Apni VirasatNews

होलिका दहन…

दुनिया में होली ही एक ऐसा पर्व है जो सामुदायिक बहुलता की समरस्ता से जुड़ा हुआ है. इस पर्व में मेल-मिलाप का जो आत्मीय भाव उमड़ता है. होली रंग-राग, आनंद-उमंग और प्रेम-हर्षोल्लास का उत्सव है. देश के अलग-अलग हिस्सों में होली अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है. होली को लेकर कई सारी मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि दीवाली जहां बाहरी सफाई का त्योहार है वहीं होली मानसिक अशुद्धियों को दूर करने का पर्व है.

होली का त्यौहार हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका के दहन की घटना से जुड़ा है. होली को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है इसलिए जब वह अपने भतीजे और विष्णु-भक्त प्रहलाद को विकृत और क्रूर मानसिकता के चलते गोद में लेकर प्रज्वलित आग में प्रविष्ट हुई तो खुद तो जलकर खाक हो गई, परंतु प्रहलाद बच गए.

वैदिक युग में होली को ‘नवान्नेष्टि यज्ञ’ कहा जाता था, क्योंकि यह वो समय होता है, जब खेतों में पका हुआ अनाज काटकर घरों में लाया जाता है. होली की अग्नि में भी बालियां होम की जाती हैं. यह लोक-विधान अन्न के परिपक्व और आहार के योग्य हो जाने का प्रमाण है इसलिए वेदों में इसे ‘नवान्नेष्टि यज्ञ’ कहा गया है यानी इस समय अनाज के नए स्वाद के आगमन का समय है.

होली का त्योहार मनाने का वैज्ञानिक कारण  होलिका दहन की परंपरा से जुड़ा हुआ है. चुकिं, शरद ऋतु की समाप्ति और बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ा देता है लेकिन जब होलिका जलाई जाती है तो उससे करीब 145 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान बढ़ता है. परम्परा के अनुसार जब लोग जलती होलिका की परिक्रमा करते हैं तो होलिका से निकलता ताप शरीर और आसपास के पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है.

ऐसे करें होलिका पूजन :-

रोली, अक्षत, पुष्प, कच्चा सूत, सुपारी, नारियल, गुड़, बताशे, गुलाल और गेहूं या किसी अन्य अनाज की बालियां रखनी चाहिए. सभी सामग्रियां अर्पण करके कच्चा सूत लपेटते हुए होलिका की सात परिक्रमा करनी चाहिए. इसके अलावा घर में बनाए गए पकवान भी अर्पित करने चाहिए. होलिका दहन के अगले दिन होलिका की राख को घर में लाने एवं शरीर में लेप करने से सुख-समृद्धि एवं आरोग्यता की प्राप्ति होती है.

========  ==========  ============ ======

Holika Dahan…

Holi is the only festival in the world that is associated with the harmony of community plurality. The soulful feeling of reconciliation emerges in this festival. Holi is a festival of color-melody, joy-excitement, and love-joy. Holi is celebrated in different ways in different parts of the country. Many beliefs are prevalent regarding Holi. It is said that while Diwali is a festival of external cleanliness, Holi is a festival of removing mental impurities.

The festival of Holi is associated with the burning of Hiranyakashipu’s sister Holika. Holi is considered to be the festival of the victory of good over evil, so when she entered the blazing fire with her nephew and Vishnu-devotee Prahlad in her arms due to a perverted and cruel mentality, she herself was burnt to ashes, but Prahlad survived. Went.

In the Vedic era, Holi was called ‘Navanneshti Yagya’, because it is the time when the grains cooked in the fields are cut and brought to the homes. Earrings are also burnt in the fire of Holi. This folk law is the proof of food grains becoming ripe and fit for diet, therefore in Vedas, it is called ‘Navanneshti Yagya’ i.e. this time is the time for the arrival of the new taste of grains.

The scientific reason for celebrating the Holi festival is related to the tradition of Holika Dahan. However, this period of the end of autumn and the arrival of spring increases the growth of bacteria in the environment and body, but when Holika is lit, the temperature rises up to about 145 degrees Fahrenheit. According to tradition, when people circumambulate the burning Holika, the heat emanating from the Holika destroys the bacteria present in the body and the surrounding environment.

How to do Holika Pooja:-

Roli, Akshat, flower, raw yarn, betel nut, coconut, jaggery, batashe, gulal, and earrings of wheat or any other grain should be kept. Holika should be circumambulated seven times by offering all the ingredients and wrapping it with raw yarn. Apart from this, dishes made at home should also be offered. On the next day of Holika Dahan, bringing the ashes of Holika into the house and applying it to the body brings happiness, prosperity, and health.

Rate this post
:

Related Articles

Back to top button