एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया. उनकी नीतियों और नेतृत्व ने देश के विकास और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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खगोल भौतिकविद जयंत नार्लीकर

जयंत विष्णु नार्लीकर (जन्म 19 जुलाई 1938) एक प्रख्यात भारतीय खगोल भौतिकविद हैं, जिन्हें खगोल भौतिकी और ब्रह्माण्ड विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है. उन्होंने ब्रिटिश गणितज्ञ और खगोल भौतिकविद फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर ब्रह्माण्ड विज्ञान में कई महत्वपूर्ण सिद्धांत विकसित किए.

जयंत नार्लीकर का जन्म कोल्हापुर, महाराष्ट्र में हुआ था. उनके पिता विष्णु वामन नार्लीकर एक प्रसिद्ध गणितज्ञ थे. नार्लीकर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से प्राप्त की और बाद में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से गणित में स्नातक और पीएचडी की डिग्री हासिल की. कैम्ब्रिज में, उन्होंने फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर ब्रह्माण्ड विज्ञान पर काम किया। दोनों ने मिलकर “होयल-नार्लीकर थ्योरी ऑफ़ ग्रेविटी” विकसित की. वर्ष 1972 में, नार्लीकर भारत लौटे और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में शामिल हुए. वर्ष 1988 में, उन्हें पुणे में इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रो-फिजिक्स (IUCAA) का संस्थापक निदेशक नियुक्त किया गया. उन्होंने इस संस्थान को एक प्रमुख शोध केंद्र के रूप में स्थापित किया.

नार्लीकर का काम खगोल भौतिकी और ब्रह्माण्ड विज्ञान के कई पहलुओं को शामिल करता है, जिसमें प्रारंभिक ब्रह्माण्ड, गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत, और खगोल भौतिकी शामिल हैं. उनकी प्रमुख शोध में “क्वासी-स्टेडी स्टेट थ्योरी” शामिल है, जो ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विकास के बारे में एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है. जयंत नार्लीकर को विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं, जिनमें पद्म भूषण (1965) और पद्म विभूषण (2004) शामिल हैं. उन्हें कई प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया है और वे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी और अन्य कई वैज्ञानिक संगठनों के सदस्य हैं.

नार्लीकर ने विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए कई पुस्तकें और लेख लिखे हैं. उनकी पुस्तकों ने वैज्ञानिक सिद्धांतों को जन सामान्य तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनकी प्रमुख पुस्तकों में “द स्ट्रक्चर ऑफ द यूनिवर्स” और “आन इंफिनिटी एंड बियॉन्ड” शामिल हैं.

जयंत नार्लीकर का वैज्ञानिक योगदान और उनके द्वारा स्थापित किए गए अनुसंधान संस्थान भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुए हैं. उनकी खोजों और सिद्धांतों ने खगोल भौतिकी और ब्रह्माण्ड विज्ञान के क्षेत्र में नई दिशाएँ प्रदान की हैं.

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क्रिकेट खिलाड़ी रोजर बिन्नी

रोजर माइकल हम्फ्रे बिन्नी एक पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी और क्रिकेट प्रशासक हैं, जो 1980 – 90 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख सदस्य थे. वह एक ऑलराउंडर थे, जिन्होंने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई.

रोजर बिन्नी का जन्म जन्म 19 जुलाई 1955 बैंगलोर (अब बेंगलुरु), कर्नाटक में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा और क्रिकेट की बुनियादी प्रशिक्षण बैंगलोर में प्राप्त किया. बिन्नी ने 1979 में भारत के लिए अपना टेस्ट और वनडे डेब्यू किया. वह 1983 क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम के सदस्य थे और टूर्नामेंट में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. उन्होंने विश्व कप में 18 विकेट लिए और भारत की पहली विश्व कप जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में 47 विकेट और 2509 रन बनाए, जबकि 72 वनडे मैचों में 77 विकेट और 629 रन बनाए.

बिन्नी की सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन 1983 विश्व कप में आया, जहाँ उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने 1985 में विश्व चैम्पियनशिप क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जहाँ भारत ने खिताब जीता. अपने क्रिकेट कैरियर के बाद, बिन्नी ने कोचिंग में कदम रखा. उन्होंने कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) के साथ काम किया और कर्नाटक की रणजी ट्रॉफी टीम के कोच बने. वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के राष्ट्रीय चयनकर्ता भी रहे. रोजर बिन्नी का परिवार भी क्रिकेट से जुड़ा हुआ है. उनके बेटे, स्टुअर्ट बिन्नी, ने भी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेला है.

रोजर बिन्नी को भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, विशेष रूप से 1983 विश्व कप में उनके योगदान के लिए. उनकी गेंदबाजी और बल्लेबाजी ने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाई और वह भारतीय क्रिकेट के एक सम्मानित खिलाड़ी माने जाते हैं.

रोजर बिन्नी का क्रिकेट कैरियर और उसके बाद का योगदान भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है. उनकी उपलब्धियां और समर्पण युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं.

