अर्थशास्त्र से संबंधित-120.

Q:-What are the main functions of currency? How does currency overcome the shortcomings of the barter system?

Major functions of currency…

·         Medium of exchange:- works as a medium of exchange. Today all goods and services are bought and sold only through currency.

·         Price Measurement:- At present, the value of all goods and services available in the currency economy can be measured.

·         Combination of value:- Accumulation of value can be done easily by currency. Money is stored in the form of money for future.

·         Postponed Payment Basis:- presents the basis for currency lending deals. These are paid as currency only.

Troubleshooting barter through currency….

1.       The use of currency does not require the requirements of double coincidence. Because all goods are traded with the help of currency.

2.       Currency is divided into small values. Therefore, there is no need to divide any object.

3.       Transfer of value by currency can be done easily. A person can sell his property or dhar etc. as currency and buy new property etc. in another place.

4.       Combining purchasing power is possible through currency. You can store and store items as currency for future.

5.       The value of each item can be easily measured by currency.

6.       The difficulty of future payments by currency has been overcome.

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प्र0 :- मुद्रा के प्रमुख कार्य कौन से है ? मुद्रा किस प्रकार वस्तु विनिमय प्रणाली की कमियों को दूर करती है?

मुद्रा के प्रमुख कार्य

·         विनिमय का  माध्यम :- मुद्रा विनिमय के माध्यम का कार्य करती है. आज सभी वस्तुएँ तथा सेवाएँ मुद्रा के माध्यम से ही खरीदी और बेची जाती है.

·         मूल्य मापन :- वर्तमान समय में मुद्रा अर्थव्यवस्था में उपलब्ध सभी वस्तुओं तथा सेवाओं का मूल्य को मापा जा सकता है.

·         मूल्य का संयच :- मुद्रा के द्वारा मूल्य का संचय सरलतापूर्वक किया जा सकता है. भवष्यि के लिए मूल्य का संचय मुद्रा के रूप में ही किया जाता है.

·         स्थगित भुगतान का आधार :- मुद्रा उधार सौदों के लिए आधार प्रस्तुत करती है. इनका भुगतान मुद्रा के रूप में ही किया जाता है.

मुद्रा के द्वारा वस्तु विनिमय की कठिनाइयों का निवारण….

1.       मुद्रा के प्रयोग से दोहरे संयोग की आवश्यकताओं की जरूरत नहीं पड़ती है. क्योंकि सभी वस्तुओं का क्रय-विक्रय मुद्रा की सहायता से किया जाता है.

2.       मुद्रा छोटे-छोटे मूल्यों में विभाजित होती है. अतः किसी भी वस्तु के विभाजन की आवश्यकता नहीं होती है.

3.       मुद्रा के द्वारा मूल्य के हस्तान्तरण आसानी से हो सकता है. कोई व्यक्ति अपनी सम्पत्ति या धर आदि को मुद्रा के रूप में बेचकर दूसरे स्थान में नई सम्पत्ति आदि को खरीद सकता है.

4.       मुद्रा के द्वारा क्रय शक्ति संयच संभव है. आप भविष्य के लिए वस्तुओं को बेचकर मुद्रा के रूप में संग्रह कर के रख सकते है.

5.       मुद्रा के द्वारा प्रत्येक वस्तु का मूल्य आसानी से मापा जा सकता है.

6.       मुद्रा के द्वारा भविष्य में भुगतान की कठिनाई दूर हो गई है.



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