Dharm

हरतालिका तीज…

एक ऐसा व्रत जिसमें चारों तरफ हरियाली की चादर बिछी रहती है. कुंवारी लकड़ियाँ व महिलाएं झुला झूलती है अपने हाथों में मेहंदी लगाती हैं.  पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार शिव –पार्वती के अटूट प्रेम को आधार बनाकर किया जाने वाला व्रत तीज है. उसे कई नामों से जानते है तीज, कजली तीज, हरियाली तीज, मधुश्रवा, करवां चौथ या हरतालिका तीज. इस व्रत को भादों महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीय को मनाया जाता है.

हरतालिका तीज जिसमें हरतालिका का अर्थ है हरत +आलिका. हरत का अर्थ हरण करने वाला और आलिका का अर्थ है सहेली या सखी. इस पर्व को राजस्थान, मध्प्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस पर्व में महिलाएं अपने अक्षय सुख की लालसा लिए श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाती है. इस दिन महिलाएं या कुंवारी लड़कियाँ भगवान गौरी-शंकर की पुजा करती हैं. वहीं देश के कुछ हिस्सों में करवा चौथ का भी पर्व मनाया जाता है. ज्ञात है कि, करवा चौथ के व्रत में महिलाएं चाँद देखने के बाद व्रत तोड़ देती हैं जबकि कजली तीज के व्रत में महिलाएं निर्जला व्रत करते हुए दूसरे दिन व्रत का समापन करती है.

कथा:-

एक बार पार्वतीजी ने बाल्यावस्था में भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया. उनके व्रत के उद्देश्य से अपरिचित उनके पिता गिरिराज अपनी बेटी को कष्ट में देखकर बहुत दुखी हुए. कुछ समय उपरान्त, नारद मुनि ने आकर गिरिराज से कहा कि, आपकी बेटी के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनसे विवाह करना चाहते हैं, उनकी बात सुनकर पार्वती के पिता ने बहुत ही प्रसन्न होकर अपनी सहमति दे दी. नारद मुनि ने जब भगवान विष्णु से जाकर कहा कि, गिरिराज अपनी बेटी का विवाह आपसे करना चाहते हैं, श्री विष्णु ने भी विवाह के लिए अपनी सहमति दे दी.

गिरिराज ने अपनी पुत्री को यह शुभ समाचार सुनाया कि, उनका विवाह श्री विष्णु के साथ तय कर दिया गया है. यह सुनते ही पार्वती जोर-जोर से विलाप करने लगीं, पार्वती की प्रिय सखी ने विलाप का कारण जानना चाहा तो पार्वती ने खा कि “वो” तो शिवजी को अपना पति मान चुकी हैं और पिताजी उनका विवाह श्री विष्णु से तय कर चुके हैं. पार्वती ने अपनी सखी से कहा कि वह उनकी सहायता करे, उन्हें किसी गोपनीय स्थान पर छुपा दे, अन्यथा वे अपने प्राण त्याग देंगी. पार्वती की बात मान कर सखी ने उनका हरण कर घने वन में ले गई, और एक गुफा में उन्हें छुपा दिया. वहीं गुफा में बैठकर पार्वती ने कठोर साधना के साथ भगवान शिव की आराधना शुरू की.

पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाया इसी बीच भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र में पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाया और निर्जला, निराहार रहकर, रात्रि जागरण कर व्रत किया. उनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने साक्षात दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा, तब पार्वती ने उन्हें अपने पति रूप में मांग लिया. पार्वती ने व्रत संपन्न होने के बाद समस्त पूजन सामग्री और शिवलिंग को गंगा नदी में प्रवाहित किया और अपनी सखी के साथ व्रत का पारण किया. उधर खोजते-खोजते गिरिराज भी वहां पहुंच गए, और पार्वती से घर त्याग करने का कारण  पूछा. पार्वती ने खा कि वो भगवान भोलेनाथ को अपना पति मान चुकी है, और आप श्री विष्णु से मेरा विवाह कर रहे हैं. जबतक आप मेरा विवाह शिव से नहीं करा देते, तब तक मैं घर नहीं जाऊंगी. पिता गिरिराज ने पार्वती का हठ स्वीकार कर लिया और धूमधाम से उनका विवाह शिवजी के साथ संपन्न कराया.

पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने की लालसा से यह व्रत हरतालिका या कजली तीज का व्रत किया था. उसके बाद भगवान भोलेशंकर माता पार्वती को पति के रूप में मिले थे. इससे जुडी एक मान्यता है कि, महिलाएं माता पार्वती के समान ही सुखपूर्वक जीवन करती है. देश के कई भागों में माता पार्वती की झांकी भी निकलते हैं.

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Hartalika Teej…

A fast in which a blanket of greenery is spread all around. Unmarried girls and women swing and apply henna on their hands. According to mythological texts, Teej is a fast observed based on the unwavering love of Shiva and Parvati. It is known by many names like Teeja, Kajali Teej, Hariyali Teej, Madhushrava, Karvan Chauth or Hartalika Teej. This fast is celebrated on the third day of Shukla Paksha of Bhadon month.

Hartalika Teej in which Hartalika means Harat + Alika. Harat means one who abducts and Alika means friend or companion. This festival is celebrated with great pomp in Rajasthan, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh and Bihar. Women celebrate this festival with devotion and faith, yearning for their eternal happiness. On this day women or unmarried girls worship Lord Gauri-Shankar. The festival of Karva Chauth is also celebrated in some parts of the country. It is known that, during the fast of Karva Chauth, women break the fast after seeing the moon, whereas during the fast of Kajali Teej, women observe Nirjala fast and end the fast on the second day.

Story: –

Once in her childhood, Parvati ji performed rigorous penance to get Lord Shiva as her husband. Her father Giriraj, unaware of her fast’s purpose, was very sad to see his daughter in pain. After some time, Narada Muni came and told Giriraj that, pleased with the rigorous penance of her daughter, Lord Vishnu wanted to marry her. Hearing this, Parvati’s father became very happy and gave his consent. When Narad Muni went to Lord Vishnu and said that Giriraj wanted to marry his daughter, Shri Vishnu also gave his consent for the marriage.

Giriraj told the good news to his daughter that her marriage had been fixed with Shri Vishnu. On hearing this, Parvati started mourning loudly. When Parvati’s dear friend wanted to know the reason for her mourning, Parvati replied that “she” had accepted Lord Shiva as her husband and her father had fixed her marriage with Shri Vishnu. Parvati asked her friend to help them and hide them in some secret place, otherwise, she would sacrifice her life. Following Parvati’s advice, Sakhi abducted him, took him to a dense forest, and hid him in a cave. Parvati started worshipping Lord Shiva with rigorous meditation while sitting there in the cave.

Parvati made a Shivlinga of sand. Meanwhile, on the Tritiya of Bhadrapada Shukla Paksha in Hasta Nakshatra, Parvati made a Shivlinga of sand and fasted by staying waterless and fasting all night. Pleased with his severe penance, Lord Shiva appeared in person and asked for a boon, and then Parvati asked for him as her husband. After the completion of the fast, Parvati immersed all the worship material and Shivalinga in the river Ganga and broke the fast with her friend. While searching there, Giriraj also reached there and asked Parvati the reason for leaving her home. Parvati said that she has accepted Lord Bholenath as her husband, and you are marrying me to Shri Vishnu. I will not go home until you get me married to Shiva. Father Giriraj accepted Parvati’s stubbornness and got her married to Lord Shiva with great pomp.

According to mythological texts, Mother Parvati observed this fast of Hartalika or Kajali Teej with the desire to meet Lord Shiva. After that Lord Bholeshankar met Mother Parvati as her husband. There is a belief associated with this tea that women live a happy life like Mother Parvati. Tableaux of Goddess Parvati are also seen in many parts of the country.

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