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पत्रकार एवं लेखक हर्षा भोगले

हर्षा भोगले एक प्रख्यात भारतीय क्रिकेट कमेंटेटर, पत्रकार, और लेखक हैं. वे क्रिकेट कमेंट्री के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं और अपनी विश्लेषणात्मक और संतुलित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं.

हर्षा भोगले का जन्म 19 जुलाई 1961 हैदराबाद, तेलंगाना में हुआ था. उन्होंने हैदराबाद पब्लिक स्कूल और फिर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास से रसायन इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद, उन्होंने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद से पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त की.

भोगले ने अपने कैरियर की शुरुआत एक विज्ञापन कंपनी में की, लेकिन जल्द ही उन्हें ऑल इंडिया रेडियो में क्रिकेट कमेंट्री का मौका मिला. उनकी क्रिकेट कमेंट्री में अनोखी शैली और गहरी समझ ने उन्हें जल्दी ही लोकप्रिय बना दिया.

हर्षा भोगले 1991-92 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम के साथ गए और वहां उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (ABC) के लिए कमेंट्री की. इसके बाद, उन्होंने ESPN और Star Sports के साथ लंबे समय तक काम किया और कई प्रमुख क्रिकेट टूर्नामेंट्स में कमेंट्री की, जिनमें वर्ल्ड कप, आईपीएल, और विभिन्न द्विपक्षीय सीरीज शामिल हैं. भोगले की शैली और उनके विश्लेषण ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया.

हर्षा भोगले ने क्रिकेट पर कई किताबें लिखी हैं और विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लेख भी लिखे हैं. उनकी प्रमुख किताबों में “The Winning Way” शामिल है, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी अनीता भोगले के साथ लिखा है. यह किताब खेल और कॉर्पोरेट नेतृत्व के सिद्धांतों को मिलाकर लिखी गई है.

भोगले ने कई टेलीविजन शो और कार्यक्रम भी होस्ट किए हैं. वे TEDx स्पीकर भी हैं और विभिन्न प्लेटफार्मों पर अपनी विचारशील बातचीत के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने “Cricbuzz” के साथ भी काम किया है, जहाँ वे क्रिकेट विश्लेषण और कमेंट्री प्रदान करते हैं. हर्षा भोगले का विवाह अनीता भोगले से हुआ है, जो एक व्यवसायिक विशेषज्ञ हैं. उनके दो बच्चे हैं.

हर्षा भोगले का नाम क्रिकेट कमेंट्री में सबसे सम्मानित नामों में से एक है. उनकी आवाज़ और उनके विश्लेषण ने करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों को मैचों का आनंद लेने में मदद की है. उन्होंने क्रिकेट कमेंट्री को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है और उनकी समझ और विश्लेषण को व्यापक रूप से सराहा जाता है.

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साहित्यकार गोपालदास नीरज

गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ (1925-2018) भारतीय साहित्यकार, कवि और गीतकार थे, जिनका हिंदी साहित्य और फिल्मी गीतों में महत्वपूर्ण योगदान है. उनके लेखन में मानवीय भावनाओं का गहन चित्रण और सरल भाषा का प्रयोग मिलता है.

गोपालदास नीरज का जन्म 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गाँव में हुआ था. उनका बचपन संघर्षमय था. उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपनी मेहनत और संकल्प के बल पर उन्होंने शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने काव्य और साहित्य में अपनी रुचि को जारी रखते हुए उच्च शिक्षा प्राप्त की और आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की.

नीरज की कविताएं मानवीय संवेदनाओं, प्रेम, प्रकृति, और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होती थीं. उनकी कविता में सरलता और गहराई का अनूठा संगम देखने को मिलता है. उनकी प्रमुख काव्य संग्रहों में “नीरज की पाती”, “कारवाँ गुजर गया”, और “बादलों से सलाम लिया” शामिल हैं. वे मंच कवि के रूप में भी प्रसिद्ध थे और कवि सम्मेलनों में उनकी प्रस्तुति को लोग बहुत पसंद करते थे.

गोपालदास नीरज ने हिंदी फिल्मों के लिए कई प्रसिद्ध गीत लिखे हैं. उनके गीतों में गहराई और भावनाओं का अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है. उनके कुछ प्रसिद्ध फिल्मी गीतों में “कारवाँ गुजर गया”, “ए भाई ज़रा देख के चलो”, “शोखियों में घोला जाए”, और “फूलों के रंग से” शामिल हैं. उनके गीतों ने भारतीय सिनेमा में एक नई दिशा दी और उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.

गोपालदास नीरज को उनके साहित्यिक और फिल्मी योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें पद्म श्री (1991) और पद्म भूषण (2007) शामिल हैं. उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और यश भारती पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. उनका निधन 19 जुलाई 2018 को हुआ, लेकिन उनके गीत और कविताएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं.

गोपालदास नीरज ने अपने लेखन और गीतों के माध्यम से भारतीय साहित्य और सिनेमा को समृद्ध किया. उनकी सरल भाषा और गहन भावनाओं का मिश्रण उन्हें एक अद्वितीय साहित्यकार और गीतकार बनाता है. उनकी रचनाएं आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं और वे हमेशा भारतीय साहित्य के एक महानायक के रूप में याद किए जाएंगे.

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